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'मुस्लिमों की छवि को नहीं किया खराब', 'हक' के विवाद पर इमरान हाशमी ने दी सफाई

इमरान हाशमी अपनी फिल्म 'हक' को लेकर चर्चा में हैं। यह फिल्म 7 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म की आलोचना करने वालों को इमरान ने जवाब दिया है।

Emraan Hashmi

इमरान हाशमी, Photo Credit: Emraan Insta Handle

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इमरान हाशमी और यामी गौतम अपनी अपकमिंग फिल्म 'हक' को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों का पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है। फिल्म की कहानी शाह बानो केस पर आधारित है। इस केस के जरिए मुसलिम महिला ने तलाक के बाद अपना हक मांगा था। फिल्म में यामी गौतम शाह बानो का किरदार निभा रही हैं। यह फिल्म 7 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

 

फिल्म का ट्रेलर लॉन्च हो चुका है। एक तरफ जहां लोग फिल्म के ट्रेलर की तारीफ कर रहे हैं तो दूसरी तरफ कुछ लोग आलोचना कर रहे हैं। फिल्म के प्रमोशन के लिए इमरान और यामी लगातार इंटरव्यूज दे रहे हैं।

 

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फिल्म में किसी एक समुदाय पर नहीं उठाई गई उंगली

इमरान हाशमी ने लेटेस्ट इंटरव्यू में बताया, 'फिल्म में किसी भी समुदाय की तरफ उंगली नहीं उठाई है। मैंने फिल्म करने से पहले स्क्रिप्ट पढ़ी थी। मैंने इसे क्रिएटिव ऐक्टर के तौर पर देखा लेकिन पहली बार अपने करियर में देखा कि मेरे सुमदाय के प्रति संवेदनशीलता भी है। हमने फिल्म को संतुलित तरीके से बनाया है। किसी भी समुदाय के लोगों की तरफ उंगली नहीं उठाई गई है।'

 

इमरान ने आगे कहा, 'मुझे नहीं पता कि लोग क्या कहेंगे लेकिन यह एक आजाद मुस्लिम होने के नाते कह सकता हूं कि फिल्म में जो विचार धारा दिखाई गई है उससे मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं एक मुस्लिम हूं और मैंने प्रवीन से शादी की है जो कि हिंदू है। मेरे परिवार में मेरे बेटे पूजा भी करते हैं और नमाज भी पढ़ते हैं। यह मेरी सेक्युलर परवरिश है। मैंने उस नजरिया फिल्म को देखा है। सभी का फिल्म देखने का अपना नजरिया होगा। हर किसी की अपनी परवरिश, धार्मिक विचार, वातावरण और नजरिया होगा।'

 

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क्या है शाह बानो केस?

शाह बानो बेगम ने अपने पति मोहम्मद अहमद खान के खिलाफ कोर्ट में तालाक के बाद गुजारा भत्ता देने का केस किया था। भारत में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा की लड़ाई में एक कानूनी मील का पत्थर साबित हुआ था। 1978 में 62 साल की शाह बानो ने इंदौर अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका में शाह बानो ने अपने अमीर और  मशहूर वकील मोहम्मद अहमद खान से गुजारा भत्ता मांगा था।

 

दोनों की शादी साल1932 में हुई थी और उनके 5 बच्चे थे। 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था कि शाह बानो धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता की हकदार थी। हालांकि एक साल बाद राजीव गांधी सरकार अदालत के फैसले को रद्द करने के लिए कानून लेकर आई थी।

 

 


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