मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर के दान कोष में अनियमितता की खबर सामने आई है। यह मंदिर, आगर मालवा इलाके में स्थित है। जिला प्रशासन ने धांधली की जांच के लिए एक 3 सदस्यीय समिति का गठन किया है।
मंदिर में दान की संपत्ति, पैसे और जेवर को गिनने का काम गैर सरकारी समिति के पास था। जबकि यह काम, सरकार की ओर से नियुक्त कंपनी को करना चाहिए था। जिला प्रशासन ने समिति को एक सप्ताह का समय दिया है।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर के 3,264 करोड़ के चंदे की रकम कहां खर्च हुई? ट्रस्ट ने दिया पूरा हिसाब
क्या आरोप लगे हैं?
गैर सरकारी समिति के अलावा, मंदिर में सोने और चांदी के गहने, कैश और सामान गिनने का काम, उसेक बैंक खाते औऱ वित्तीय लेनदेन कोई अलग समिति कर रही थी। आगर के जिला पंचायत अधिकारी बीएस सोलंकी, जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और मुख्य नगरपालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल जांच करेंगे।
किस आधार पर की जाएगी जांच?
मंदिर परिसर में कसी गैर सरकारी और गैर रजिस्टर्ड समिति दान या चढ़ावा जुटाने के लिए कैसे किसी समानांतर व्यवस्था की ओर से नियुक्त की जा सकती है। एक सवाल यह भी कहा गया है कि संबंधित रसीद, पुस्तिकाओं, बैंक खातों और दूसरे चढ़ावा को कैसे सत्यापित किया जाता था।
प्रशासन ने इस सवाल का भी जवाब मांगा है, जिसमें किसी शासकीय अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन या दूसरे संबंधित लोगों और उनकी जिम्मेदारियों की जांच की जाएगी। एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट भी देनी होगी।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर केस: गोपाल राव अयोध्या ये बाहर, SIT को ऑडिट में मिलीं गंभीर खामियां
क्यों खास है यह मंदिर?
यह मंदिर पौराणिक महत्व का है। राहु और केतु की महादशा से पीड़ित लोग इस मंदिर में दर्शन करने जाते हैं। यह मंदिर तांत्रिक साधनाओं के लिए भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है।


