अंतरिक्ष में मंगल ग्रह हो या चंद्रमा, अब अर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की दुनिया वैज्ञानिकों का काम आसान करने वाली है। जिसके लिए वैज्ञानिकों को एक-एक सेकेंड हर गतिविधि पर नजर रखनी होती थी, यह काम, अब वैज्ञानिक AI को सौंपने की योजना बना रहे हैं। रोबोटिक्स की दुनिया में AI क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। रोबोटिक्स एक्सपर्ट और नासा से जुड़ी एक्सपर्ट वंडी वर्मा ने बताया है कि अब रोवर और दूसरे सैटेलाइट उपकरण खुद से फैसला लेने में सक्षम होंगे, जिनके फेल होने का खतरा कम से कम होगा।
मंगल ग्रह पर AI को लेकर अब सफल प्रयोग हो रहे हैं। नासा के पर्सीवरेंस मार्स रोवर इस दिशा का पहला सफल प्रयोग है। ऐसा पहली बार हुआ है कि जब किसी दूसरे ग्रह पर रोवर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सहारे खुद फैसला लिया और ड्राइव पूरी की है। इस पूरे मिशन के पीछे वंडी वर्मा का नाम चर्चा में रहा। वह भारतीय मूल की रोबोटिक्स इंजीनियर है।
यह प्रदर्शन मंगल ग्रह पर स्थित जेजेरो क्रेटर के किनारे पर किया गया था और इसमें विजन-लैंग्वेज मॉडल नामक एक प्रकार की जनरेटिव एआई का उपयोग किया गया था, जिसका उद्देश्य मंगल ग्रह के जमीन का विश्लेषण करना और पर्सीवरेंस के लिए सुरक्षित पड़ावों से होते हुए यात्रा पूरी करने के लिए एक मार्ग निर्धारित करना था।
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AI ने मंगल पर नेविगेशन का कंट्रोल संभाला
रोबोटिक्स एक्सपर्ट ने बताया कि मंगल पर रोवर चलाना अब सिर्फ़ पृथ्वी से भेजे गए आदेशों का खेल नहीं रहेगा। आने वाला वक्त ऐसा है, जहां मशीन खुद देखेगी, खुद समझेगी और खुद फैसला लेगी। मंगल पर एआई-नियोजित पहली ड्राइव के बाद भारतीय मूल की रोबोटिक्स इंजीनियर वंडी वर्मा ने साफ कहा है कि जनरेटिव एआई स्पेस रिसर्च की दिशा और रफ्तार दोनों को बदलने वाला है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जिक्र करते हुए वंडी वर्मा ने बताया कि जनरेटिव एआई ऑफ-प्लैनेट ड्राइविंग के सबसे अहम स्तंभों को मजबूत कर रहा है यानी चट्टानों और सतह की बनावट को देखना और यह समझना है कि रोवर किस जगह पर है।
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क्या है पूरा मामला?
NASA ने पुष्टि की है कि परसेवरेंस मार्स रोवर ने 8 और 10 दिसंबर को मंगल ग्रह पर एआई प्लानिंग के जरिए ड्राइव सफलतापूर्वक पूरी की है। यह किसी अन्य ग्रह पर एआई से संचालित पहली स्वायत्त ड्राइव मानी जा रही है। इस तकनीक में रोवर ने कक्षीय तस्वीरों और नेविगेशन डेटा का विश्लेषण किया, चट्टानों, ढलानों और रेतीले हिस्सों को पहचाना और फिर खुद तय किया कि सुरक्षित रास्ता कौन-सा है। नासा के प्रशासक जेरेड आइज़ैकमान ने कहा, 'यह प्रदर्शन दर्शाता है कि हमारी क्षमताएं कितनी आगे बढ़ चुकी हैं और इससे अन्य ग्रहों की खोज के हमारे दृष्टिकोण का दायरा भी बढ़ता है।'
कौन हैं वंडी वर्मा?
नासा ने बताया है कि वंडी वर्मा ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी में शामिल होने से पहले उस टीम का नेतृत्व किया था। वह प्लेक्सिल प्रोजेक्ट पर लगीं थीं। यह तकनीक, रोबोट और मानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजनाओं के काम आ रही है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक वंडी वर्मा के पिता भारतीय वायु सेना में कार्यरत थे। विमानन और इंजीनियरिंग ब्रैकग्राउंड होने की वजह से उन्होंने यह क्षेत्र चुना है। उन्होंने पहले पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की और बाद में कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय से रोबोटिक्स में मास्टर और पीएचडी पूरी की।
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वंडी वर्मा के पास कौन से प्रोजेक्ट हैं?
वंडी वर्मा फिलहाल कैलिफोर्निया के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में प्रिंसिपल इंजीनियर हैं और मोबिलिटी एंड रोबोटिक्स सेक्शन की डिप्टी मैनेजर के तौर पर काम कर रही हैं। वह Mars 2020 मिशन में रोबोटिक ऑपरेशंस की चीफ इंजीनियर भी हैं। नासा में शामिल होने से पहले, वर्मा ने उस टीम का नेतृत्व किया था जिसने PLEXIL लैंग्वेज पर काम किया था। यही तकनीक रोवर्स और मानव अंतरिक्ष उड़ानों में इस्तेमाल हो रही है।
