करीब 15 वर्षों बाद शुरू हुई ऋषि अगस्त्य मुनि महाराज की दिवारा यात्रा उत्तराखंड में आस्था और परंपरा का बड़ा केंद्र बन गई है लेकिन यह यात्रा दूसरे ही दिन विवाद और अव्यवस्था की वजह भी बन गई। मकर संक्रांति के अवसर पर निकली डोली जब अगस्त्यमुनि मैदान स्थित गद्दीस्थल तक पहुंची, तो वहां लगे गेट की वजह से आगे नहीं बढ़ सकी। प्रशासन और भक्तों के बीच बने गतिरोध ने धीरे-धीरे आक्रोश का रूप ले लिया, जिससे हालात बेकाबू हो गए।

 

घंटों तक हाईवे जाम रहा, श्रद्धालु परेशान होते रहे और अंत में नाराज भक्तों ने खुद ही गेट तोड़कर डोली को उसके पारंपरिक गद्दीस्थल तक पहुंचाया। यह घटना न सिर्फ धार्मिक भावनाओं और प्रशासनिक फैसलों के टकराव को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि श्रद्धा से जुड़ी परंपराओं को लेकर जरा-सी चूक कैसे बड़े हालात पैदा कर सकती है।

 

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क्या है पूरा मामला?

भक्तों का कहना था कि यह रास्ता पहले से यात्रा मार्ग रहा है लेकिन बाद में यहां निर्माण कर गेट लगा दिया गया। प्रशासन से कई बार गेट हटाने की मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर श्रद्धालु खुद ही गेट तोड़ने में जुट गए। ड्रिल मशीन और हथौड़ों की मदद से करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद शाम करीब चार बजे गेट तोड़ा गया। इसके बाद डोली मैदान में प्रवेश कर पाई, परिक्रमा की और गद्दीस्थल पर विराजमान हुई। वहां ऋषि अगस्त्य मुनि महाराज ने भक्तों का हालचाल जाना और शाम को डोली दोबारा मंदिर की ओर रवाना हुई।

 

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घटना से प्रभावित हुआ यातायात

इस पूरे घटनाक्रम का असर यातायात पर भी पड़ा। डोली के हाईवे पर रुकने से अगस्त्यमुनि बाजार में दोपहर साढ़े बारह बजे से लंबा जाम लग गया। केदारनाथ और रुद्रप्रयाग जाने वाले वाहनों की कतारें लग गईं। जाम में एंबुलेंस भी फंसी रहीं। पुलिस ने हालात संभालने के लिए तिलवाड़ा और गंगानगर की ओर से वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा। गेट टूटने के करीब आधे घंटे बाद जाकर यातायात सामान्य हो सका।

 

इधर, नगर क्षेत्र में दिनभर बिजली और पानी की आपूर्ति भी ठप रही, जिससे लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। ऑनलाइन काम, दुकानों का कारोबार और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित रही। पानी न मिलने से होटल संचालकों और स्थानीय लोगों को दूसरे स्रोतों से पानी भरना पड़ा। देर शाम बिजली तो आ गई लेकिन पानी की समस्या बनी रही।

भक्तों ने लगाए प्रशासन पर आरोप

भक्तों का आरोप है कि प्रशासन ने धार्मिक भावनाओं को नजरअंदाज किया। अगर समय रहते गेट हटाया जाता, तो न जाम लगता और न ही ऐसी स्थिति बनती। लोगों का कहना है कि पिछले एक महीने से यहां निर्माण कार्य के विरोध में आंदोलन चल रहा था और मैदान के समतलीकरण और गेट हटाने की मांग की जा रही थी। प्रशासन की अनदेखी की वजह से श्रद्धालुओं को मजबूरी में गेट तोड़ना पड़ा। वहीं, इस मामले में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित कई धाराओं में 52 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।