उत्तर प्रदेश के कानपुर के बिठूर में रहने वाले एयरफोर्स ऑफिसर अनुराग शुक्ला को छेड़छाड़ के एक बेहद गंभीर मामले में पूरे 7 साल बाद पॉक्सो कोर्ट ने ससम्मान बरी कर दिया है। साल 2019 में उन पर अपनी ही नाबालिग साली के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगा था, जिसके कारण उन्हें 19 दिन जेल में बिताने पड़े और उनकी नौकरी में प्रमोशन भी रुक गया था। शनिवार को विशेष न्यायाधीश ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए अनुराग को निर्दोष पाया क्योंकि पीड़िता ने खुद अदालत में कुबूल किया कि यह घटना असलियत में नहीं बल्कि उसके एक सपने का भ्रम थी।

 

इस मामले की शुरुआत 8 मार्च 2019 की रात को हुई थी, जब घर के सभी लोग सो रहे थे। अचानक 15 साल की साली के कमरे से जोर-जोर से चिल्लाने की आवाजें आने लगीं और उसने अपने जीजा पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। घटना के करीब 5 महीने बाद अगस्त 2019 में इस मामले की एफआईआर नौबस्ता थाने में दर्ज हुई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सितंबर में अनुराग को गिरफ्तार कर लिया। इस आरोप की वजह से अनुराग को न सिर्फ मानसिक तनाव झेलना पड़ा, बल्कि समाज में भी उनकी भारी बेइज्जती हुई।

 

यह भी पढ़ें: रास्ते में रोका फिर कैंची से सास की नाक काटकर फरार हो गया दामाद

अदालत में साली का यू-टर्न

जब यह मामला पॉक्सो कोर्ट पहुंचा, तो वहां पीड़िता के बयान ले पूरे केस का रुख ही बदल दिया। लड़की ने कोर्ट में गवाही देते हुए बताया कि उस रात उसने एंटीबायोटिक दवा ली थी। जिसकी वजह से वह गहरी नींद और हल्के नशे में थी। उसने साफ तौर पर कहा है कि उसे सपने में महसूस हुआ कि जीजू ने उसे पकड़ लिया है और उसने डर के मारे शोर मचा दिया। उसने यह माना कि हकीकत में जीजा ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया था। वह सिर्फ एक डरावना सपना था जिसे उसने सच समझ लिया था।

 

यह भी पढ़ें: 26 साल के सोशल मीडिया स्टार अरुण तुपे का निधन, घर में पड़ी मिली लाश

संपत्ति का विवाद और साजिश का आरोप

अनुराग शुक्ला ने इस केस को अपने ससुर की एक सोची-समझी साजिश बताया है। उनका कहना है कि शादी के कुछ दिन बाद ही उनके ससुर उन पर यह दबाव बना रहे थे कि वह अपनी जायदाद अपनी पत्नी और साली के नाम कर दें। जब अनुराग ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, तो उन्हें फंसाने के लिए इस झूठे केस का सहारा लिया गया। अनुराग के वकील ने भी कोर्ट में दलील दी कि यह पूरा मामला आपसी रंजिश और गलतफहमी के कारण खड़ा किया गया था। कोर्ट ने सभी गवाहों और लड़की के ताजा बयान को आधार मानते हुए अनुराग को बाइज्जत बरी करने का आदेश दिया।