logo

ट्रेंडिंग:

डील तो हो गई, EU और भारत को कितना फायदा होगा? 5 प्वाइंट में समझिए

लंबे समय के इंतजार के बाद यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच समझौता हो गया है। उम्मीद है कि इससे दोनों देशों का कारोबार 200 अरब डॉलर को भी पार कर जाएगा।

pm modi with european union leaders

यूरोपियन यूनियन के नेताओं के साथ पीएम मोदी, Photo Credit: PTI

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Budget2

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बहु प्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों तरफ के कारोबारियों में उत्साह है। EU के 27 देशों और भारत के तमाम कारोबारियों को उम्मीद है कि उनके लिए इन देशों के मार्केट में बेहतर विकल्प बनेंगे और इसका फायदा सभी देशों के कारोबारियों से लेकर आम लोगों तक को होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि भारत के ग्राहकों के लिए कार सस्ती हो जाएगी। वहीं, भारत के टेक्सटाइल, केमिकल और फुटवियर कारोबारियों के लिए यूरोप का मार्केट तगड़े मुनाफे वाला साबित होगा। भारत के 93 पर्सेंट उत्पादों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा जबकि बाकी के उत्पादों पर लगने वाले टैक्स में भी कटौती होगी।

 

दो दशकों से ज्यादा समय तक चली इस बातचीत के बाद हुए इस समझौते को अब तक का सबसे बड़ा समझौता कहा गया है। एक अधिकारी ने बताया कि गाड़ियों और इस्पात को छोड़कर भारत के लगभग सभी सामानों (93 प्रतिशत से अधिक) को यूरोपीय यूनियन में बिना किसी टैक्स के एंट्री मिलेगी। बाकी 6 प्रतिशत से ज्यादा चीजों के लिए भारतीय निर्यातकों को शुल्क में कटौती और कोटा-बेस्ड टैक्स डिस्काउंट (जैसे ऑटोमोबाइल के लिए) जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

भारत कितनी छूट देगा?

 

यूरोपियन यूनियन अब इस FTA के लागू होने के साथ ही पहले दिन भारत के 90 प्रतिशत सामानों पर आयात शुल्क खत्म कर देगा। यह समझौता अगले साल की शुरुआत में लागू होने की उम्मीद है। बताया गया है कि बाकी की चीजों पर लगने वाले टैक्स को अगले 7 साल में चरण बद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा। इस पर एक अधिकारी ने कहा, 'इस तरह से EU भारत को कुल व्यापार के 99.5 प्रतिशत हिस्से पर रियायतें दे रहा है।'

 

यह भी पढ़ें: भाषण के बीच में अपना पासपोर्ट क्यों दिखाने लगे यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष?

 

दूसरी ओर, भारत ऐसे इंतजाम करेगा कि अगले 10 साल में यूरोपियन यूनियन के 93 प्रतिशत सामान भारत में ड्यूटी फ्री हो जाएं। भारत इस समझौते को लागू करने के पहले दिन यूरोपीय वस्तुओं के केवल 30 प्रतिशत हिस्से पर से ड्यूटी हटाएगा। बता दें कि इस डील के तहत भारत यूरोपीय यूनियन को व्यापार मूल्य के 3.7 प्रतिशत हिस्से पर ड्यूटी पर राहत और कोटा बेस्ड डिस्काउंट भी दे रहा है। कुल मिलाकर, भारत EU को व्यापार मूल्य के 97.5 प्रतिशत पर ड्यूटी डिस्काउंट दे रहा है।

 

 

 

किन चीजों के दाम कम होंगे?

 

जो प्रोडक्ट अब बिना कोई ड्यूटी (एक तरह का टैक्स) दिए यूरोपीय मार्केट में पहुंच जाएंगे, उनमें भारत के टेक्सटाइल्स, समुद्री उत्पाद, केमिकल, प्लास्टिक, रबर, चमड़ा और जूते-चप्पल शामिल हैं। इसके अलावा बेसिक मेटल, रत्न और आभूषण, फर्नीचर, खिलौने और खेल के सामान को भी यह लाभ मिलेगा। इस समय इन सेक्टर के उत्पादों पर यूरोपीय संघ में 0 से 26 प्रतिशत तक ड्यूटी लगती है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई चीज भारत से यूरोप गई और उसकी कीमत यहां 100 रुपये हुई तो 26 प्रतिशत ड्यूटी के साथ उसकी कीमत 126 रुपये हो जाती। अब ड्यूटी खत्म होने से यह सामान 100 रुपये में ही उपलब्ध हो जाएगा।

 

यह भी पढ़ें: 27 देश, 17 पर्सेंट निर्यात, भारत-यूरोप की डील से कितना फायदा होने वाला है?

 

भारत ने इसी FTA के तहत EU से आने वाली चीजों के लिए भी उदारता दिखाई है। इस पर एक अधिकारी ने कहा, 'हमारे मामले में, भारत 10 साल में EU के लिए आयात शुल्क को घटाकर शून्य कर देगा। शुरुआत में शून्य तक की कमी सीमित है। समझौते के लागू होने पर हम अपने व्यापार मूल्य के 30 प्रतिशत तक की कटौती करेंगे लेकिन धीरे-धीरे, हम अपने कुल द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के 93 प्रतिशत उत्पादों पर शून्य तक पहुंच जाएंगे।'

सर्विस सेक्टर में क्या बदलेगा?

 

सर्विस सेक्टर के मामले में यूरोपियन यूनियन ने भारत को अपने अब तक के सबसे अच्छे प्रस्तावों में से एक दिया है। उसने 155 सब-सेक्टर में से 144 को भारत के लिए खोल दिया है जबकि भारत यूरोपियन यूनियन के लिए 102 सब-सेक्टर खोल रहा है। इस पर अधिकारी ने कहा है कि इसके अलावा छात्रों की आवाजाही को लेकर भी कई बातें हुई हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे पास यूरोपियन यूनियन से पढ़ाई के बाद वर्क वीजा पर भी कुछ फैसले हुए हैं।'

 

 

 

 

गुड्स एंड सर्विसेज के व्यापार के अलावा, एफटीए में डिजिटल व्यापार, स्वच्छता और पादप स्वच्छता उपायों, व्यापार में तकनीकी बाधाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर भी बातें शामिल हैं। इसमें ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और सरकारी खरीद पर कोई चैप्टर नहीं है। बता दें कि यूरोपियन यूनियन में औसत ड्यूटी पहले से ही कम है। यह लगभग 3.8 प्रतिशत है और व्यापार सौदे के तहत उन्हें भारत के लिए घटाकर 0.1 प्रतिशत कर दिया जाएगा। जिन कुछ क्षेत्रों में ड्यूटी ज्यादा है, उनमें समुद्री उत्पाद, केमिकल, प्लास्टिक और रबर शामिल हैं। इन सभी पर यूरोपियन यूनियन इस समझौते के तहत भारत के लिए ड्यूटी खत्म कर देगा। साल 2024 में इन सेक्टर में भारत का निर्यात कुल 35 अरब डॉलर था।

ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए क्या होगा?

 

ऑटोमोबाइल सेक्टर में दोनों पक्षों ने कोटा बेस्ड कंसेशन की बात की है क्योंकि इस सेक्टर में यूरोपियन यूनियन की मांग बहुत आक्रामक है। भारत का ऑटो सेक्टर काफी हद तक छोटी कारों (10 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक) के दबदबे वाला है। इसमें यूरोपियन यूनियन की कंपनियों की ज्यादा रुचि नहीं है। इस पर अधिकारी ने कहा, 'हमने तय किया है कि जो कारें इस देश में 25 लाख रुपये से कम में बिकने वाली हैं, EU उन कारों का भारत में निर्यात नहीं करेगा। वे इनका निर्माण यहां कर सकते हैं।'

 

यह भी पढ़ें: UGC विरोध का नया तरीका, अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं को चूड़ी भेज रहे BJP नेता

 

दूसरी ओर 25 लाख रुपये से ऊपर भारत का बाजार सीमित है लेकिन EU की इसमें ज्यादा है क्योंकि वे इस सेक्शन में अच्छी कार बनाते हैं। इस समय ऑटोमोबाइल पर भारत का आयात शुल्क 66 प्रतिशत से 125 प्रतिशत के बीच है। नए समझौते के तहत भारत तय कोटे के अलावा ड्यूटी में कोई और कटौती नहीं करेगा। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए भारत का कोटा इस समझौते के पांचवें साल से शुरू होगा। EV के लिए ड्यूटी में कटौती अलग-अलग सेक्शन में अलग-अलग होगी। इस पर अधिकारी ने कहा, 'पहले साल में कुछ सेक्शन में यह 35 पर्सेंट और कुछ में 30 पर्सेंट होगी। फिर यह धीरे-धीरे नीचे जाएगी।'

खाने और पीने वाली चीजों पर क्या असर होगा?

 

भारत डेयरी (पनीर सहित), सोया मील और अनाज के सेक्टर में ड्यूटी पर कोई रियायत नहीं देगा। यूरोपियन यूनियन भी अपने चीनी, बीफ, मांस और पोल्ट्री सेक्टर की रक्षा कर रहा है और वह भी इसमें कोई रियायत नहीं देगा। भारत को यूरोपियन यूनियन में 'टेबल ग्रेप्स' (खाने वाले अंगूर) के लिए कोटा बेस्ड रियायत मिली है। यूरोपियन यूनियन सालाना लगभग 1.4 अरब डॉलर के टेबल ग्रेप्स का आयात करता है।

 

इस पर अधिकारी ने कहा, 'हमें लगभग 10 करोड़ डॉलर यानी 85,000 टन अंगूरों के लिए ड्यूटी फ्री मार्केट मिल रहा है।' भारत 7 साल में ड्यूटी धीरे-धीरे कम करेगा। महंगी वाइन पर लगने वाले ड्यूटी भी सात साल में 150 प्रतिशत से गिरकर 20 प्रतिशत हो जाएगा। दूसरी ओर 2.5 यूरो से कम की वाइन के लिए कोई रियायत नहीं होगी। मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, इस समय दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर है। समझौते के लागू होने पर तीन से चार वर्षों के भीतर इसके 200 अरब डॉलर को पार करने की उम्मीद है। इसी तरह सेवाओं का व्यापार, जो वर्तमान में लगभग 80-85 अरब डॉलर का है, बढ़कर 125 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap