दिल्ली में जहां बारिश के बाद लोगों को वायु प्रदूषण से कुछ राहत मिली है तो वहीं अब यहां पानी की सप्लाई बाधित होने की सूचना है। इसकी वजह यह बताई जा रही कि दिल्ली के कई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बंद चल रहे हैं। दूसरी तरफ हरियाणा की मूनक नहर में मरम्मत कार्य के चलते दिल्ली को कम पानी मिल रहा है। दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक वजीराबाद स्थित सबसे बड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लान भी पूरी तरह से बंद हो गया है। इसका असर कई इलाकों की पानी सप्लाई पर पड़ा है।

 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी की शुरुआत तक यह संकट बना रह सकता है। दिल्ली के 9 मुख्य वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में से सिर्फ तीन ही अपनी पूरी क्षमता से चल रहे हैं। इन प्लांट्स को उत्तर प्रदेश की ऊपरी गंगा नहर से पानी मिल रहा है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी, पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में पानी की सप्लाई रुक गई है। दिल्ली सरकार ऊपरी गंगा नहर से पानी की सप्लाई बढ़ाने पर भी विचार कर रही है।

 

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दिल्ली को कहां से मिलता है पानी?

  • 40.8 प्रतिशत: यमुना और उससे जुड़ी नहरों से 
  • 26.5 फीसद: गंगा नदी से
  • 23.1 प्रतिशत: भाखड़ा जलाशय से 

मूनक नहर से भी काम आ रहा पानी

दूसरी तरफ हरियाणा में मूनक नहर पर मरम्मत का काम चल रहा है। इस कारण हैदरपुर, द्वारका, बावाना और नांगलोई के चार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स बंद हो चुके हैं। 19 जनवरी को हरियाणा के सिंचाई विभाग ने नहर बंद करने की सूचना दी थी। यह नहर दिल्ली को रोजाना करीब 10 करोड़ गैलन पानी की सप्लाई करती है। मगर मरम्मत कार्य के चलते अब आधा ही पानी आ रहा है। माना जा रहा है कि मूनक नहर की मरम्मत का काम 4 फरवरी तक पूरा होगा। 

इन इलाकों में पानी सप्लाई बाधित

एनडीएमसी ने गुरुवार को बताया कि आरके पुरम, मोती बाग, सरोजिनी नगर, शिवाजी स्टेडियम, पंचकुइयां रोड और चाणक्यपुरी जैसे इलाकों में पानी सप्लाई बाधित रहेगी। ग्रेटर कैलाश में लोगों को लो प्रेशर का सामना करना पड़ा। पश्चिमी दिल्ली का पूरा इलाका भी प्रभावित है।

 

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यमुना में बढ़ी अमोनिया की मात्रा

यमुना नदी में अमोनिया की मात्रा खतरनाक स्तर पहुंच गई। इसके बाद दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को बंद करना पड़ा। दिल्ली सरकार ने हरियाणा को पत्र लिखा है। इसमें हथिनीकुंड बैराज से अधिक पानी छोड़ने की अपील की, ताकि यमुना में अमोनिया की मात्रा को काम किया जा सके। सर्दी के मौसम में हर साल यमुना नदी में अमोनिया की मात्रा बढ़ जाती है। मौजूद ट्रीटमेंट प्लांट के पास 1 पीपीएम तक अमोनिया को साफ करने की क्षमता है। मगर अभी यमुना में अमोनिया का स्तर 3 पीपीएम से अधिक हो गया है।