2026 की शुरुआत हुए अब लगभग एक महीना होने वाला है। नए साल की शुरुआत में लोग अक्सर अपनी बुरी आदतें छोड़ने और नई आदतें अपनाने का संकल्प लेते हैं। लेकिन 2026 में एक रोचक बदलाव देखने को मिला है।अब लोग अपने नए साल के टारगेट तय करने के लिए चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स का सहारा ले रहे हैं। इतना ही नहीं, आजकल लोग अपने जीवन से जुड़े निजी फैसले भी एआई की मदद से लेने लगे हैं। सितंबर 2025 में चैटजीपीटी कंपनी ने यह खुलासा किया था कि लोग व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए एआई चैटबॉट्स का उपयोग तेजी से करने लगे हैं।

 

डिजिटल युग में आज दुनिया के लगभग हर कोने में लोगों के पास स्मार्टफोन मौजूद है। इसके जरिए रोजमर्रा के सवालों के जवाब और जरूरी जानकारी हासिल करना अब बेहद आसान हो गया है। आज किसी भी विषय पर एआई के माध्यम से जानकारी खोजी जा सकती है, जिससे लोगों का जीवन पहले से अधिक सरल हो गया है। हालांकि, अब एक नई प्रवृत्ति सामने आ रही है, जहां लोग अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय भी एआई टूल्स जैसे चैटजीपीटी से पूछकर लेने लगे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या एआई का इतना अधिक उपयोग सही है? खबरगांव इसी के बारे में इस लेख में चर्चा करेगा।


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एआई के फायदे

एआई की मदद से किसी भी कठिन और जटिल विषय को सरल भाषा में समझा जा सकता है। किताबों में लिखी गई कठिन जानकारी को एआई आसान शब्दों में प्रस्तुत कर देता है, जिससे विषय को समझना आसान हो जाता है। हालांकि, एआई से मिली जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए और तथ्यों को क्रॉस-चेक जरूर करना चाहिए।

 

एआई के जरिए लोगों को अपने व्यवसाय को बढ़ाने के नए-नए आइडिया भी मिलते हैं। 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सभी व्यवसायों के लिए अपने मॉडल में एआई और मशीन लर्निंग को अपनाना जरूरी हो गया है। जो कंपनियां ऐसा नहीं करतीं, वे पीछे रह सकती हैं। एआई के उपयोग से कंपनियां अपने आंतरिक कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित कर सकती हैं, जिससे विकास की गति तेज होती है।

 

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इसके अलावा, एआई के माध्यम से कोई भी व्यक्ति बिना झिझक तकनीकी विषयों से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकता है। कई बार लोगों को किसी विषय की बुनियादी जानकारी भी नहीं होती और शर्म या संकोच के कारण वे दूसरों से सवाल नहीं पूछ पाते। ऐसे में एआई एक सुरक्षित विकल्प बनकर सामने आता है, जहां बिना किसी झिझक के सवाल पूछे जा सकते हैं।

एआई के नुकसान

एआई के जरिए हम बहुत कुछ सीख, समझ और जान सकते हैं, लेकिन पूरी तरह एआई पर निर्भर हो जाना सही नहीं है। कई बार एआई द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह सही या प्रमाणिक हो, इसकी कोई गारंटी नहीं होती, भले ही उपयोगकर्ता बार-बार एआई से सवाल पूछे और पिछली बातचीत के आधार पर जवाब देने का अनुरोध करे, फिर भी यह संभव है कि चैटबॉट ऐसे जवाब दे दे जिनका पहले साझा की गई जानकारी से कोई संबंध न हो।

 

अगर कोई व्यक्ति हर निर्णय के लिए एआई की सलाह लेने लगे, तो उसकी खुद की सोचने और समझने की क्षमता कमजोर हो सकती है। इससे व्यक्ति धीरे-धीरे पूरी तरह एआई टूल्स पर निर्भर हो जाता है। ऐसे में जहां एआई का विकास होता है, वहीं व्यक्ति के मस्तिष्क का विकास रुक सकता है। यानी एआई के अत्यधिक उपयोग से व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

कैसे करें सही प्रयोग?

एआई की मदद से हम अपने टारगेट तक पहुंचने की राह को बेहतर बना सकते हैं। इसे एक ‘थिंक टैंक’ या सहयोगी के रूप में देखना चाहिए। एआई केवल कामों की सूची बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यह भी बता सकता है कि किसी टारगेट को हासिल करने में कौन-कौन सी बाधाएं आ सकती हैं और उनसे निपटने के लिए कैसी रणनीति अपनाई जाए।

 

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि एआई एक मशीन है। वह हमारी भावनाओं और मानसिक स्थिति को पूरी तरह नहीं समझ सकता। इसलिए एआई द्वारा दिए गए सुझावों को अपनी वास्तविक जीवन-स्थिति, परिस्थितियों और इच्छाओं के आधार पर परखना जरूरी है। अंत में, एआई आपकी योजना बनाने, प्रगति पर नजर रखने और विकल्प सुझाने में मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा इंसान को खुद ही लेना चाहिए।