आज के डिजिटल युग में हम ज्यादातर काम के लिए अपने मोबाइल फोन या फिर डिजिटल डिवाइस पर निर्भर हैं। यही कारण है कि आज के इस डिजिटल दौर में साइबर क्राइम के केस भी बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। बढ़ते साइबर फ्रॉड और फर्जी वेबसाइटों को देखते हुए प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने नागरिकों को जागरूक करने के लिए एक महत्वपूर्ण पोस्ट शेयर किया है। इस पोस्ट में पीआईबी ने बताया है कि किस तरह के नागरिक सतर्कता बरतते हुए खुद को सुरक्षित कर सकते हैं।
पीआईबी की फैक्ट चेक यूनिट ने इस बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। ट्वीट में कहा गया है, 'ऑनलाइन ट्रैप्स में न फंसें! लिंक क्लिक करने से पहले वेबसाइट की असलियत जांच लें। फेक साइट पहचानना जितना लगता है उससे कहीं आसान है।' एक इन्फोग्राफिक्स भी शेयर किया गया है। इसके साथ ही फर्जी वेबसाइट पहचानने के लिए कुछ आसान टिप्स भी दिए गए हैं।
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फ्रॉड से कैसे बचें?
पीआईबी ने बताया है कि सबसे पहले URL को सावधानी से जांचें। हमेशा 'https://' वाले एड्रेस को जरूर देखें क्योंकि यही सही एड्रेस है। इसके अलावा 'http' वाली साइट्स सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा डोमेन नाम में स्पेलिंग एरर या सरकारी वेबसाइट जैसा दिखने वाला नाम (जैसे pib.gov.in की जगह pib-gov.in या pibfactcheck.in जैसा मिलता-जुलता) होने पर सतर्क हो जाएं और क्लिक करने से पहले अच्छे से जांच कर लें। पीआईबी ने स्पष्ट किया है कि असली सरकारी वेबसाइट्स का डोमेन हमेशा .gov.in या .nic.in जैसा होता है।
पैडलॉक आइकन
ब्राउजर के एड्रेस बार में दिखने वाला पैडलॉक HTTPS सर्टिफिकेट की मौजूदगी दर्शाता है, जो डेटा ट्रांसमिशन को सिक्योर बनाता है। अगर पैडलॉक नहीं है तो व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी कभी न भरें। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैडलॉक साइट की विश्वसनीयता नहीं बल्कि कनेक्शन की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, फिर भी यह काफी अहम है।
पॉप-अप्स और फ्लैशी ऑफर्स से सतर्क
पीआईबी ने बताया है कि कई लोग पॉप-अप्स और फ्लैशी ऑफर्स का शिकार हो जाते हैं। फैक्ट चेक में बताया गया है कि फर्जी साइट्स अक्सर यूजर्स को बाढ़ जैसी विज्ञापनों या फ्री लैपटॉप, एक क्लिक में सरकारी नौकरी, तुरंत कमाई जैसे लालच से भर देती हैं। पीआईबी इन्फोग्राफिक्स में साफ लिखा है कि ऐसे स्पैमी फील होने पर तुरंत साइट बंद कर दें।
इसके अलावा कॉन्टेक्ट और अबाउट पेज की जांच करना भी आपके लिए काफी अहम हो सकता है। सही वेबसाइट पर काम करने वाला ईमेल, फोन नंबर, पूरा पता और वैध रजिस्ट्रेशन डिटेल्स उपलब्ध होते हैं। अगर ये जानकारी गायब है या 'About Us' पेज संदिग्ध लगता है तो यह आपके लिए संकेत है कि कुछ गड़बड़ है।
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जागरूक होने से निकलेगा हल
आज जब UPI ट्रांजेक्शन्स, ऑनलाइन बैंकिंग और ई-कॉमर्स आम हो गए हैं, तब छोटी-छोटी सावधानियां बड़े नुकसान से बचा सकती हैं। डिजिटल और साइबर क्राइम के इतने ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं कि देशभर में इसको लेकर चिंता जाहिर की जा रही है। हालांकि, इससे आसानी से बचा जा सकता है अगर लोग थोड़ी सतर्कता बरतें। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यूजर एजुकेशन ही सबसे प्रभावी हथियार है, जिससे साइबर क्राइम और फ्रॉड से बचा जा सकता है।


