बमबारी, धमकियां और कब्जे की लड़ाई; इस मुस्लिम मुल्क में आखिर हो क्या रहा है?
यमन में सऊदी अरब और UAE के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। सऊदी ने एक बार फिर UAE समर्थित STC के ठिकानों पर हमला किया है।

STC के समर्थक दक्षिण यमन की मांग में रैली निकालते हुए। (Photo Credit: PTI)
यमन में हालात तेजी से बदल रहे हैं। सऊदी अरब लगातार यमन में बमबारी कर रहा है। ये बमबारी सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) पर हो रही है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को सऊदी ने एक बार फिर हमला किया, जिसमें कम से कम 20 अलगाववादियों की मौत हो गई। इससे मध्य पूर्व की दो बड़ी ताकत- सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच तनाव बढ़ गया है। वह इसलिए क्योंकि STC को UAE सपोर्ट करता है और सऊदी को यह बात पसंद नहीं है।
बमबारी इसलिए हो रही है, क्योंकि STC का कहना है कि दक्षिणी यमन को अलग राष्ट्र बनाया जाए। यमन के ज्यादातर दक्षिणी हिस्से पर अब STC का नियंत्रण है। जबकि, उत्तरी यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का कब्जा है। STC की मांग का UAE समर्थन कर रहा है। जबकि, सऊदी चाहता है कि पूरा यमन एक ही रहे।
इस तनातनी के बीच STC ने दक्षिणी यमन को आजाद मुल्क घोषित कर दिया है। इसके साथ ही STC ने दक्षिणी यमन के लिए एक नए संविधान का एलान भी किया है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि संविधान लागू हो गया है या सिर्फ प्रतीकात्मक है।
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यमन में हो क्या रहा है?
यमन में 2014 में गृहयुद्ध छिड़ गया था। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना समेत उत्तरी यमन के सभी बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया था। हूतियों ने अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को बेदखल कर दिया था।
इस गृहयुद्ध में सऊदी अरब और UAE शामिल हो गए, ताकि यमन में अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को बहाल किया जा सके।
इसी बीच अप्रैल 2017 में STC बनी। इसे UAE ने समर्थन दिया। इसका मकसद दक्षिणी यमन को अलग मुल्क बनाना है। उसका कहना है कि 1967 से 1990 तक साउथ यमन अलग मुल्क ही था और फिर से ऐसा ही किया जाए। UAE के समर्थन से STC काफी मजबूत हुई है।
https://twitter.com/omeisy/status/2007173443876466821
पिछले महीने STC ने दक्षिण के दो प्रांतों पर नियंत्रण कर लिया था। STC ने दक्षिण के अहम शहर अदन में प्रेसिडेंशियल पैलेस पर भी कब्जा कर लिया था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार यहीं से चलती थी। STC के कब्जे के बाद सरकार के कई नेता सऊदी भाग गए।
STC के एक नेता ने बताया कि शुक्रवार को सऊदी के लड़ाकू विमानों ने हद्रामौत प्रांत में STC के कब्जे वाले ठिकानों पर बमबारी की। सऊदी समर्थित लड़ाकों ने भी इन पर कब्जा करने की कोशिश की। यह हमला तब हुआ, जब कुछ दिन पहले ही सऊदी ने STC के लिए आ रही हथियारों की खेप पर बमबारी की थी।
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सऊदी के हमले और STC का सरेंडर से इनकार
सऊदी अरब एक तरफ बमबारी कर रहा है तो दूसरी तरफ STC ने सरेंडर करने से इनकार कर दिया है। सऊदी समर्थित लड़ाकों को 'नेशनल शील्ड फोर्सेस' नाम दिया गया है।
बताया जा रहा है कि सऊदी समर्थित बलों ने STC से जुड़े 'सदर्न शील्ड' के लड़ाकों को हद्रामौत और माहरा से पीछे हटने को कहा। वहीं, STC ने अपने हथियार और कैंप सौंपने से इनकार कर दिया है।
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STC से जुड़े अहमद बिन ब्रेक ने बताया कि नेशनल शील्ड फोर्सेस ने हद्रामौत में दो कैंपों पर हमला किया। उन्होंने कहा कि हमने पीछे हटने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सऊदी ने कैंपों पर हमला किया।
STC के प्रवक्ता मोहम्मद अल-नकीब ने बताया कि सऊदी के हमलों में कई लड़ाके मारे गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि हमलों में कितने लड़ाके मारे गए हैं लेकिन बताया जा रहा है कि 20 लोगों की मौत हो गई है।
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STC ने नए संविधान का एलान किया
STC के प्रमुख ऐदारूस अल-जुबैदी ने शुक्रवार को एक वीडियो बयान जारी कर कहा कि दक्षिण के लोगों के लिए नया संविधान रहेगा। इस संविधान में 30 अनुच्छेद हैं।
उन्होंने कहा कि यह संविधान दो साल तक लागू रहेगा और उसके बाद दक्षिण के लोगों के लिए जनमत संग्रह करवाया जाएगा। STC का कहना है कि इन दो सालों में दक्षिण और उत्तर के बीच बातचीत होनी चाहिए, ताकि दक्षिण के लोगों को अपने अधिकार मिल सकें। उन्होंने कहा कि अगर कोई उनके प्रस्ताव से सहमत नहीं होता है या सैन्य कार्रवाई करता है तो सारे रास्ते खुले हैं।
https://twitter.com/MiddleEast_24/status/2007180433692529011
संविधान में 'स्टेट ऑफ साउथ अरेबिया' की स्थापना की घोषणा है। इसमें 1967 से 1990 तक अस्तित्व में रहे पुराने साउथ यमन के ही क्षेत्र को कवर किया गया है।
इसे STC का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। STC की इस घोषणा से सऊदी अरब और STC के बीच तनाव बढ़ सकता है।
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https://twitter.com/clashreport/status/2007196605569786196
यमन में बढ़ता तनाव
यमन में सऊदी राजदूत मोहम्मद अल-जाबेर ने X पर पोस्ट कर दावा किया कि सऊदी ने हफ्तों तक STC के साथ तनाव खत्म करने की कोशिश की थी और अलगाववादियों से हद्रामौत और माहरा छोड़ने को कहा था लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
अल-जाबेर ने कहा कि STC ने एक सऊदी जेट को अदन में उतरने की इजाजत नहीं दी, जबकि STC नेताओं के साथ विमान उतरने पर सहमति बन गई थी, ताकि ऐसा समाधान खोजा जा सके जो सभी के हित के लिए काम करे।
दूसरी तरफ, STC के परिवहन मंत्रालय ने दावा किया कि सऊदी ने अदन एयरपोर्ट की सभी फ्लाइट्स को जेद्दा में चेक कराने की शर्त लगा दी है।
वहीं, इस तनातनी से सऊदी अरब और UAE के बीच भी तनाव बढ़ गया है। अब तक दोनों मिलकर हूती विद्रोहियों से लड़ रहे थे लेकिन अब दोनों एक-दूसरे के खिलाफ हो गए हैं। इससे हूती विद्रोही खुश हैं, क्योंकि उसके दोनों दुश्मन अब एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। इस पूरी तनातनी से यमन में एक बार फिर बड़ा गृहयुद्ध शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है।
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