कर्नाटक के बेलगावी में एक 300 साल पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी को साफ करके फिर से ठीक किया गया है जिसकी बनावट ऊपर से देखने पर बिल्कुल शिव लिंग जैसी दिखाई देती है। यह अनोखी बावड़ी बेलगावी-साम्बरा स्टेट हाईवे के पास कंचवीर नगर में स्थित है जो मुतगा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आती है। कई सालों से मिट्टी, झाड़ियों और कचरे के नीचे दबी हुई इस धरोहर को अब पूरी तरह निकाल लिया गया है। इस सुंदर बनावट को देखकर लोग बहुत खुश हैं और प्रशासन अब इसे एक बड़े टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रहा है।
यह बावड़ी लगभग 80 फीट गहरी है और इसमें नीचे जाने के लिए पत्थर की 53 सीढ़ियां बनी हुई हैं। इसकी दीवारें मजबूत काले पत्थरों से बनी हैं जिन्हें जोड़ने के लिए पुराने समय के तरीके जैसे चूना, गुड़ और रेत के घोल का इस्तेमाल किया गया था। इतनी पुरानी होने के बाद भी यह बावड़ी आज भी पूरी तरह मजबूत है। इसके अंदर सुंदर मेहराब और छोटे-छोटे आले यानी दीवार में खाली जगह बनी हैं, जो कन्नड़ और बीजापुर के आदिल शाही समय की कला को दर्शाती हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आदिल शाही काल में ऐसी बावड़ियां बड़े रास्तों पर बनाई जाती थीं ताकि आने-जाने वाले यात्री, सैनिक और जानवर वहां आराम कर सकें और पानी पी सकें। इसमें पानी बाहर निकालने के लिए तीन लेवल का एक खास सिस्टम भी बना हुआ है।
यह भी पढ़ें: इश्क का राज खुलने के डर से 5 साल के मासूम की हत्या, आरोपी युवक गिरफ्तार
कैसे हुई इस गंदी बावड़ी की सफाई?
एक महीने पहले तक इस जगह की हालत बहुत खराब थी। यह बावड़ी पूरी तरह से झाड़ियों, प्लास्टिक के कचरे, शराब की बोतलों और कीचड़ से भरी हुई थी, जिससे वहां बहुत बदबू आती थी। इसे साफ करने के लिए मुतगा ग्राम पंचायत के पूर्व अध्यक्ष उमेश पुरी और गांव के लोगों ने बेलगावी की प्यास फाउंडेशन से मदद मांगी। फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ माधव प्रभु और उनकी टीम ने जगह को देखा और एक महीने का सफाई प्लान बनाया।
इसके बाद नेशनल सर्विस स्कीम (NSS) के वॉलंटियर्स और गांव के लोगों ने मिलकर दिन-रात सफाई का काम किया बड़ी क्रेन मशीनों की मदद से लगभग 15 ट्रैक्टर कीचड़ और कचरा बाहर निकाला गया। टीम ने इसकी पुरानी 60 फीट की गहराई को 15 फीट और गहरा खोदा जिससे यह अब 80 फीट गहरी हो गई है। सफाई होते ही बारिश के मौसम के साथ इसमें से साफ और मीठा पानी निकलने लगा है। इससे पहले साल 2004 में भी इसे साफ करने की कोशिश की गई थी लेकिन तब सफलता नहीं मिली थी।
मीठे पानी की कहानी
इस बावड़ी को किसने और किस राजा ने बनवाया, इसका कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं मिलता है। पास में एक पुराना कंचवीर मंदिर है, लोग इसे कंचवीरप्पा की बावड़ी कहते हैं। गांव के रहने वाले आर के पाटिल और बुजुर्गों ने बताया कि जब देश में अंग्रेजों का राज था। तब कर्नाटक के आजादी के स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों से छिपने और अपनी योजना बनाने के लिए इस बावड़ी के अंदर बने आलों में बैठते थे। नल और बोरवेल आने से पहले कई पीढ़ियों तक इसी बावड़ी से पूरे गांव के लोगों और जानवरों को पीने का पानी मिलता था। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इसका पानी कच्चे नारियल के पानी से भी ज्यादा मीठा होता था।
यह भी पढ़ें: मोबाइल खंगालने पर छिड़ा महाभारत, पत्नी ने दुपट्टे से पति का गला घोंटा
आगे की योजना
इस ऐतिहासिक बावड़ी को देखने के लिए बेलगावी के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद रोशन भी अपने परिवार के साथ आए। उन्होंने इस काम की तारीफ की और कहा कि ऐसी पुरानी चीजों को संभालना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिया कि जिला प्रशासन इस जगह को और सुंदर बनाएगा ताकि यहां टूरिस्ट आ सकें। प्यास फाउंडेशन के डॉ माधव प्रभु ने बताया कि अब वे बावड़ी के बचे हुए काम पूरे करेंगे जैसे टूटे पत्थरों को बदलना और सुरक्षा के लिए चारों तरफ लोहे की बाड़ यानी फेंसिंग लगाना। इस साफ पानी को गांव की बड़ी पानी की टंकी से जोड़ा जाएगा ताकि लोगों के घरों तक पानी पहुंच सके। उमेश पुरी का कहना है कि इस बावड़ी पर और खोज होनी चाहिए ताकि पता चल सके कि इसे असल में किस राजा ने बनवाया था।


