प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी ईरान संकट पर अपना पक्ष रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि अगर युद्ध लंबे समय तक खिंचता है तो स्थितियां गंभीर होंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है देश ऐसे संकटों का सामना कर सके, इसके लिए 11 वर्षों में लगातार निर्णय लिए गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि होर्मुज से जहाजों का आना चुनौतीपूर्ण है। भारत, संवाद कर रहा है। बातचीत के जरिए समाधान की ओर भारत आगे बढ़ रहा है। होर्मुज से गैस, तेल और उर्वरक आता है, इसलिए होर्मुज का बंद होना, हमें भी प्रभावित कर रहा है।
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'दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट'
राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'वेस्ट एशिया में युद्ध शुरू हुए 3 हफ्ते से ज्यादा हो गए हैं। युद्ध की वजह से दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंता की बात है। युद्ध की वजह से हमारे ट्रेड रूट पर असर पड़ा है। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइज़र की रेगुलर सप्लाई पर असर पड़ा है।'
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री:-
खाड़ी के देशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। भारत संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाली चाहता है। तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है तथा इस युद्ध ने विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है।
'भारत के लिए स्थिति चिंताजनक'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे जरूरी सामान की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है।'
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'खाड़ी के देशों के साथ संपर्क में है भारत'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'युद्ध की शुरुआत के बाद से पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर में फोन पर बात की है। हम खाड़ी के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं।'
'शांति बहाली ही हमारा मकसद'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने संघर्ष को कम करने और होर्मुज मार्ग को खोलने के बारे में भी बातचीत की है।'
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'खाड़ी के देशों में फंसे हैं कई हिंदुस्तानी'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'खाड़ी के देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उनका जीवन एवं आजीविका भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता का कारण है। होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के कई जहाज फंसे हुए हैं। उनमें भारतीय चालक दल की संख्या भी बहुत अधिक है तथा यह भी भारत की एक बड़ी चिंता का विषय है। ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति एवं संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए।'