मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में नगर निगम की बजट चर्चा के दौरान 'वंदे मातरम' गाने को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस की दो महिला पार्षदों फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान द्वारा राष्ट्रीय गीत गाने से इनकार किए जाने के बाद सदन युद्ध का मैदान बन गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) पार्षदों ने इसे राष्ट्रीय गीत का अपमान बताते हुए जमकर नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

 

हंगामे को बढ़ता देख और सदन की मर्यादा का हवाला देते हुए सभापति मुन्नालाल यादव ने दोनों महिला पार्षदों को कार्यवाही से बाहर जाने का निर्देश दिया। BJP सदस्यों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षद जानबूझकर राष्ट्रीय प्रतीकों का अनादर कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस पार्षदों का तर्क था कि उन पर अपनी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध जाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

 

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कौन हैं फौजिया शेख?

फौजिया शेख इंदौर नगर निगम के वार्ड नंबर 53 की पार्षद हैं। उनके वार्ड का नाम 'डॉ. मौलाना आजाद नगर' है। फौजिया शेख कांग्रेस पार्टी से जुड़ी हैं। वह स्थानीय मुद्दों और नगर निगम की बैठकों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती रही हैं। वर्तमान में, वह 'वंदे मातरम' गाने से इनकार को लेकर उपजे विवाद के चलते सुर्खियों में हैं। अब इस मुद्दे पर देश की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेता अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

क्यों नहीं गाया 'वंदे मातरम'

विवाद के बाद पार्षद फौजिया शेख ने अपने स्टैंड को साफ किया। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है और कोई भी उन्हें इसे गाने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। वहीं रुबीना खान का कहना था कि वह राष्ट्रगान 'जन गण मन' का पूरा सम्मान करती हैं और उसे गाती भी हैं लेकिन 'वंदे मातरम' उनकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत है। उनका तर्क है कि 'वंदे मातरम' का अर्थ वंदना या पूजा से जुड़ा है और इस्लाम में इबादत या पूजा केवल अल्लाह की की जाती है।

 

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पार्षद फौजिया शेख ने BJP पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि यह पूरा विवाद जानबूझकर खड़ा किया गया है। उन्होंने कहा कि वह सदन में जनता से जुड़े गंभीर मुद्दे, जैसे दूषित पेयजल की आपूर्ति पर चर्चा करने के लिए खड़ी हुई थीं  लेकिन BJP पार्षदों ने बुनियादी समस्याओं पर जवाब देने के बजाय वंदे मातरम का मुद्दा उठाकर असली बहस से ध्यान भटका दिया। फौजिया के अनुसार, राष्ट्रीय गीत के प्रति उनके मन में सम्मान है लेकिन इसे राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना गलत है।

कांग्रेस ने झाड़ा पल्ला

इस घटना ने अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पार्षदों के इस रवैये को बेहद 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है। वहीं, BJP नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती देते हुए कहा कि अगर पार्टी वास्तव में राष्ट्रगीत का सम्मान करती है, तो उसे अपने इन पार्षदों के खिलाफ तुरंत निष्कासन की कार्रवाई करनी चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मामले से दूरी बना ली है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने साफ किया कि यह उन पार्षदों की व्यक्तिगत राय हो सकती है, पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है।