चीन से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 32 साल के एक युवक की अचानक मौत हो गई। वह एक प्रोग्रामर था। मृतक के परिवार का आरोप है कि उसकी मौत ज्यादा काम करने की वजह से हुई। परिवार का कहना है कि युवक की मौत के 8 घंटे बाद भी उसे काम से संबंधित ई-मेल आया था। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर वर्कलोड को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है।
गाओ गुआंगहुई नाम के इस युवक को वर्ष 2021 में प्रमोशन मिला था। प्रमोशन के बाद वह टीम लीडर बन गया। टीम लीडर बनने के बाद गाओ निर्धारित समय से कहीं अधिक काम करने लगा। काम का दबाव इतना बढ़ गया कि वह कई-कई दिनों तक घर भी नहीं जाता था।
यह भी पढ़ें: 56 लाख सब्स्क्राइबर वाला यूट्यूबर करता था ड्रग्स की तस्करी, 905 किलो गांजा बरामद
कैसे हुई गाओ गुआंगहुई की मौत?
29 नवंबर 2025 की सुबह गाओ गुआंगहुई को शरीर में अजीब-सी थकावट महसूस हो रही थी। तबीयत खराब होने के बावजूद उसने ऑफिस से छुट्टी नहीं ली और घर से काम करने का फैसला किया। काम करते-करते उसकी हालत और बिगड़ती चली गई, जिसके बाद वह बेहोश हो गया। परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन दोपहर में गाओ को मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।
गाओ की मौत के बाद उसकी पत्नी ली गहरे सदमे में है। ली अक्सर गाओ से समय पर घर लौटने को कहा करती थी लेकिन वह काम में व्यस्त रहता था। रिपोर्ट के अनुसार ली ने कहा,'अगर मैं समय को पीछे मोड़ सकती, तो मैं उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर कर देती।'
यह भी पढ़ें: मुसलमानों को गाली देकर बनेगा हिंदू राष्ट्र? धीरेंद्र शास्त्री ने बदले सुर
सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
गाओ की मौत के बाद सोशल मीडिया पर वर्कलोड को लेकर कई प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गाओ की मृत्यु के 8 घंटे बाद उसके फोन पर ऑफिस से काम से जुड़ा मैसेज आया, जिसमें जल्द से जल्द काम पूरा करने को कहा गया था। इस घटना के बाद चीन की 'हमेशा चालू रहने वाली' कार्य संस्कृति को लेकर लोगों में आक्रोश फैल गया जबकि चीन के श्रम कानूनों के अनुसार कर्मचारियों से एक दिन में 8 घंटे और एक सप्ताह में 44 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जाना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी सीवीटीई ग्रुप ने कुछ मुआवजा तो दिया है लेकिन गाओ की मौत की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है।
सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने लिखा,'यह बेहद दुखद है कि उन्होंने अपने जीवन के आखिरी पल तक काम किया। कोई भी नौकरी इसके लायक नहीं है।' वहीं दूसरे यूज़र ने कहा, 'इतना जिम्मेदार इंसान अब आखिरकार आराम कर सकता है।' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, 'जो कंपनी कर्मचारियों से ओवरटाइम करवाकर ही मुनाफा कमाती है, उसे दिवालिया हो जाना चाहिए।'
संघर्षों से भरा रहा गाओ का जीवन
गाओ का जीवन शुरू से ही संघर्षपूर्ण रहा। उसके माता-पिता दक्षिण चीन के ग्वांगडोंग में रहते थे और परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। जेब खर्च के लिए गाओ को कचरा उठाने जैसे काम भी करने पड़े। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उसने पढ़ाई के साथ-साथ कई नौकरियां कीं, ताकि कॉलेज की फीस भर सके।
