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बिखरी टीम, बड़े चेहरे की तलाश, उत्तराखंड में कांग्रेस संभाल रहे चेहरे कौन हैं?

प्रदेश कांग्रेस समिति को ऐसे चेहरों की तलाश है जो अभी से कांग्रेस के लिए 2027 की जमीन तैयार कर सकें। पार्टी, मंथन से आगे बढ़ नहीं पा रही है।

Uttrakhand

हरीश सिंह रावर और गणेश गोदिया। AI एडिट। Photo Credit: ChatGPT

दक्षिण के 3 राज्यों की सत्तारूढ़ पार्टी, कांग्रेस, उत्तर में संघर्ष कर रही है। उत्तराखंड में तो अब दशक हो गए, कांग्रेस सत्ता में नहीं आ पाई। कांग्रेस के लिए पहाड़ी डगर इतनी जोखिम भरी हो गई है कि पार्टी को न तो राज्य स्तरीय कद का नेता मिल रहा है, न ही अभी तक ढूंढने की कवायद की जा रही है। कांग्रेस का सिर्फ एक चेहरा, चर्चा में रहता है, वह है पूर्व मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत की। 

हरीश सिंह रावत, उम्र के 8वें दशक में पहुंचने वाले हैं। वह अभी तक वही इकलौते कांग्रेस के चेहरे बने हुए हैं। कांग्रेस की तरफ से वही घूम-घूमकर पहाड़ों की सैर कर रहे हैं। गांवों में जा रहे हैं, लोगों से मिल रहे हैं। उम्र संबंधी जटिलताएं हैं लेकिन कांग्रेस के इकलौते लोकप्रिय चेहरे भी वहीं हैं, जिनके नाम पर वोट पड़ते रहे हैं।

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कांग्रेस के पास संगठन नहीं, चुनाव कैसे जीतेगी?

उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदिया हैं। करीब 6 महीने पहले उन्हें यह जिम्मेदारी मिली। दिलचस्प बात यह है कि अभी तक प्रदेश कार्यसमिति के बिना ही वह काम कर रहे हैं। जब संगठन नहीं है तो एक साल पहले चुनाव में कैसे उतरेंगे, यह भी बड़ा सवाल है। वह दिल्ली दौरे पर आने वाले हैं, जिसमें उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस आलाकमान से बात बन सकती है। 

कांग्रेस, अभी तक केरल में शपथ ग्रहण और तमिलनाडु में चुनाव के नतीजों के बाद हुए गठबंधन धर्म को निभा रही थी। अब कांग्रेस के सामने 7 राज्य हैं, किस राज्य को कांग्रेस प्राथमिकता देगी, यह भी बड़ा सवाल है। प्रदेश कार्यसमिति की सूची को अंतिम रूप दिए जाने का इंतजार है लेकिन बात ही नहीं बन पाई है। गणेश गोदियाल सक्रिय हैं लेकिन लोकप्रियता में वह चूक रहे हैं। 

गणेश गोदियाल, करण महारा, कांग्रेस के संगठन में कौन?

गणेश गोदियाल से पहले करण महारा अप्रैल 2022 से नवंबर 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में लोकसभा चुनाव भी हुए, लेकिन तब भी प्रदेश कार्यसमिति का गठन नहीं हो सका। लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को उत्तराखंड में कोई कामयाबी नहीं मिल पाई। 5 की 5 सीट, कांग्रेस के खाते में चली गई। करण महारा सक्रिय हैं लेकिन सिर्फ रानीखेत में नजर आ रहे हैं, अपनी विधानसभा बचाने पर जोर है। ऐसे में कांग्रेस के लिए परेशानी बढ़ रही है। 

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अब कांग्रेस क्या कर सकती है?

2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अब कांग्रेस आलाकमान इस मामले में अगर देरी बरतता है तो बड़ा घाटा हो सकता है। गणेश गोदियाल की दिल्ली यात्रा अगर सफल हुई तो चुनावी कैंपेन को बढ़त मिल सकती है। कांग्रेस संगठन में बदलाव की उम्मीद कर रहा है। जिला अध्यक्ष, प्रभारी और ब्लॉक स्तर की कमेटियों को मजबूत कर सकती है। जिला कार्यसमितियों के विस्तार की कवायद भी हुई है। अब कांग्रेसी नेता कह रहे हैं पार्टी, बड़ा बदलाव होगा। अब गणेश गोदियाल, दिल्ली दौरे में कामयाब होते हैं तो कांग्रेस को प्रदेश समिति में भरोसेमंद सिपाही मिल सकते हैं। 

एक चेहरा जिसके सहारे आज भी है कांग्रेस

कांग्रेस के पास हरीश रावत से ज्यादा लोकप्रिय चेहरा फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। अलग बात यह है कि न तो उनके पास संगठन में कोई पद है न ही केंद्रीय स्तर पर। वह मुख्यमंत्री रहे हैं, पहाड़ी और मैदानी दोनों जगहों पर उन्हें लोग पसंद करते हैं। अब उन पर फिल्में बन रहीं हैं। 'उत्तराखंडियत की ओर' नाम से एक डॉक्यूमेंट्री आ रही है। हरीश रावत की जिंदगी पर यह फिल्म बनी है। हरीश सिंह घूम-घूमकर जनसभा कर रहे हैं लोगों से मिल रहे हैं। चुनाव अगले साल है लेकिन यहां राहुल गांधी 2024 में ही आखिरी बार आए थे। प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का भी दौरा नहीं चर्चा में आया। एक तरफ बीजेपी न अभी सारे संसाधन चुनावी राज्यों में झोंकने की शुरुआत कर दी है, कांग्रेस ऐसा नहीं कर रही है। 

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हरीश रावत के अलावा अभी कांग्रेस के खेवनहार कौन हैं?

यशपाल आर्य, उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। कांग्रेस के बड़े नेता हैं। उनके समर्थक, उन्हें भावी मुख्यमंत्री मान रहे हैं। वे कुमाऊं क्षेत्र से आते हैं। दलित समाज के बड़े चेहरों में से एक हैं। लोग उन्हें पसंद करते हैं। 

गणेश गोदियाल, कम लोकप्रिय हैं लेकिन संगठन में मजबूत पद पर हैं। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षता इन्हीं के पास है। नवंबर 2025 से ही वह यह अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दूसरी बार, कांग्रेस ने इन पर भरोसा जताया है। गढ़वाल क्षेत्र से आते हैं, आक्रामक कैंपेनिंग के लिए जाने जाते हैं। 

प्रीतम सिंह, चकराता से विधायक हैं और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं। इन्हें चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई है। जौनसार-बावर इलाके में मजबूत पकड़ रखते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इन्हें पसंद करते हैं। 

हरक सिंह रावत, कांग्रेस के लोकप्रिय चेहरे हैं। राज्य के वरिष्ठ नेताओं में गिनती होती है। हरक सिंह रावत के पास चुनाव प्रबंधन की अध्यक्षता है। आक्रामक कैंपेनिंग के लिए जाने जाते हैं। गढ़वाल क्षेत्र में सक्रिय हैं। 2027 के चुनाव से पहले बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। 
 

भुवन चंद्र कापड़ी, वह शख्स हैं, जिन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री को खटीमा विधानसभा सीट से करारी हार दी थी। देशभर में इनकी चर्चा हुई थी। अब, विधानसभा में कांग्रेस के उपनेता हैं। कांग्रेस के युवा चेहरे हैं लेकिन 2027 में बड़ी भूमिका मिल सकती है। इनके अलावा राजकुमार ठुकराल, नारायण पाल, भीमलाल आर्य, गौरव गोयल और लखन सिंह नेगी जैसे चेहरे भी चर्चा में हैं लेकिन बड़ी जिम्मेदारी से दूर हैं।


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