आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल आज एजुकेशन से कृषि तक हर एक क्षेत्र में हो रहा है। एक्सपर्ट्स AI को भविष्य की तकनीक बता रहे हैं और कृषि क्षेत्र में भी इसके इस्तेमाल की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। इसी कड़ी में पंजाब के रूपनगर जिले में स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) रोपड़ में 'स्मार्ट एग्री समिट 2026' आयोजित की जा रही है। 25 मार्च को होने वाली इस समिट का फोकस एग्रीकल्चर सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर रहेगा। इस कार्यक्रम में पंजाब के कृषि और किसान कल्याण मंत्री सरदार गुरमीत सिंह खुदियान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
यह कार्यक्रम annam ai की ओर से आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम बुधवार 25 मार्च 2026 को सुबह 11 बजे होगा। जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम IIT रोपड़ के सीनेट हॉल में होगी। इस समिट का थीम 'ग्रीन रिवोल्यूशन से ग्रीन इंटेलिजेंस तक- भविष्य के लिए AI फार्मिंग'रखा गया है।
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क्या है annam ai?
किसानों की परेशानियों को हल करने के लिए IITरोपड़ ने ANNAM.AI सेंटर विकसित किया है। यह IIT Ropar में स्थापित एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है, जिसका उद्देश्य कृषि को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्मार्ट और टिकाऊ बनाना है। यह प्लेटफॉर्म AI, डेटा एनालिटिक्स और सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके किसानों को फसल, मौसम, मिट्टी और सिंचाई से जुड़ी सटीक और रियल-टाइम जानकारी देता है। इस जानकारी से किसान बेहतर फैसले ले सकते हैं। ANNAM.AI का लक्ष्य पारंपरिक खेती को डेटा आधारित खेती में बदलने का है, जिससे प्रोडक्शन को बढ़ाया जा सके और लागत कम करके किसानों की इनकम को बढ़ाया जा सके। इसके भविष्य में कृषि और ज्यादा टिकाऊ हो पाएगी।
क्या काम करता है?
- खेती में आने वाली परेशानियों का AI आधारित हल
- स्मार्ट वेदर स्टेशन और डेटा सिस्टम
- फसल निगरानी व रोग पहचान (AI/ड्रोन)
- स्मार्ट सिंचाई प्रबंधन
- डिजिटल ट्विन और डेटा मॉडलिंग
- पशुपालन के लिए AI समाधान
- रिसर्च और एग्री-टेक इनोवेशन
- किसानों को प्रशिक्षण और जागरूकता
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खेती में तकनीक से होगा लाभ
तकनीक के इस्तेमाल से खेती में काफी ज्यादा लाभ हो सकता है और इसे लाभदायक और टिकाऊ बनाया जा सकता है। आज AI, ड्रोन, सेंसर और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से किसान फसल की स्थिति, मौसम और मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे वे सही समय पर बुवाई, सिंचाई और खाद का उपयोग कर पाते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता है और लागत कम होती है।
इसके अलावा, नई तकनीकें फसल रोगों और कीटों की पहचान पहले ही कर लेती हैं, जिससे नुकसान कम होता है। इस तरह तकनीक पारंपरिक खेती को स्मार्ट खेती में बदलकर किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कल IIT रोपड़ में होने वाली 'स्मार्ट एग्री समिट 2026' में इन्हीं विषयों पर चर्चा होगी और भविष्य में AI से एग्रीकल्चर सेक्टर में कैसे लाभ उठाया जा सकता है इस पर विचार किया जाएगा।
