दुनिया के सबसे मशहूर सॉफ्ट ड्रिंक कोका-कोला का फॉर्मूला पिछले सौ साल से भी ज्यादा समय से एक गहरा रहस्य बना हुआ है। इस फॉर्मूले को अब तक दुनिया के सबसे सुरक्षित व्यापारिक रहस्यों में गिना जाता रहा है। अब एक यूट्यूबर के दावे ने इस सदियों पुराने रहस्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक साइंस और इंजीनियरिंग आधारित यूट्यूब चैनल ने दावा किया है कि उसने आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से कोका-कोला के स्वाद के बेहद करीब एक ड्रिंक तैयार कर ली है।

 

यह दावा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हलचल मच गई है। लाखों लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या सच में कोका-कोला का रहस्य अब उजागर होने वाला है। यूट्यूबर का कहना है कि उसने इस ड्रिंक को बनाने के लिए न तो चोरी की और न ही किसी गोपनीय दस्तावेज का इस्तेमाल किया, बल्कि पूरी तरह वैज्ञानिक विश्लेषण और प्रयोगों के जरिए इस स्वाद को समझने की कोशिश की है।

 

यह भी पढ़ें: गर्लफ्रेंड के 26वें बर्थडे पर 26 KM दौड़ा बॉयफ्रेंड, यूजर्स के आए फनी कमेंट

किसने किया है दावा?

यह दावा LabCoatz नाम के एक साइंस और इंजीनियरिंग आधारित यूट्यूब चैनल से जुड़ा है। चैनल के फाउंडर ने हाल ही में करीब 25 मिनट का एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसका टाइटल है 'Stealing the Coca-Cola Secret Formula (With Science)'। यह वीडियो इसी हफ्ते अपलोड किया गया और अब तक इसे 30 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।

कब और किसने बनाया कोका-कोला का फ्लेवर?

कोका-कोला दुनिया की सबसे लोकप्रिय ड्रिंक्स में से एक है। कंपनी के मुताबिक, इसके ड्रिंक हर दिन दुनिया के 200 से ज्यादा देशों में करीब 2.2 अरब बार पिए जाते हैं। इतनी लोकप्रियता के बावजूद, इसके 'नेचुरल फ्लेवर' की असली जानकारी आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है। यह फॉर्मूला पेटेंट नहीं है, बल्कि 1886 में इसे बनाने वाले डॉ. जॉन स्टिथ पेम्बर्टन के समय से एक व्यापारिक रहस्य के तौर पर सुरक्षित रखा गया है।

 

सालों तक इस हाथ से लिखे फॉर्मूले का मालिकाना हक कुछ ही लोगों के पास रहा। बाद में इसे बैंक के लॉकर में रखा गया और फिर अटलांटा स्थित वर्ल्ड ऑफ कोका-कोला म्यूजियम में सुरक्षित कर दिया गया। इस रहस्य के चलते कई बार लोगों ने कोका-कोला का फॉर्मूला समझने की कोशिश की लेकिन अब तक किसी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।

LabCoatz के क्रिएटर ने क्या बताया? 

LabCoatz के क्रिएटर ने अपने वीडियो में बताया कि उनका मकसद कोका-कोला की बिल्कुल नकल करना नहीं था, बल्कि विज्ञान की मदद से उसके स्वाद के जितना करीब हो सके, उतना पहुंचना था। उन्होंने सबसे पहले कोका-कोला में मौजूद शुगर की मात्रा, कैफीन, फॉस्फोरिक एसिड और कलर जैसी चीजों का पहले एनालिसिस किया। इसके बाद उनका ध्यान इसके असली फ्लेवर सिस्टम को समझने पर गया।

 

उन्होंने मास स्पेक्ट्रोमेट्री और फ्लेवर एनालिसिस की मदद से दालचीनी, संतरा, लौंग और काली मिर्च जैसे कई एसेंशियल ऑयल्स के साथ रिसर्च किए। इसके अलावा उन्होंने इंटरनेट और पुराने समय की कुछ रेसिपीज को भी आजमाया, जिन्हें कोका-कोला के शुरुआती फॉर्मूले से जोड़ा जाता है।

 

यह भी पढ़ेंः मांझे से कट गया गला, खून से लथपथ, बेटी को अंतिम बार मिलाने लगा फोन, हुई मौत

 

यूट्यूबर के अनुसार, सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उन्होंने टैनिन्स नाम के पदार्थ को शामिल किया। टैनिन्स आमतौर पर चाय और वाइन में पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि टैनिन्स मिठास को संतुलित करने में मदद करते हैं और ड्रिंक को एक सूखा-सा स्वाद देते हैं, जो कोका-कोला की खास पहचान मानी जाती है।

 

वीडियो में उन्होंने कहा कि टैनिन्स ऐसे तत्व होते हैं जो गैस आधारित मास स्पेक्ट्रोमेट्री में आसानी से दिखाई नहीं देते, इसलिए इन्हें पहचानना मुश्किल होता है।

 

इस रिसर्च के बाद उन्होंने जो ड्रिंक तैयार की, उसका नाम 'Lab-Cola' रखा। उनका दावा है कि दोस्तों और कुछ लोगों के साथ किए गए ब्लाइंड टेस्ट में कई लोग इसे असली कोका-कोला समझ बैठे। उन्होंने दोनों ड्रिंक्स के मास स्पेक्ट्रम ग्राफ भी दिखाए, जिनमें काफी समानता बताई गई है।

 

हालांकि, कोका-कोला कंपनी ने इस दावे पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ऐसे में यह साफ नहीं है कि Lab-Cola वास्तव में कोका-कोला के फॉर्मूले के कितनी करीब है या सिर्फ स्वाद में मिलती-जुलती है।

 

फिलहाल, इस रिसर्च ने एक बार फिर दुनिया के सबसे मशहूर ड्रिंक के रहस्य को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दी है और यह दिखाया है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच किस तरह पुराने रहस्यों को चुनौती दे रही है।