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RG कर पीड़िता की मां को पानीहाटी से मिला टिकट, क्या है BJP का प्लान?

BJP ने पश्चिम बंगाल की पानीहाटी विधानसभा सीट से आरजी कर केस की पीड़िता की मां को टिकट देकर पूरे नॉर्थ 24 परगना जिले की राजनीति में खलबली मचाने की कोशिश की है।

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BJP उम्मीदवार रत्ना देबनाथ, Photo Credit: Social Media

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पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा में जो नाम है, वह है RG कर रेप केस की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ का। उन्हें उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी विधानसभा सीट से बीजेपी का उम्मीदवार बनाया गया है। यह सीट दमदम लोकसभा क्षेत्र में आती है जहां से तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय लगातार चार बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं। जिस पानीहाटी सीट से रत्ना देबनाथ को टिकट मिला है, वह पिछले तीन चुनाव से सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कब्जे में है और उसकी यहां मजबूत पकड़ भी मानी जाती है।

 

चुनाव का टिकट मिलने पर रत्ना देबनाथ ने कहा है कि यह उनकी जीत है और यह जीत पानीहाटी के लोगों की है। रत्ना देबनाथ ने ममता बनर्जी ने उस बयान को याद करके भी उन पर हमला बोला है। दरअसल, ममता बनर्जी ने एक बार कहा था कि महिलाओं को बाहर जाने की जरूरत ही क्या है।

 

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रत्ना देबनाथ को जिस सीट से टिकट दिया गया है वह उत्तर 24 परगना जिले में आती है। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में इस जिले की कुल 33 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 5 सीटों पर ही बीजेपी को जीत मिली थी। 28 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव जीता था। अब बीजेपी की पूरी कोशिश है कि इस जिले में वह खुद को मजबूत करके अपनी सीटें बढ़ा सके। यही वजह है कि ममता बनर्जी के अजेंडे को काउंटर करने के लिए बीजेपी ने रत्ना देबनाथ को टिकट दिया है ताकि पूरे जिले में ममता बनर्जी की सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा सके।

क्या है पानीहाटी विधानसभा सीट का समीकरण?

 

इस सीट पर लंबे समय तक लेफ्ट का कब्जा था और एकाध बार ही कांग्रेस यहां से चुनाव जीत पाई थी। 1996 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते निर्मल घोष बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और 2001 का चुनाव उसी के टिकट पर जीते। हालांकि, 2006 के चुनाव में सीपीआई के गोपाल कृष्ण भट्टाचार्य ने यहां से जीत हासिल कर ली। 2011 से लेकर अब तक लगातार तीन बार निर्मल घोष ही यहां से चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस बार टीएमसी ने उनका टिकट उन्हीं के बेटे तीर्थंकर घोष को दे दिया। 

 

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पिछले कुछ चुनावों का देखें तो यहां का मुकाबला अब BJP vs TMC हो चुका है। 2016 में कांग्रेस के सन्मय बंदोपाध्याय ने जरूर कड़ी टक्कर दी थी लेकिन निर्मल घोष तब भी जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे। उनकी जीत का अंतर सिर्फ 3030 वोटों का था। यही सन्मय बंदोपाध्याय 2021 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन लगभग 25 हजार वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। इस बार बीजेपी ने उनकी जगह पर रत्ना देबनाथ को टिकट दिया है।


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