दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी लेकर आई है। इस पॉलिसी का हाइलाइट यह है कि 2028 से दिल्ली में पेट्रोल से चलने वाली बाइक का रजिस्ट्रेशन ही नहीं होगा। इसका मतलब साफ है कि अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो आप पेट्रोल वाली बाइक नहीं खरीद पाएंगे। दिल्ली सरकार ने इसकी जगह पर बैटरी से चलने वाली स्कूटी, बाइक या अन्य दोपहिया वाहनों को प्रोत्साहन देने का एलान किया है। इसके लिए टैक्स में छूट दी जाएगी, स्क्रैपिंग पर इंसेंटिव मिलेगा और इलेक्ट्रिक बाइक खरीदने वालों को भी इंसेंटिव दिया जाएगा। इस नीति से यह स्पष्ट है कि सरकार पेट्रोल वाली बाइक की जगह आप इलेक्ट्रिक बाइक का इस्तेमाल करें।

 

हर साल दिल्ली में सर्दी के समय प्रदूषण काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इसी के चलते कई तरह के प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। इनमें कमर्शियल गाड़ियों और पुरानी गाडियों की एंट्री रोक दी जाती है, फैक्ट्रियों का कामकाज बंद किया जाता है और कंस्ट्रक्शन से जुड़े काम भी रोकने पड़ते हैं। ऐसे में सवाल उठते हैं कि आखिर बाइक से इतनी क्या समस्या है और सबसे ज्यादा जोर इसी पर क्यों दिया जा रहा है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं...

दिल्ली में गाड़ियों की भरमार

दिल्ली में साल 2025-26 तक गाड़ियों की कुल संख्या 87.61 लाख तक पहुंच गई थी। राज्य के इकनॉमिक सर्वे के मुताबिक, 2024-25 में गाड़ियों की संख्या की तुलना में 7.93 प्रतिशत का इजाफा हुआ। दिल्ली में मार्च 2026 तक एक हजार लोगों पर गाड़ियों की संख्या 522 थी। मार्च 2026 तक दिल्ली में कुल 66.20 लाख गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन खत्म भी कर दिया गया था। इनमें 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियां और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियां शामिल थीं।

 

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दिल्ली में 19 मार्च 2026 तक दोपहिया वाहनों की संख्या 59.27 लाख थी जो कुल गाड़ियों की संख्या का 67.65 प्रतिशत है। द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टिट्यूट (TERI) के असोसिएट डायरेक्टर शरीफ कमर ने हाल ही में PTI से बातचीत में कहा था, 'दिल्ली सोर्स अपॉइंटमेंट स्टडी बताती है कि सर्दी के समय दिल्ली के वायु प्रदूषण में सिर्फ ट्रांसपोर्ट सेक्टर की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत यानी लगभग एक चौथाई की होती है। दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में 80 प्रतिशत हिस्सा दो-पहिया वाहनों का ही है। ऐसे में अगर धीरे-धीरे दोपहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदला जाए तो ट्रांसपोर्ट सेक्टर से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकता है।'

 

हालांकि, शरीफ कमर का यह भी कहना है कि सिर्फ इसी से दिल्ली में होने वाला प्रदूषण कम नहीं हो सकता क्योंकि उस स्थिति में भी दूसरे राज्यों जैसे कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पेट्रोल बाइक दिल्ली में आती रहेंगी। इसके बारे में उनका सुझाव है कि ऐसी ही नीति  दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में भी अपनाई जानी चाहिए।

दोपहिया पर ही निशाना क्यों?

पहले से ही दिल्ली में दोपहिया वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा है। अभी भी इसमें तेजी से इजाफा हो रहा है। इस साल के शुरुआती पांच महीनों में ही कुल 2.36 लाख दोपहिया वाहन दिल्ली में रजिस्टर हुए जिसमें से 2.15 लाख पेट्रोल से चलने वाले थे यानी लगभग 91.2 प्रतिशत। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की संख्या 20,239 थी जो कि सिर्फ 8.6 प्रतिशत है।

 

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अब सरकार इसी को बढ़ाना चाहती है। वजह है कि दिल्ली में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण में बड़ी हिस्सेदारी इन्हीं पेट्रोल वाली मोटरसाइकिलों की है। उस पर भी होता यह है कि ज्यादातर बाइक का पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट एक्सपायर्ड होता है और बहुत ज्यादा प्रदूषण फैलाते हुए भी वे सड़क पर चलती रहती हैं। पिछले साल सर्दियों में यानी नवंबर 2025 तक सिर्फ PUC के चक्कर में लगभग 1.05 लाख चालान काटे गए थे। इसमें से 78 प्रतिशत तो सिर्फ दोपहिया वाहनों के थे। यह दिखाता है कि दोपहिया वाहन प्रदूषण का कितना बड़ा कारण हैं।

 

हालांकि, पेट्रोल बाइक की जगह पर इलेक्ट्रिक बाइक्स को यूं लागू कर पाना भी आसान काम नहीं है। वजह है कि अभी चार्जिंग स्टेशनों की कमी है जबकि पेट्रोल पंप भारी संख्या में उपलब्ध हैं। चार्जिंग में समय ज्यादा लगता है जबकि पेट्रोल भरवाने में दो मिनट लगते हैं। इसके अलावा, अगर अच्छी रफ्तार और अच्छे एवरेज वाली बाइक देखी जाएं तो उनकी संख्या पेट्रोल में तो अच्छी-खासी है लेकिन इलेक्ट्रिक में इनकी संख्या सीमित है। ऐसे में सरकारी प्रयासों के साथ-साथ बाइक निर्माता कंपनियों को भी इसमें जोर लगाना होगा।