आजकल के समय में बच्चों को पैसे की सही कीमत समझाना बहुत जरूरी हो गया है। इसकी शुरुआत हमें उनके बचपन से ही करनी चाहिए। कई बार माता-पिता को ऐसा लगता है कि बच्चे अभी बहुत छोटे हैं और जब वे बड़े हो जाएंगे तब पैसे का हिसाब-किताब अपने आप सीख जाएंगे। असल में ऐसा नहीं होता है। पैसों से जुड़ी आदतें बड़े होकर नहीं बल्कि बचपन में ही बनती हैं। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एक मशहूर रिसर्च 'हैबिट फॉर्मेशन एंड लर्निंग इन यंग चिल्ड्रेन' में यह सामने आया है कि बच्चे सात साल की उम्र तक आते-आते पैसे से जुड़ी अपनी ज्यादातर आदतें बना लेते हैं।
इस स्टडी के लेखक और साइकैट्रिस्ट डेविड व्हाइटब्रेड का कहना है कि बच्चे बहुत छोटी उम्र से ही अपने माता-पिता और घर के बड़ों को बहुत ध्यान से देखते हैं। वे बड़ों को देखकर ही यह सब सीखते हैं कि पैसा कैसे खर्च किया जाता है उसे कैसे बचाया जाता है और अपनी मनपसंद चीज के लिए कैसे थोड़ा इंतजार किया जाता है। बच्चों को यह सब बातें सिखाने के लिए आपको किसी मुश्किल पढ़ाई या क्लास की जरूरत नहीं है। आप अपने घर के रोज के माहौल और छोटी-छोटी आसान आदतों से ही उन्हें बहुत कुछ सिखा सकते हैं। यही छोटे-छोटे कदम आगे चलकर बच्चों का पूरा भविष्य बदलते हैं और उनमें एक जिम्मेदारी की भावना पैदा करते है
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तीन डिब्बों वाले सिस्टम का इस्तेमाल करें
बच्चों को सीधे हाथ में पॉकेट मनी देने के बजाय आप एक नया और मजेदार तरीका अपना सकते हैं। उन्हें घर में तीन अलग-अलग डिब्बे या जार बनाकर दें। इन डिब्बों को आप पारदर्शी यानी आर-पार दिखने वाला रखें। पहले डिब्बे पर खर्च, दूसरे डिब्बे पर बचत और तीसरे डिब्बे पर दान लिख दें। बच्चों को जो भी पॉकेट मनी या पैसे मिलें उन्हें कहें कि वे इन पैसों को अपनी समझ से इन तीनों डिब्बों में अलग-अलग डालें। मनी एक्सपर्ट सुसान बीचम का भी मानना है कि जब बच्चे इस तरह अलग-अलग डिब्बों में पैसा रखना शुरू करते हैं तो उन्हें बहुत छोटी उम्र में ही यह समझ आ जाता है कि हाथ में आया सारा पैसा तुरंत खर्च करने के लिए नहीं होता है। वे सीखते हैं कि पैसे के अलग-अलग काम होते हैं और उसे संभालकर रखना कितना जरूरी है।
जरूरत और इच्छा का अंतर सिखाएं
जब भी आप बच्चों के साथ बाजार, दुकान या किसी बड़े सुपरमार्केट में सामान खरीदने जाएं तो इसे एक खेल की तरह इस्तेमाल करें। बच्चों से कहें कि वे दुकान के सामान को देखें और पहचान कर बताएं कि कौन सी चीज उनकी 'जरूरत' है और कौन सी चीज सिर्फ एक 'इच्छा' यानी उनका शौक है। जैसे दूध, ब्रेड या पढ़ाई का सामान उनकी जरूरत है, जबकि कोई महंगा खिलौना या चॉकलेट उनकी सिर्फ एक इच्छा है। जैसे-जैसे बच्चे यह खेल बार-बार खेलेंगे, वे अच्छी तरह समझ जाएंगे कि हर खरीदारी में एक सही फैसला लेना पड़ता है। यह एक ऐसी आदत है जो बड़े होने के बाद भी उनके पूरे जीवन में बहुत काम आएगी और वे कभी भी फालतू खर्च नहीं करेंगे।
चौबीस घंटे रुकने के नियम का पालन करें
बच्चे अक्सर किसी दुकान पर जाकर या ऑनलाइन कोई नया खिलौना, गेम या कोई खाने-पीने की चीज देखकर उसे तुरंत खरीदने की जिद करने लगते हैं। ऐसे समय में उन्हें वह चीज तुरंत खरीदकर बिल्कुल न दें। बच्चों को प्यार से समझाएं कि हम इस चीज को अभी नहीं बल्कि पूरे चौबीस घंटे के बाद खरीदेंगे। इस तरह थोड़ा रुकने और इंतजार करने से बच्चों की तुरंत जिद पूरी करने की आदत धीरे-धीरे कम होने लगती है। इससे बच्चे जल्दबाजी में और बिना सोचे-समझे पैसे बर्बाद करने से बच जाते हैं। कई रिसर्च भी यही बताती हैं कि जो बच्चे बचपन में थोड़ा रुकना और सब्र करना सीख जाते हैं उनका आर्थिक भविष्य आगे चलकर हमेशा सुरक्षित और बहुत अच्छा रहता है।
कीमतों की तुलना करना सिखाएं
जब भी आप बच्चों के साथ ऑनलाइन कोई सामान देख रहे हों या किसी दुकान से कुछ खरीद रहे हों तो उन्हें कीमतों की तुलना करना जरूर सिखाएं। उन्हें दिखाएं कि कैसे एक जैसा दिखने वाला सामान अलग-अलग दुकानों या अलग-अलग वेबसाइट पर अलग-अलग दामों में मिलता है। बच्चों से इस बारे में बात भी करें कि यह अंतर क्यों होता है और हमें कहां से सामान खरीदने में फायदा होगा। यह बहुत ही आसान आदत है लेकिन इससे बच्चे एक समझदार ग्राहक बनते हैं। वे आगे चलकर हमेशा सोच-समझकर पूरी जानकारी के साथ और सही जगह पर ही अपना पैसा लगाना सीखेंगे।
बचत को आंखों के सामने दिखने लायक बनाएं
बच्चों को वह बातें बहुत जल्दी और आसानी से समझ आती हैं जो उनकी आंखों के सामने साफ-साफ दिखाई देती हैं। उनके पैसे बचाने के लिए हमेशा कांच के बर्तन या किसी साफ दिखने वाले प्लास्टिक डिब्बे का इस्तेमाल करें। आप चाहें तो उनकी पसंद की किसी चीज का एक चार्ट भी दीवार पर बना सकते हैं। जब बच्चे अपनी बचत के पैसों को दिन-पर-दिन अपनी आंखों के सामने धीरे-धीरे बढ़ता हुआ देखेंगे तो उन्हें बहुत ज्यादा खुशी होगी। इससे उन्हें पैसे जोड़ने में मजा आने लगेगा। वे किसी भी अपनी मनपसंद चीज के लिए खुद ही आगे आकर बचत करने लगेंगे और उन्हें इंतजार करने का फायदा भी समझ आएगा।
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व्यवहार से तय होती है सबसे बड़ी सीख
ज्यादातर माता-पिता हमेशा इस चिंता में रहते हैं कि वे अपने बच्चों को बैंक के नियमों, निवेश और पैसों की बड़ी-बड़ी बातें कैसे सिखाएं। असल में बच्चों की सबसे बड़ी सीख माता-पिता के खुद के व्यवहार और उनके बर्ताव से आती है। आप घर में पैसों को लेकर कैसा व्यवहार करते हैं बच्चे वही सीखते हैं। पैसों की समझदारी किसी एक दिन की बड़ी बातचीत या क्लास से नहीं आती, बल्कि यह रोज के छोटे-छोटे पलों से बनती है। यही छोटे-छोटे कदम बच्चों को पैसों के मामले में आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बनाते हैं जिससे उनका आने वाला कल पूरी तरह से सुरक्षित हो जाता है।


