उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर का विरोध बढ़ने लगा है। हाथरस, आगरा, कानपुर, फतेहपुर और वाराणसी में लोगों ने प्रदर्शन किया। कई जगह लोगों ने स्मार्ट मीटरों को उखाड़कर सड़क और बिजली विभाग के दफ्तरों के आगे फेंक दिया। जनता की शिकायत है कि स्मार्ट मीटर की वजह से अधिक बिल आ रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था अधिक पारदर्शी है।
फिरोजाबाद के टूंडला में 30 से अधिक महिलाओं ने मोहम्मदाबाद बिजली फीडर के आगे प्रदर्शन किया। अपने-अपने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़कर महिलाएं यहां पहुंची थीं। आगरा जिले के अकोला गंव के बाद छलेसर गांव में भी ग्रामीणों का गुस्सा फूटा। यहां भी महिलाओं ने स्मार्ट मीटर उखाड़ फेंके और उनकी जगह पुराने मीटर की मांग की।
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हाथरस जिले के गिजरौली क्षेत्र में भी लोगों ने स्मार्ट मीटर उखाड़कर अपने गुस्से का इजहार किया। बड़ी संख्या में लोगों ने बिजली घर का घेराव किया और खूब नारेबाजी की। दरअसल, स्मार्ट मीटर पर बैलेंस जैसे ही माइनस होता है, वैसे ही बिजली कट जाती है। भीषण गर्मी में होने वाली कटौती ने लोगों का पारा और बढ़ा दिया।
हालांकि 24 अप्रैल को यूपी सरकार ने जनता को थोड़ी राहत दी। इसके तहत 1 किलोवाट के बिजली कनेक्शन वाले उपभोक्ता का अगर बैलेंस माइनस में जाएगा तो उसका कनेक्शन 30 दिनों तक नहीं काटा जाएगा। वहीं 2 किलोवाट वाले उपभोक्ताओं का बैलेंस अगर 200 रुपये तक माइनस हुआ तो बिजली आपूर्ति चलती रहेगी।
मुरादाबाद और वाराणसी में आम आदमी पार्टी ने स्मार्ट मीटर के खिलाफ प्रदर्शन किया। फतेहपुर जिले में ग्रामीणों ने रसूलपुर सानी विद्युत उपकेंद्र का घेराव किया। स्मार्ट मीटर हाथ में लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने खूब हंगामा किया। मथुरा और जालौन में भी प्रदर्शन की खबर है। इस बीच यूपी में स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के अलावा समाजवादी पार्टी ने भी यूपी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
यूपीपीसीएल क्या दावा कर रहा?
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड का दावा है, 'स्मार्ट प्री-पेड मीटर से बिजली से जुड़ी सेवाएं पारदर्शी, आसान और भरोसेमंद होंगी। लोग ऑनलाइन या नजदीकी केंद्र के माध्यम से अपना रिचार्ज कर सकते हैं।'
- यूपीपीसीएल का दावा- स्मार्ट मीटर से ये फायदे
- बिना मीटर रीडर के पारदर्शी और सटीक बिलिंग
- UPPCL Smart App से रोजाना खपत और बैलेंस पर पूरा नियंत्रण
- पोस्टपेड से प्री-पेड में बदलाव के बाद 30 दिन का ग्रेस पीरियड
- ·बैलेंस समाप्त होने पर भी तुरंत बिजली नहीं कटेगी, इमरजेंसी क्रेडिट की सुविधा
उपलब्ध। - शाम 6:00 से सुबह 8:00 बजे और रविवार/सार्वजनिक अवकाश में बिजली नहीं कटेगी।
लोगों के सामने समस्या क्या है?
सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोगों को अभी एप और रिचार्ज के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। कई इलाकों में केंद्र काफी दूर हैं। वहां जाने पर कर्मचारियों का व्यवहार बेहद खराब और अपमानजनक होता है। एक ही काम की खातिर कई बार दौड़ना पड़ता है। बड़ी संख्या ऐसे लोगों भी है, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं हैं। अगर स्मार्टफोन है भी तो महीने का पहले 350 रुपये का इंटरनेट रिचार्ज करवाए और इसके बाद बिजली का रिजार्च करे।
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ग्रामीण इलाके में एक बड़ी आबादी ऐसे लोगों की है, जो यह खर्च वहन करने में सक्षम नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट स्पीड भी पड़ी समस्या है। सिग्नल न होने के कारण फोन पर बात तक सही से नहीं हो पाती है। इस स्थिति में ऑनलाइन रिचार्ज करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
अगर मीटर स्मार्ट तो एप पर ये जानकारी क्यों नहीं?
- यूपीपीसीएल का दावा है कि बिजली खपत की रियल टाइम ट्रैकिंग की जा सकती है। मगर यह दावा सच नहीं है। एप पर रियल टाइम ट्रैकिंग नहीं है। कई बार 24 घंटे बाद खपत का डेटा दिखता है।
- स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसमें यह नहीं दिखता है कि 24 घंटे में विभाग ने कुल कितने घंटे बिजली आपूर्ति की। अगर यह दिखे तो लोगों को पता चले कि असल में विभाग बिजली कितनी दे रहा है।
- आपके इलाके में बिजली कब से कब आएगी। इसका रोस्टर भी एप पर नहीं होता है। अगर उपभोक्ता पहले भुगतान करता है तो उसे यह जानने का हक है कि उसके इलाके में बिजली आने और जाने का समय क्या है?
