दक्षिणी दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश-1 से सामने आया यह मामला एक बार फिर साइबर ठगी के खतरनाक और नए तरीके की ओर ध्यान खींचता है, जिसे अब 'डिजिटल अरेस्ट' कहा जा रहा है। ठग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर बुजुर्ग और अकेले रहने वाले लोगों को मानसिक दबाव में डालते हैं, उन्हें डराते हैं और गोपनीयता का हवाला देकर किसी से बात न करने को मजबूर करते हैं। इसी तरह के एक मामले में 70 वर्षीय महिला से लगभग 6.9 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई।
हैरानी की बात यह है कि यही इलाका कुछ दिन पहले एक और बड़े डिजिटल अरेस्ट घोटाले का गवाह बन चुका है, जहां एक बुजुर्ग दंपति से करीब 15 करोड़ रुपये ठगे गए थे। यह घटना न सिर्फ साइबर अपराधियों की बढ़ती चालाकी को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि किस तरह भय, भरोसा और अकेलेपन का फायदा उठाकर लोग जीवन भर की कमाई गंवा बैठते हैं।
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क्या है पूरा मामला?
पीड़ित महिला की पहचान मीनाक्षी आहूजा के रूप में हुई है। वह एक विधवा गृहिणी हैं और ग्रेटर कैलाश-1 के डब्ल्यू ब्लॉक में स्थित एक पारिवारिक डुप्लेक्स बंगले की पहली मंजिल पर अकेली रहती हैं। ग्राउंड फ्लोर पर उनके देवर और देवर का बेटा रहते हैं। मीनाक्षी के पति एक कारोबारी थे, उनका कई साल पहले निधन हो चुका है। पुलिस के अनुसार, उनका बेटा ऑस्ट्रेलिया में रहता है और बेटी गुरुग्राम में रहती है।
पुलिस ने बताया कि मीनाक्षी को 6 जनवरी को पहली बार ठगों का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और कहा कि मीनाक्षी के नाम से रजिस्टर्ड एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए सिम कार्ड लेने में किया गया है। आरोपी ने पहले महिला से उसकी जिंदगी, परिवार और संपत्ति से जुड़ी बातें पूछकर उसका भरोसा जीता। इसके बाद कॉल को एक दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर किया गया, जिसने खुद को ईडी अधिकारी बताया।
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उस व्यक्ति ने मीनाक्षी को बताया कि जिन सिम कार्ड्स की बात हो रही है, उनका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में हुआ है और अब उन्हें मुंबई आना पड़ेगा। जब मीनाक्षी डर गईं और घबरा गईं, तो ठग ने कहा कि अदालत के आदेश पर एक 'वेरिफिकेशन प्रक्रिया' के जरिए मामला सुलझाया जा सकता है।
पहली बार में किया 9 करोड़ रुपये ट्रांसफर
पुलिस के मुताबिक, 9 जनवरी को मीनाक्षी ने पहली बार 4 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। कुछ ही घंटों बाद ठगों ने उनसे 1.3 करोड़ रुपये का एक और RTGS ट्रांसफर करवा लिया। इस दौरान बैंक अधिकारियों को लेनदेन पर शक हुआ और उन्होंने मीनाक्षी से पूछा कि क्या वह किसी परेशानी में हैं। ठगों ने पहले ही उन्हें किसी को कुछ न बताने की चेतावनी दी थी, इसलिए उन्होंने बैंक को बताया कि यह रकम बेटी के लिए प्रॉपर्टी से जुड़े काम के लिए भेजी जा रही है।
इसके बाद 12 जनवरी को ठगों ने आखिरी बार दबाव बनाकर उनसे 1.6 करोड़ रुपये और ट्रांसफर करवा लिए। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि वेरिफिकेशन पूरा होते ही सारा पैसा वापस मिल जाएगा।
इसके बाद ठगों ने मीनाक्षी से कोई संपर्क नहीं किया। एक दिन इंतजार करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उन्होंने बुधवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
हफ्ते भर में दूसरा केस
यह ग्रेटर कैलाश इलाके में एक हफ्ते के भीतर सामने आया दूसरा बड़ा डिजिटल अरेस्ट का मामला है। इससे पहले एक बुजुर्ग दंपति से लगभग 14.85 करोड़ रुपये की ठगी का मामला 9 जनवरी को सामने आया था।
