अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने गुरुवार सुबह अपना Artemis 2 मिशन लॉन्च कर दिया है। भारतीय समयानुसार सुबह लगभग 4 बजे लॉन्च किए गए इस मिशन में चार अंतरिक्षयात्रियों को भेजा गया है। ये चारों अंतरिक्षयात्री अपने स्पेसक्राफ्ट में रहते हुए ही 10 दिन तक चांद पर जाने के NASA के अगले मिशन के लिए जानकारी जुटाएंगे और फिर धरती पर लौट आएंगे। यह मिशन ऐतिहासिक माना जा रहा है कि क्योंकि लगभग 5 दशक के बाद चांद से जुड़ा ऐसा कोई मिशन भेजा गया है। खबर लिखे जाने तक यह मिशन एकदम सही चल रहा है और यह मिशन अपने तय ऑर्बिट में पहुंच गया है।

 

इस मिशन में भेजे गए अंतरिक्षयात्रियों को Orion स्पेसक्राफ्ट के जरिए भेजा गया है। यह एक तरह का प्रैक्टिस मिशन है जिसके सफल होने के बाद चांद पर उतरने की तैयारी भी की जाएगी। एक तरह से NASA यह टेस्ट कर रहा है कि कैसे अंतरिक्षयात्रियों को आराम से धरती से भेजकर चांद पर उतारा जा सकेगा। NASA की योजना है कि जैसे अभी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक अंतरिक्षयात्रियों को आराम से भेजा या लाया जा सकता है, ठीक वैसे ही चांद तक भी अपनी पहुंच बनाई जा सके।

 

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इस मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है, 'हम स्पेस में, धरती पर और इकॉनमी, मिलिट्री हर जगह जीत रहे हैं और अब सितारों से आगे भी जीत रहे हैं। कोई भी हमारे आसपास नहीं है। अमिरेका सिर्फ कंपीट नहीं करता है, हम डॉमिनेट करते हैं और पूरी दुनिया देख रही है। ईश्वर हमारे अंतरिक्षयात्रियों की रक्षा करे, ईश्वर NASA की रक्षा करे, ईश्वर अब तक के सबसे महान देश यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका की रक्षा करे।'

कौन-कौन शामिल है?

इस मिशन की अगुवाई कमांडर रीड वाइजमैन कर रहे हैं। उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टियाना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसन भी गए हैं। इस तरह एक मिशन में एक महिला और एक गैर-अमेरिकी नागरिक को भी शामिल किया गया है। चांद की ओर बढ़ने से पहले यह स्पेसक्राफ्ट 25 घंटे तक पृथ्वी के चक्कर लगाएगा फिर से चांद की ओर बढ़ाया जाएगा। 

 

इस मिशन को लीड कर रहे 50 साल के रीड वाइजमैन पूर्व नेवी अफसर हैं और वह 2009 से NASA के साथ काम कर रहे हैं। वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर भी 165 दिन रह चुके हैं और और काफी अनुभवी माने जाते हैं। उनके साथ 49 साल के विक्टर ग्लोवर हैं। विक्टर ही Orion स्पेसक्राफ्ट के पायलट हैं। वह भी नेवी में काम कर चुके हैं और अमेरिकी संसद के सलाहकार भी रह चुके हैं।

 

 

 

 

मिशन स्पेशलिस्ट किस्टियाना कोच 47 साल की हैं और वह पहली महिला हैं जिन्हें लुनर मिशन से जोड़ा गया है। वह इंजीनियर हैं और अंटार्कटिका जैसे दुर्गम इलाकों में रिसर्च का काम कर चुकी हैं। चौथे शख्स 50 साल के जेरेमी हैन्सन हैं जो कनाडा की स्पेस एजेंसी के पूर्व पायलट हैं। 

 

मिशन लॉन्च होने के कुछ ही देर बार कमांडर वाइसजमैन ने अपना पहला मैसेज देते हुए कहा, 'द सन इज राइजिंग ऑन इंटेग्रिटी'। क्रिस्टियाना कोच ने मिशन कंट्रोल को बताया, 'टॉयलेट अपने आप बंद हो जा रहा है और गड़बड़ी दिखाने वाली एक लाइट ब्लिंक हो रही है।' उनकी इस शिकायत पर सलाह दी गई कि फिलहाल के लिए बैग एंड फनल सिस्टम का इस्तेमाल करें। 

 

 

क्या है NASA का प्लान?

 

दरअसल, आगे आने वाले सालों में NASA एक बार फिर से चांद पर अपने अंतरिक्षयात्रियों को उतारना चाहता है। उसी की दिशा में यह पहला कदम है। 10 दिन के इस मिशन में यह देखा जा रहा है कि ऐसे एयरक्राफ्ट में अंतरिक्षयात्रियों को भेजना कितना सुरक्षित है। इसीलिए इस एयरक्राफ्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह अंतरिक्षयात्रियों को लेकर तो जाए ही, उन्हें वापस भी लेकर आ सके।

 

Orion एयरक्राफ्ट ने लॉन्च के बाद स्पेस में पहुंचते ही अपने सोलर विंग्स को खोल लिया है और अब यह सौर ऊर्जा ले सकेगा। वहीं, मिशन में शामिल चारों अंतरिक्षयात्रियों ने अपने स्पेसक्राफ्ट को स्टार्ट कर लिया है और उनका काम शुरू हो गया है क्योंकि अब उन्हें ही पूरा कंट्रोल संभालना होगा। 

 

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इस मिशन के बारे में ANSA की ओर से बताया गया है, 'यह एक टेस्ट फ्लाइट है। अगले 10 दिन तक ये चारों अंतरिक्षयात्री Orion स्पेसक्राफ्ट को अलग-अलग रफ्तार पर चेक करेंगे ताकि उनके बाद जाने वाले अंतरिक्षयात्री चांद तक पूरे आत्मविश्वास तक जा सकेंगे। हमारा यह मिशन काफी लंबा है और हम जितना काम कर चुके हैं, आगे उससे भी बड़ा काम बाकी है।'

 

लॉन्च के 49 मिनट के बाद SLS रॉकेट के अपर स्टेज को फायर करके इससे पृथ्वी के बाहर के ऑर्बिट में स्थापित किया गया है। अब दूसरे स्टेज में जब फायर किया जाएगा तो यह स्पेसक्राफ्ट 46 हजार मील दूर वाले ऑर्बिट में स्थापित हो जाएगा। सब कुछ ठीक रहने पर यह काम अगले दिन किया जाएगा। तब यह स्पेसक्राफ्ट खुद ही चलेगा। 

 

इसके कुछ घंटों बाद स्पेसक्राफ्ट के बाहर चार सैटलाइट की रिंग बना दी जाएगी। स्पेसक्राफ्ट से सुरक्षित दूरी पर तैनात किए जाने वाले ये सैटलाइट ही कई खोज और परीक्षण करने वाले हैं। इनमें अर्जेंटीना, जर्मनी, कोरिया और सऊदी अरब के एक-एक सैटलाइट शामिल हैं। अगर सबकुछ ठीक रहता है तो 6 अप्रैल को ये अंतरिक्षयात्री चांद की तस्वीरें खीचेंगे और उन्हें दुनिया को दिखाया जाएगा।