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पेट्रोल वाली बाइक पर बैन, EV पर सब्सिडी, दिल्ली की नई पॉलिसी में क्या है?

आने वाले समय में ऐसा हो सकता है कि दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियां ही चलती दिखाई दें। दिल्ली सरकार ने अपनी नई EV पॉलिसी में इसी दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

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दिल्ली सरकार लाई नई EV पॉलिसी, Photo Credit: ChatGPT

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कई दिनों से चर्चा चल रही थी देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल से चलने वाली बाइक को भविष्य में बंद किया जा सकता है। अब दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए अपनी जो EV पॉलिसी जारी की है, उसमें भी इसका जिक्र है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि 2030 तक दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन फीस और रोड टैक्स को फ्री रखेगी। इन सब कवायदों का मकसद है कि दिल्ली में गाड़ियों के चलते होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके। 1 जुलाई 2026 से लागू हो रही यह नीति मार्च 2030 तक लागू रहेगी और इसके तहत 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश भी किया जाएगा।

 

इस नीति ने सबसे बड़ा झटका उन लोगों को दिया है जो पेट्रोल से चलने वाली बाइक के शौकीन हैं। दिल्ली सरकार ने इस नीति में साफ कर दिया है कि 2028 से ऐसे दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा जो पेट्रोल से चलेंगे। यानी अगर आपको बाइक लेनी है तो फिर आपको इलेक्ट्रिक बाइक ही लेनी होगी या फिर आपको किसी दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

 

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नई EV पॉलिसी में खास क्या है?

दिल्ली में अभी भी इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने पर रोड टैक्स या रजिस्ट्रेशन फीस नहीं देनी पड़ती। अब दिल्ली सरकार ने इसे 2030 तक जारी रखने का फैसला लिया है। साथ ही, यह भी कहा है कि 30 लाख रुपये तक की कीमत वाली गाड़ियों के लिए यह नीति जारी रहेगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया है कि दिल्ली सरकार के निवेश, टैक्स में छूट और EV के लिए मूलभूत चीजों को बनाने जैसे तमाम कामों को मिलाकर अगले 4 साल में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 

 

दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड आगे आने वाले समय में पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाएगा। इसके अलावा, बैटरी बदलने की जगहें भी तेजी से बढ़ाई जाएंगी। दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन होगा। इसका मतलब है कि अब सीएनजी, पेट्रोल या डीजल से चलने वाले तीन पहिया वाहन दिल्ली में रजिस्टर ही नहीं किए जाएंगे। सरकार ने यह भी कहा है कि जो फायदे इलेक्ट्रिक गाड़ियों को दिए जा रहे हैं वे हाइब्रिड गाड़ियों के लिए नहीं दिए जाएंगे।

 

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अप्रैल 2028 से पेट्रोल वाली बाइक का रजिस्टेशन नहीं होगा और सिर्फ ई-बाइक्स का ही रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। साथ ही, यह भी कहा गया है कि 2030 तक 30 प्रतिशत स्कूल बसों को इलेक्ट्रिक करना अनिवार्य होगा। 1 जनवरी 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक मिनी ट्रक का ही रजिस्ट्रेशन होगा यानी डीजल-पेट्रोल से चलने वाले छोटे ट्रक का भी रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।

किसे मिलेगा इंसेंटिव?

सरकार ने EV को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव योजना शुरू करने का भी फैसला किया है। इलेक्ट्रिक टू व्हीलर खरीदने वालों को पहले साल 30 हजार रुपये, दूसरे साल 20 हजार रुपये और तीसरे साल 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसी तरह इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों पर पहले साल 50 हजार, दूसरे साल 40 हजार और तीसरे साल 30 हजार रुपये इंसेंटिव के तौर पर दिए जाएंगे।

 

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गाड़ियों की स्रैपिंग कराने वालों को भी इंसेंटिव दिया जाएगा। BS-IV या उससे पुरानी गाड़ियों की स्क्रैपिंग करवाकर EV खरीदने वाले लोगों को 1 लाख रुपये (4 पहिया की स्क्रैपिंग के लिए) का इंसेंटिव दिया जाएगा। वहीं, दो पहिया के लिए 10 हजार, तीन पहिया के लिए 25 हजार और कमर्शियल ट्रक की स्क्रैपिंग कराने पर 50 हजार का इंसेंटिव दिया जाएगा।

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