इंटरनेट और टेक्नॉलजी में लोग अपने घरों में CCTV कैमरे खूब लगवाते हैं। अब ज्यादातर कैमरे इंटरनेट से जुड़े होते हैं जिसके चलते आप दूर से ही अपने मोबाइल पर भी देख सकते हैं कि कैमरे क्या देख रहे हैं। अगर आपने भी ऐसे कैमरे लगवाए हैं तो यह खबर आपके भी काम की है। हुआ कुछ यूं है कि सुरक्षा कारणों से भारत सरकार कुछ कंपनियों के CCTV कैमरों पर बैन लगाने की तैयारी में है। जिन पर बैन लग सकता है उसमें TP-Link और Hikvision जैसी कंपनियों के नाम भी शामिल हैं। फिलहाल, किसी खास कंपनी को लेकर ऐसा कोई आदेश नहीं जारी किया गया है।
आशंका है कि चीन की कई कंपनियों के जरिए जासूसी भी की जा सकती है। ऐसे में 1 अप्रैल से इंटरनेट से कनेक्टेड रहने वाले सीसीटीवी कैमरों की बिक्री पर रोक लगाए जाने की तैयारी है। जिन कंपनियों पर यह बैन लग सकता है कि उनमें चीनी मूल कि TP-Link, दाहुआ और Hikvision के नाम शामिल हैं। इसकी वजह यह है कि भारत में अब स्टैंडर्डाइजेशन टेस्टिंग एंड क्वालिटी सर्टिफिकेशन (STQC) लागू हो रहा है जिसके तहत भारत में कोई भी CCTV कैमरा बेचने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। ये नियम सभी CCTV कैमरा कंपनियों और वीडियो सर्विलांस कंपनियों पर लागू होंगे।
कैमरों से खतरा क्या है?
हाल ही में जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामेनेई को मारा गया तब खबरें आई थीं कि इजरायल के पास ईरान में लगे कैमरों के ऐक्सेस थे। यही बात CCTV कैमरों को लेकर संदेह पैदा करती है। दूसरे देश की कंपनियों के चिपसेट के साथ यही खतरा है कि उनकी फुटेज का गलत इस्तेमाल हो सकता है। आशंका है कि चीनी कंपनियों के चिपसेट के जरिए CCTV फुटेज का गलत इस्तेमाल हो सकता है और इसके जरिए जासूसी तक की जा सकती है।
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सस्ते होने के चलते भारत के आम लोग ज्यादा चाइनीज ब्रांड के कैमरे लगवाते हैं। इंटरनेट से जुड़े ऐसे कैमरों का डेटा कंपनी के क्लाउड पर स्टोर होता है। कई विदेशी कंपनियों के सर्वर भारत के बाहर हैं ऐसे में वीडियो फुटेज का गलत इस्तेमाल कोई बड़ी बात नहीं होगी। Hikvision को लेकर तो अमेरिका और कई अन्य देशों में सवाल भी खड़े हो चुके हैं।
क्या है मामला?
इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार चाहती है कि ऐसे सीसीटीवी कैमरों का दुरुपयोग न किया जा सके। इसी के चलते सुरक्षा के मानक तय किए जा रहे हैं और सख्ती लागू की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब ऐसे कैमरों को सर्टिफिकेट ही नहीं दिया जा रहा जिनमें चीन के चिपसेट का इस्तेमाल हो रहा है। अब जिसे सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा उसके कैमरे भारत में बेचे ही नहीं जा सकते हैं।
इसका नतीजा यह होगा कि भारत में धड़ल्ले से बिक रहे चाइनीज CCTV कैमरे बैन हो जाएंगे। मौजूदा वक्त में भारत में लगभग एक तिहाई सीसीटीवी चाइनीज ही हैं। इसका एक और फायदा यह होगा कि भारतीय कंपनियों की बिक्री बढ़ जाएगी। भारतीय कंपनियों में मुख्य रूप से Qubo, Prama, Matrix और CP Plus आदि हैं। बीते कुछ समय में इन कंपनियों ने चाइनीज चिपसेट की बजाय ताइवानी चिपसेट का इस्तेमाल कर दिया है और चीन पर निर्भरता खत्म कर दी है।
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CCTV कैमरे लगवाएं तो कैसे सुरक्षित रहें?
पहली बात तो आपको नियमों की जानकारी होनी चाहिए। अगर नियम नहीं पता हैं तो पहले उन ब्रांड को ही चुनें जो भारत सरकार के मानकों पर खरे उतरते हों। सस्ते के चक्कर में ऐसे ब्रांड ना चुनें जो आपकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर सकें या फिर आपका डेटा ही बेच दें। एक और चीज है कि सस्ते ब्रांड आमतौर पर चाइनीज प्रोडक्ट खरीदते हैं और उन्हें अपने नाम से बेचते हैं। इनसे भी आपको खतरा हो सकता है।
अगर आपको सुरक्षित रहना है तो क्लाउड पर स्टोर हो रहे डेटा बैकअप को बंद करें। कैमरे लगवाने के बाद उनका डिफॉल्ट पासवर्ड बदल दें जिससे उसका ऐक्सेस सिर्फ आपके ही पास रहे। समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट करते रहें।
