उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भानुप्रताप जिले के डाकोर गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी पत्नी, जिसका नाम भूरी है की नसबंदी साल 2023 में सरकारी अस्पताल में करवा दी थी। उस समय जिला स्वास्थ्य विभाग ने भूरी की नसबंदी प्रक्रिया को पूरी तरह सफल घोषित कर दिया था।
मगर, नसबंदी करने के ढ़ेढ साल बाद भूरी ने एक बच्चे को जन्म दिया है। यह खबर भूरी और उनके पति भानुप्रताप दोनों के लिए चौंकाने वाली है। इस प्रकरण के बाद स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है। दरअसल, इस गरीब दंपत्ती ने राज्य सरकार के नारे 'हम दो, हमारे दो' को अपनाते हुए परिवार नियोजन का रास्ता चुना था।
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नसबंदी की प्लानिंग फेल
अब बच्चा पैदा होने के बाद दोनों की नसबंदी प्लानिंग फेल हो गई है। उन्होंने इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की है लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। दोनों 2 अप्रैल 2024 से लगातार इसकी शिकायत कर रहे हैं।
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भूरी-भानुप्रताप के पहले से दो बच्चे
भूरी और भानुप्रताप ने आर्थिक लाचारी का हवाला देते अपने बच्चे के पालन-पोषण के लिए सरकार से आर्थिक मदद और मुआवजे की गुहार लगाई है। उनके दो बच्चे 6 साल का अमित और 4 साल का वृषभान पहले से हैं। भानुप्रताप राजमिस्त्री का काम करते है।
हालांकि, इस घटना के बाद से जालौन जिले के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और सरकारी दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
