उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मणों का मुद्दा बार-बार योगी सरकार को परेशान कर रहा है। इसी बीच माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद भी गले की फांस बनता दिख रहा है। उधर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर सवर्ण जाति के लोग आक्रोशित हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश प्रांतीय सेवा आयोग (UPPCS) के अधिकारी ने सरकारी नौकरी से ही इस्तीफा दे दिया है। अलंकार अग्निहोत्री नाम के इस अधिकारी का कहना है कि वह अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी खींचे जाने और UGC के नए नियमों को लेकर व्यथित हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल हैं जिसमें वह एक में पोस्टर लिए खड़े हैं और दूसरी तस्वीर में वह सरकारी दफ्तर में अपने नाम के आगे 'RESIGNED' लिख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखी चिट्ठी में अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए नियमों को रॉलेट ऐक्ट जैसा बताया है। अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई घटना के बहाने स्थानीय प्रशासन को घेरते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने योगी सरकार पर ब्राह्मण विरोधी होने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार में मौजूद ब्राह्मण जनप्रतिनिधियों ने कोई विरोध नहीं जताया और ब्राह्मणों के हित में बात करने वाला कोई जनप्रतिनिधि नहीं है जिससे यह वर्ग अनाथ और असहाय महसूस कर रहा है।
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राज्यपाल के अलावा चुनाव आयोग के अधिकारियों को चिट्ठी लिखने के बारे में उनका कहना है, 'मैं बरेली के पदेन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के रूप में भी सेवाएं दे रहा था इसलिए मैंने CEC और CEO उत्तर प्रदेश को भी अपना इस्तीफा भेज रहा हूं। देश में अब देसी सरकार नहीं विदेशी बिदेशी जनता पार्टी की सरकार है।'
इस्तीफे की अहम वजह क्या है?
अपनी चिट्ठी में अलंकार अग्निहोत्री लिखते हैं, 'प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी और उनके शिष्य बटुक ब्राह्मणों से स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की और वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर और उसकी शिखा को हाथ से घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया। चोटी/शिखा ब्राह्मणों और साधु संतों का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक है और अधोहस्ताक्षरी स्वंय ब्राह्णण वर्ग से है, घटना से यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्मणों का देशव्यापी अपमान किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय प्रशासन और वर्तमान की राज्य सरकार एक ब्राह्णण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है और साधु संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है।'
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राजनीतिक पार्टी बनाएंगे अलंकार अग्निहोत्री?
अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी चिट्ठी में कई संकेत दिए हैं। वह लिखते हैं, 'ब्राह्मण और सजातीय जन प्रतिनिधि अपने सजातीय समाज के प्रति जवाबदेह न होकर किसी कॉरपोरेट कंपनी के सेवक बनकर रह गए हैं। अब समय आ गया है कि ब्राह्मण और संपूर्ण सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण हो जिससे कि सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा की जा सके और केंद्र सरकार और राज्य सरकार में उपस्थित भ्रम की स्थिति दूर की जा सके।'
कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?
अलंकार अग्निहोत्री की लिखी चिट्ठी के मुताबिक, वह साल 2019 बैच के PCS अधिकारी हैं। मौजूदा वक्त में वह यूपी के बरेली जिले में सिटी मैजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे। PCS अफसर बनने से पहले 10 साल तक आईटी सेक्टर में नौकरी करने वाले अलंकार अग्निहोत्री आईआईटी बीएचयू से बीटेक की डिग्री हासिल कर चुके हैं और इसी डिग्री के आधार पर वह आईटी की नौकरी कर रहे थे।
