देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के गठबंधन की अगुवाई वाली सरकार है। राज्य की अलग-अलग योजना पर खर्च होने वाले बजट, केंद्र सरकार से मिलने वाली योजनाओं के अलावा हर विधायक को भी कुछ राशि मिलती है जिसके जरिए वे अपने क्षेत्र में काम करवा सकें। इसी को विधायक निधि कहा जाता है। साल 2022 में विधायक निधि को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये सालाना कर दिया गया है। इस फंड की एक खास बात है कि विधायक काम का सुझाव और प्रस्ताव देते हैं और स्थानीय प्रशासन उस काम को करवाता है।
अगर उत्तर प्रदेश में विधायक निधि को देखें तो इस पर भारी रकम खर्च होती है। एक विधायक के लिए एक साल में 5 करोड़ की विधायक निधि जारी की जाती है। पैसे बच गए तो अगले साल की विधायक निधि में जुड़ जाते हैं। इस तरह एक विधायक को पांच साल के कार्यकाल में 25 करोड़ की विधायक निधि मिलती है जिससे वह अपने क्षेत्र में काम करवा सकता है। अब कुल 403 विधायक हैं तो एक साल में कुल 2015 करोड़ रुपये की निधि आती है। पांच साल में 10075 करोड़ रुपये स्थानीय तौर पर विकास के काम कराने के लिए जाते हैं।
कहां खर्च होते हैं ये पैसे?
विधायक निधि के खर्च और कार्यों की जानकारी देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक वेबसाइट बना रखी है। इस वेबसाइट पर सभी विधायकों को मिली राशि, उनके खर्च और उनके कराए गए कामों का ब्योरा दर्ज होता है। हर साल होने वाले काम और खर्च के हिसाब से वेबसाइट अपडेट की जाती है। इस पर पूरे खर्च के हिसाब-किताब के साथ-साथ बचे पैसों, स्वीकृत काम, पेंडिंग काम और कराए गए काम की भी जानकारी दी जाती है।
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इसी वेबसाइट पर मौजूद आंकड़े बताते हैं कि साल 2024-25 सबसे ज्यादा विधायक निधि रास्तों पर लाइट लगाने वाले के लिए खर्च की गई। पिछले साल के बचे पैसों को मिलाकर कुल 2336 करोड़ रुपये थे जिसमें से 1899.27 करोड़ रुपये के काम स्वीकृत किए गए। कुल 34,621 कामों की अनुशंसा की गई, इसमें से 28793 काम मंजूर हुए और कुल 19606 काम पूरे हो पाए।
सबसे ज्यादा काम सड़क पर लाइट का इंतजाम कराने में खर्च हुए। इसके बाद सीसी रोड बनवाने और इंटरलॉकिंग कराने के लिए विधायक निधि खूब खर्च हुई। इसके अलावा सोलर लाइट लगवाने, साफ-सफाई और पेयजल के लिए, बिजली के काम कराने, संपर्क मार्ग बनवाने और एंबुलेंस खरीदने के लिए भी विधायक निधि खर्च की गई।
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साल 2024-25 में मंजूर हुए कुल 28,784 कामों में से 10 हजार से ज्यादा काम सड़क पर रोशनी उपलब्ध कराने यानी हाई मास्ट, सोलर ऊर्जा या अन्य लाइटें लगवाने से जुड़े थे। इसके बाद लगभग 5 हजार काम सीसी रोड के, 4100 काम इंटलॉकिंग के और लगभग 2500 काम सोलर लाइट या सोलर प्लांट लगवाने के थे।
सबसे कम काम कौन से हुए?
उसी साल एंबुलेंस खरीदने के 4 काम, लैपटॉप खरीदने के कुल 9 काम और तालाब के निर्माण या जीर्णोद्धार से जुड़े कुल 25 काम कराए गए। सार्वजनिक शौचालय बनाने के 59 और बारात घर/चौपाल/रैनबसेरा बनाने के 72 कामों को भी मंजूरी मिली।
