कर्नाटक के बेंगलुरु में ब्रुकफील्ड इलाके के अंदर कैपजेमिनी कंपनी के ऑफिस में 'लिटिल स्कॉलर्स' नाम की एक बाहरी कंपनी द्वारा डेकेयर सेंटर चलाया जा रहा था। यहां ढाई साल की बच्ची को रोने की सजा के तौर पर बाथरूम में बंद करने और केयरटेकर्स द्वारा बच्चों पर चिल्लाने का मामला सामने आया है। इस घटना के वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद पूरे देश में भारी गुस्सा है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी महिला केयरटेकर को गिरफ्तार कर लिया है और कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

 

एक आईटी कंपनी में काम करने वाले माता-पिता ने अपनी ढाई साल की इकलौती बेटी को इस डेकेयर में भर्ती कराया था। वे दोनों सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हैं और अलग-अलग आईटी कंपनियों में काम करते हैं। वे करीब आठ महीने से अपनी बेटी को हर सुबह ऑफिस जाते समय इस डेकेयर सेंटर में छोड़ देते थे।

 

डेकेयर जाने के एक या दो महीने के बाद ही बच्ची के बर्ताव में अचानक बहुत अजीब बदलाव आने लगा। वह बाथरूम या टॉयलेट जाने के नाम से ही बुरी तरह डरने लगी थी। अगर माता-पिता उसे नहलाने या टॉयलेट ले जाते तो वह जोर-जोर से रोने लगती और डर के वजह से कमरे से बाहर भागने की कोशिश करती। माता-पिता उस समय समझ नहीं पाए कि आखिर उनकी बेटी को अचानक क्या हो गया है। उसे बाथरूम फोबिया हो गया था।

 

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बाथरूम का वीडियो

इस मामले की जांच साउथईस्ट की डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस मोहम्मद सुजीता की पुलिस टीम ने की और पीड़ित माता-पिता से बात की। जब माता-पिता ने वायरल वीडियो देखा तो सबको पता चला कि बच्ची बाथरूम से क्यों डरती थी। वीडियो में साफ दिख रहा था कि एक छोटी बच्ची को एक अस्थायी बाथरूम के अंदर बंद कर दिया गया था। वह बच्ची अंदर से रोते हुए 'अम्मा, अम्मा' बोल रही थी और नीचे झुककर दरवाजे के नीचे की खाली जगह से बाहर झांकने की कोशिश कर रही थी।

 

बच्ची की मां ने पुलिस को बताया, 'वह टॉयलेट या बाथरूम जाने से मना कर देती थी। वह टॉयलेट या बाथरूम को देखने या उसमें घुसने पर रोती थी और डर दिखाती थी। जब नहलाने या टॉयलेट के लिए ले जाया जाता था तो वह कमरे से बाहर भागने की कोशिश करती थी। हमने यह बदलाव उसके डेकेयर जॉइन करने के एक या दो महीने के अंदर देखा था। अब हमें पूरी तरह साफ हो गया है कि उसे बार-बार बाथरूम के अंदर बंद किया जाता था जैसा कि वीडियो में दिखाया गया है।'

 

पुलिस टीम ने वीडियो में दिख रहे एक और तीन साल के बच्चे के माता-पिता से भी बात की। इन माता-पिता ने बताया कि उनके अपने बच्चे के बर्ताव में कोई बड़ा बदलाव तो नहीं आया था लेकिन उन्होंने केयरटेकर्स की आदत को नोटिस किया था। इन माता-पिता ने पुलिस को बताया, 'बच्चे को छोड़ने या लेने जाने के दौरान हमने नोटिस किया कि कुछ महिला केयरटेकर्स की आवाजें सुनकर बच्चे डरे हुए दिखने लगते थे।

पुलिस की जांच

इंटरनेट पर कुछ ऐसी अफवाहें भी उड़ी थीं कि केयरटेकर्स बच्चों को वॉशिंग मशीन में बंद कर देती थीं या उनके मुंह पर टॉयलेट की पाइप से पानी डाला करती थीं। पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने इस बारे में साफ किया कि जांच के दौरान बच्चों को वॉशिंग मशीन में बंद करने या टॉयलेट जेट से मुंह पर पानी स्प्रे करने के आरोपों का कोई भी सबूत नहीं मिला है।

 

हालांकि, पुलिस अधिकारी ने बयान देते हुए कहा, 'वीडियो में यह साफ दिख रहा है कि डेकेयर की महिलाएं बच्चों को चुप कराने और उन्हें काबू में रखने के लिए उन पर बुरी तरह चिल्लाती थीं और उन्हें डराया-धमकाया करती थीं। एक वीडियो में आया विजयलक्ष्मी एक बच्चे को लगातार रोने के कारण बाथरूम के अंदर बंद करते हुए साफ दिख रही है।'

आया की गिरफ्तारी

पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले में कार्रवाई करते हुए विजयलक्ष्मी नाम की 55 साल की एक केयरटेकर को गिरफ्तार कर लिया जो कोलार की रहने वाली है। वीडियो में साफ दिख रहा था कि उसने एक बच्चे को सिर्फ इसलिए बाथरूम में बंद किया क्योंकि वह लगातार रो रहा था। पुलिस अभी चार और महिला केयरटेकर्स से इस मामले में पूछताछ कर रही है। विजयलक्ष्मी को जज के सामने उनके होम ऑफिस में पेश किया गया जहां से उसे 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

 

जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन महिला केयरटेकर्स को महीने में सिर्फ 8,000 रुपये सैलरी दी जाती थी। जबकि लेबर डिपार्टमेंट के नियमों के मुताबिक, डेकेयर में काम करने वालों को कम से कम 25,000 रुपये न्यूनतम सैलरी मिलनी चाहिए। लेबर डिपार्टमेंट के अधिकारी पुलिस से केयरटेकर्स के बयानों की कॉपी मांग रहे हैं जिसके बाद वे डेकेयर चलाने वाली संस्था के खिलाफ कदम उठाएंगे। अधिकारी यह देख रहे हैं कि क्या बहुत कम सैलरी मिलने की वजह से ऐसा बर्ताव कर रही थीं।

 

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सरकार का एक्शन

गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने कैपजेमिनी कंपनी की आलोचना की है और उन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, 'ऐसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के पास डेकेयर चलाने सहित कई प्रशासनिक मामलों से जुड़े कड़े नियम होते हैं। मुझे नहीं लगता कि कैपजेमिनी ने यहां किसी नियम का पालन किया या जिम्मेदारी से काम किया। उन्होंने स्टाफ को काम पर रखने से पहले उनका ठीक से बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भी नहीं कराया था। हमने उनसे विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। इस तरह की घटना से न सिर्फ कंपनियों को नुकसान होता है बल्कि हमारे ब्रांड बेंगलुरु की छवि भी खराब होती है।'

 

कंपनी ने आगे कहा, 'हमारे डेकेयर चलाने वालों की पूरी जांच की जाती है और नियमों को कड़ाई से परखा जाता है। यह सुविधा हमारे कर्मचारियों की मदद के लिए है, जो अपने बच्चों को यहां पूरे भरोसे के साथ छोड़ते हैं। अपने कर्मचारियों के प्रति जिम्मेदारी निभाना हमारे लिए बहुत जरूरी है।'