उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक अनोखी घटना सामने आई है, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया है। यहां एक गांव में पिछले कई दिनों से एक कुत्ता लगातार हनुमान जी की मूर्ति के चारों ओर घूमता दिखाई दे रहा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जुटने लगी है। कुछ लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं, तो कुछ इसे भक्ति से जोड़कर देख रहे हैं। अब सवाल यह है कि विज्ञान इस घटना को किस नजर से देखता है। क्या यह सचमुच कोई चमत्कार है या इसके पीछे कोई स्वाभाविक वजह हो सकती है?
यह मामला बिजनौर जिले की नगीना तहसील के नंदपुर गांव का है। गांव के एक पुराने हनुमान मंदिर में बताया जा रहा है कि बीते करीब तीन दिनों से एक कुत्ता बिना रुके मूर्ति की परिक्रमा करता नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान वह न तो कुछ खाता दिख रहा है और न ही पानी पीता है। लोग दूर-दराज से मंदिर पहुंच रहे हैं और कुत्ते को देखकर तरह-तरह की धार्मिक मान्यताएं जोड़ रहे हैं। कुछ श्रद्धालु तो उसे भैरव बाबा का रूप मानकर उसकी पूजा तक करने लगे हैं।
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हालांकि, इस घटना को विज्ञान पूरी तरह अलग नजरिए से देखता है। पशु विशेषज्ञों के मुताबिक, कुत्तों के ऐसे व्यवहार के पीछे कई शारीरिक और मानसिक वजह हो सकती हैं। यह जरूरी नहीं कि इसे किसी चमत्कार से जोड़कर ही देखा जाए।
जूमीज क्या होता है?
वैज्ञानिक भाषा में कुत्तों के अचानक तेजी से इधर-उधर दौड़ने या गोल-गोल घूमने को फ्रेनेटिक रैंडम एक्टिविटी पीरियड्स कहा जाता है, जिसे आम भाषा में 'जूमीज' भी कहा जाता है। इसमें कुत्ता अचानक ज्यादा ऊर्जा से भर जाता है और तेजी से चक्कर लगाने लगता है। आम तौर पर यह कुछ मिनटों तक रहता है लेकिन युवा और ज्यादा सक्रिय कुत्तों में यह ज्यादा समय तक भी देखा जा सकता है।
इसके पीछे OCD भी हो सकता है?
इसके अलावा, कुत्तों में भी इंसानों की तरह मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में उन्हें ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर यानी OCD हो जाता है, जिसमें वे बार-बार एक ही हरकत दोहराते हैं। तनाव, डर, अकेलापन या लंबे समय तक बंद रहने की स्थिति में कुत्ता एक ही जगह गोल-गोल घूमता रह सकता है। यह उसका तनाव कम करने का तरीका बन जाता है।
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डिमेंशिया या अल्जाइमर
बुजुर्ग कुत्तों में एक और समस्या देखने को मिलती है, जिसे कैनाइन कॉग्निटिव डिसफंक्शन कहा जाता है। यह इंसानों में होने वाले डिमेंशिया या अल्जाइमर जैसी स्थिति होती है। ऐसे कुत्ते अक्सर भ्रम की स्थिति में रहते हैं और बिना किसी वजह के घंटों एक ही दिशा में घूमते रहते हैं।
कुछ मामलों में यह व्यवहार गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या की ओर भी इशारा करता है। मस्तिष्क में संक्रमण, ट्यूमर या कान के अंदरूनी हिस्से से जुड़ी बीमारी होने पर कुत्ते का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे वह लगातार एक ही दिशा में घूमने लगता है।
एनिमल डॉक्टर्स ने बताई इसकी वजह
पशु चिकित्सकों का कहना है कि अगर कुत्ते को पर्याप्त व्यायाम या मानसिक गतिविधि नहीं मिलती, तो वह अपनी अतिरिक्त ऊर्जा निकालने के लिए इस तरह का व्यवहार कर सकता है। हालांकि, अगर वह चक्कर लगाते समय हांफ रहा हो, घबराया हुआ लगे या आसपास के लोगों को पहचान न पा रहा हो, तो यह किसी परेशानी या बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। साल 2017 में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक कुत्ता शिव मंदिर में रात भर परिक्रमा करता देखा गया था, जो करीब एक सप्ताह तक चला था। इसी तरह 2016 में कर्नाटक के पुट्टेनहल्ली इलाके में एक कुत्ता रोज सुबह से शाम तक मंदिर के चक्कर लगाता रहा, जिससे वहां भीड़ जुटने लगी और यातायात तक प्रभावित हुआ। इन मामलों में भी कोई ठोस वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने नहीं आई थी।
