राजस्थान के धोरों से एक अद्भुत वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक कलाकार 1500 साल पुराने वाद्य यंत्र मोरचंग को बजाते नजर आ रहे हैं। यह छोटा सा धातु का यंत्र जो कभी चरवाहों की पहचान हुआ करता था, अब सोशल मीडिया की मदद से पूरी दुनिया में मशहूर हो रहा है। अपनी सादगी और अनोखी गूंज के कारण यह वीडियो लोगों का दिल जीत रहा है और हमारी लुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान दे रहा है। राजस्थान की 'लंगा' और 'मांगणियार' जातियों की इस अनमोल विरासत को एक साधारण से दिखने वाले बुजुर्ग ने जिस महारत से पेश किया है, उसने न केवल जैसलमेर की लोक कला को फिर से जिंदा कर दिया है, बल्कि पूरी दुनिया को भारत की इस पुरानी संस्कृति का दीवाना बना दिया है।
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क्या है मोरचंग और उसकी खासियत?
मोरचंग लोहे या पीतल से बना एक छोटा सा यंत्र है जिसे जॉ हार्प भी कहा जाता है। यह आकार में इतना छोटा होता है कि मुट्ठी में समा जाए। इसकी आवाज बहुत प्रभावशाली होती है जिसे पुराने समय में राजस्थान के रेगिस्तान में ऊंट और भेड़ चराने वाले लोग अपना अकेलापन दूर करने के लिए इसे बजाया करते थे।
बजाने का तरीका
इसे बजाने की कला बहुत खास है। कलाकार इसे अपने दांतों के बीच दबाकर रखता है और अपनी उंगलियों से इसकी धातु की पत्ती को हिलाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें कोई बटन या तार नहीं होते कलाकार अपने मुंह की हवा और सांसों के दबाव से अलग-अलग धुनें और कंपन की निकलता है।
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सोशल मीडिया पर क्यों छाया वीडियो?
इस वीडियो को देवांशु अलीजार नाम के यूजर ने शेयर किया है। वीडियो में रेगिस्तान की शांति और मोरचंग की सुरीली आवाज है। लोग इस बात से हैरान हैं कि कैसे एक बुजुर्ग कलाकार ने इस प्राचीन कला को आज के दौर में भी संभाल कर रखा है। देखते ही देखते यह वीडियो लाखों लोगों तक पहुंच गया और लोग इसे भारतीय संगीत का असली खजाना बता रहे हैं।
