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'मेरी बेटी पूरे बंगाल में कमल खिलाएगी', जीत पर बोलीं RG केस की पीड़िता की मां

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पानीहाटी सीट से BJP उम्मीदवार और आरजी कर कांड की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने अपनी जीत को न्याय की लड़ाई बताया है।

Panihati mother of RG Kar victim Ratna Debnath

पानीहाटी से BJP उम्मीदवार और RG Kar पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ, Photo Credit: ANI

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में पानीहाटी सीट पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस की पीड़िता की मां और भारतीय जनता पार्टी (BJP) उम्मीदवार रत्ना देबनाथ ने यहां से चुनाव लड़ा है। रुझानों में शुरू से ही BJP बढ़त बनाती नजर आ रही थी। इसी बीच रत्ना देबनाथ ने बयान देते हुए कहा, 'मेरी बेटी पूरे बंगाल में कमल खिलाएगी।'

 

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, पानीहाटी निर्वाचन क्षेत्र में रत्ना देबनाथ 20,463 वोटों के अंतर से आगे चल रही हैं। इस सीट पर TMC के उम्मीदवार तीर्थंकर घोष पीछे चल रहे हैं। आठवें दौर के अंत तक, रत्ना देबनाथ ने 56,000 से अधिक वोट हासिल कर लिए थे।

 

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रत्ना देबनाथ का बयान

ANI से बातचीत के दौरान रत्ना देबनाथ भावुक दिखीं। उन्होंने कहा, 'मेरी बेटी अब सिर्फ मेरी नहीं रही, आज पूरी दुनिया पानीहाटी की तरफ उम्मीद से देख रही है। मेरी बेटी निश्चित रूप से पूरे बंगाल में कमल खिलाएगी और यह वोट उसी न्याय के मकसद के लिए था।' उन्होंने संकल्प दोहराया कि यह लड़ाई केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपनी आखिरी सांस तक अपनी बेटी के लिए न्यायिक संघर्ष जारी रखेंगी। बता दें कि रत्ना चुनाव के साथ-साथ कानूनी कार्यवाही भी खुद देख रही हैं।

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पानीहाटी की यह जीत ममता बनर्जी के चौथे कार्यकाल की राह में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हुई है। रत्ना देबनाथ ने अपनी चुनावी जंग को ममता बनाम मोदी के बजाय महिला सुरक्षा बनाम सत्ता की अनदेखी के नैरेटिव पर लड़ा। उनके अभियान ने शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं के बीच सुरक्षा और जवाबदेही के मुद्दे को सबसे ऊपर ला दिया। इसी का नतीजा रहा कि TMC के पारंपरिक गढ़ में मतदाताओं ने इस बार बदलाव और इंसाफ को चुना।

TMC की सीट थी पानीहाटी

पानीहाटी सीट, जो साल 2011 से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अभेद्य गढ़ रही है, वहां रत्ना देबनाथ की इस लहर ने सत्ताधारी दल के 15 साल के दबदबे को ध्वस्त कर दिया है। यह जीत केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि उस नैतिक आक्रोश का प्रतीक बनकर उभरी है, जिसने आरजी कर कांड के बाद पूरे बंगाल को झकझोर कर रख दिया था।


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