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हजारों बैंक अकाउंट, 13 स्टेप में विदेश भेजते थे पैसा, महा ठगो का भंडाफोड़

महाराष्ट्र में साइबर ठगो ने एक फार्मास्यूटिकल कंपनी के मालिक से करीब 58 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने पूरे मामले की जांच के बाद 2500 पेज की चार्जशीट फाइल की है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर: Photo Credit: AI

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महाराष्ट्र से सामने आए एक बड़े साइबर ठगी मामले ने एक बार फिर डिजिटल अपराधों की खतरनाक हकीकत उजागर कर दी है। खुद को CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराने वाले एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में महाराष्ट्र नोडल साइबर पुलिस ने 58 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े 2,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 32 गिरफ्तार और 41 फरार आरोपियों के नाम शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि ठगों ने फर्जी कंपनियों, जाली दस्तावेजों और हजारों म्यूल बैंक खातों के जरिए पैसों को कई स्तरों से घुमाकर विदेश तक पहुंचाया। 

 

चार्जशीट के अनुसार, जांच में 10,000 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों का पता चला है। इनमें से कई खाते फर्जी कंपनियों के नाम पर, जाली केवाईसी दस्तावेजों और फर्जी सिम कार्ड के जरिए खोले गए थे। ठगी की रकम को 13 अलग-अलग स्तरों के खातों से गुजारा गया। इसमें महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के कम से कम 27 सक्रिय म्यूल खाते शामिल थे, जिसके बाद पैसा विदेश भेज दिया गया। पुलिस को शक है कि इस पूरे गिरोह का संचालन कंबोडिया और दुबई से हो रहा था। विजय खन्ना नाम का एक व्यक्ति इस रैकेट का अहम हैंडलर बताया जा रहा है, जो फिलहाल भारत से बाहर है।

 

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क्या है पूरा मामला

यह ठगी अगस्त 2025 में शुरू हुई थी, जब एक फार्मास्यूटिकल कारोबारी और उसकी पत्नी को फोन कॉल और वीडियो कॉल के जरिए डराया गया। कॉल करने वालों ने खुद को CBI और ED का अधिकारी बताया और कहा कि उनके बैंक खातों में ‘संदिग्ध’ रकम आई है, जिस पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है। आरोपियों ने उन्हें फर्जी वीडियो कॉल दिखाए, जिनमें पुलिस स्टेशन, CBI और ED दफ्तर, यहां तक कि नकली कोर्ट रूम भी दिखाए गए, जहां जज, अधिकारी और वकील बने लोग मौजूद थे।

 

जांच के नाम पर दंपती को डराकर उनकी पूरी जमा-पूंजी, करीब 58.1 करोड़ रुपये, ट्रांसफर करवा लिए गए। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा।

 

जांच एजेंसियों के मुताबिक, गुजरात के कारोबारी जयेशभाई डापा की कंपनी ‘जय भवानी मैकेनिकल’ के खाते में करीब 15.3 करोड़ रुपये आए, जिन्हें बाद में अलग-अलग खातों में भेज दिया गया। इसी तरह मेघदूत ट्रेडिंग, जैकी एक्सप्लोरर, SBV फाउंडेशन और M-स्टैक इनोवेशन जैसे खातों में 1.9 करोड़ से 2.4 करोड़ रुपये तक की रकम ट्रांसफर की गई।

 

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दादरा और नगर हवेली के रहने वाले देवेंद्रनाथ राउत के खाते ‘साईनाथ एंटरप्राइजेज’ में करीब 2.1 करोड़ रुपये आए। पूछताछ में उसने बताया कि उसने यह पैसा फरार आरोपी श्रातिक के कहने पर आगे ट्रांसफर किया। पुलिस ने यह भी पता लगाया है कि करीब 3.4 करोड़ रुपये विजय गायकवाड़, अभिजीत जांबले और रत्नदीप से जुड़े खातों में भेजे गए।

चार्जशीट में उजागर हुई सच्चाई

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि भीलवाड़ा के अक्षय मीणा की AVB फाउंडेशन को 30 लाख रुपये मिले। वहीं, टेक्नोमिस्ट सॉफ्टवेयर और आर्किट सॉल्यूशंस से जुड़े इंडोनेशिया के मेबैंक खातों में 50 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। आंध्र प्रदेश के आरोपी कटुंगा राजू सैमुअल प्रसाद पर आरोप है कि उसने एक धार्मिक ट्रस्ट के नाम पर खुले खाते के जरिए 2.4 करोड़ रुपये हासिल किए।

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