logo

ट्रेंडिंग:

धर्म स्थलों पर मुस्लिमों की एंट्री बैन, CM धामी बोले, 'फैसला सरकार नहीं करेगी'

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर चल रहे विवाद पर अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में सरकार दखल नहीं देगी और मंदिर प्रबंधन ही अंतिम फैसला लेगा।

CM Pushkar Singh Dhami

सीएम पुष्कर सिंह धामी, Photo Credit- Social Media

शेयर करें

संबंधित खबरें

Reporter

उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ और यमुनोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की बात चल रही है। 25 जनवरी को बद्रीनाथ केदारनाथ टेंपल कमेटी (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि दोनों धामों समेत मंदिर समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के एंट्री पर रोक  लगा दी जाएगी। इसका फैसला आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया कि इस मामले में सरकार दखल नहीं देगी और मंदिर प्रबंधन ही अंतिम फैसला लेगा।


देहरादून में मीडिया से बात करते हुए सीएम ने कहा है कि इन पवित्र स्थानों की देखरेख और व्यवस्था का जिम्मा हमेशा से विभिन्न धार्मिक संगठनों, तीर्थ सभाओं और हमारे पूज्य संत समाज के पास रहा है, और सरकार इसी परंपरा का सम्मान करती है।

 

यह भी पढ़ें: नितिन नवीन से मिलने पहुंचे पुजारी ने फाड़ लिए कपड़े, बांके बिहारी मंदिर में बवाल

सीएम का पूरा बयान

सीएम धामी ने प्रदेश के मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक को लेकर चल रही चर्चाओं पर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मंदिरों में किसे प्रवेश देना है और किसे नहीं इसका फैसला मंदिर का प्रबंधन खुद करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह के फैसलों में सीधे तौर पर शामिल नहीं है और न ही वह इसे थोप रही है। 

 

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह फैसला सरकार का नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमारा इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है, फैसला लेने में मंदिर समितियां खुद सक्षम हैं।'

उन्होंने यह बात तब कही जब राज्य में कुछ मंदिरों के बाहर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने वाले बैनर और बोर्ड देखे गए थे। इस पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि हर मंदिर की अपनी मर्यादा और परंपराएं होती हैं। सरकार का काम व्यवस्था बनाए रखना है लेकिन मंदिर के अंदरूनी नियम-कानून वहां की समितियां ही तय करती हैं।

 

यह भी पढ़ें: अंजली अरोड़ा के बॉयफ्रेंड आकाश संसनवाल को पुलिस ने गिरफ्तार क्यों कर लिया?


सीएम ने कहा कि तीर्थ सभा और संत समुदाय ही इन प्राचीन मंदिरों के असली संरक्षक हैं और उनके प्रबंधन में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार किसी भी नीति या बदलाव को थोपने के बजाय इन धार्मिक संगठनों के विचारों और मतों को प्राथमिकता देगी। सरकार का मानना है कि जो लोग सदियों से इन परंपराओं को निभा रहे हैं, उन्हीं के दिशा-निर्देशों में मंदिरों का विकास और देखरेख होनी चाहिए।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap