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सीरिया से लौटे पहले भारतीय ने सुनाई दास्तान, कहा- 'धन्यवाद सरकार'

दूसरे देशों के लोगों की पीड़ा और परेशानियों को देखते हुए रवि भूषण ने महसूस किया कि भारत सरकार जो बचाने का प्रयास कर रही थी वह बहुत ही अच्छे थे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। सोर्स- एक्स

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बशर अल-असद परिवार के दशकों पुराने शासन का अंत हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) समूह के नेतृत्व में विद्रोही गुटों ने कर दिया। लेकिन इसके साथ ही देश के भविष्य पर कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं। सीरिया में सत्ता तख्तापलट के बाद उथल-पुथल मची हुई है। 

इन सबके बीच सीरिया में सैकड़ों भारतीय भी फंसे हुए हैं। भारत सरकार के प्रयासों से 75 भारतीय स्वदेश लौट रहे हैं। सीरिया से स्वदेश लौटने वाले 75 भारतीयों में से पहले शख्स रवि भूषण हैं, जो गाजियाबाद के रहने वाले हैं। उन्होंने दमिश्क की भयावह स्थिति का जिक्र किया और सभी की मदद के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया।

सरकार ने हर एक व्यक्ति से संपर्क किया

रवि भूषण ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों को वापस घर लाने में मदद के लिए क्या-क्या प्रयास किए। उन्होंने कहा, 'भारत ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है और हम सीरिया से लोगों को बचाने वाली पहली टीम का हिस्सा हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि उन्होंने हर एक व्यक्ति से संपर्क किया। वे उनका उत्साहवर्धन भी कर रहे थे और उनसे पूछ रहे थे कि क्या वे ठीक हैं।'

रवि भूषण ने बताया कि सीरियाई एंबेसी उन्हें हर घंटे मैसेज के जरिए यह जानकारी देता रहा कि बचाव अभियान के संबंध में वे कब और क्या करने जा रहे हैं।

अधिकारी सबका प्रबंध करते थे

उन्होंने कहा कि अगर किसी को खाना या किसी भी चीज को लेकर कोई समस्या होती थी तो अधिकारी उसका प्रबंध करते थे। हम भारत सरकार, लेबनान और सीरिया दोनों जगहों पर स्थित भारतीय दूतावासों के बहुत आभारी हैं। 

दूसरों की पीड़ा देखकर परेशान हुए

वहीं, दूसरे देशों के लोगों की पीड़ा और परेशानियों को देखते हुए रवि भूषण ने महसूस किया कि भारत सरकार जो बचाने का प्रयास कर रही थी वह बहुत ही अच्छे थे। उन्होंने आगे कहा, 'हमने देखा कि दूसरे देशों के लोग कैसे पीड़ित थे। हमने छोटे बच्चों और महिलाओं को देखा कि कैसे उन्हें 4-5 डिग्री तापमान में 10-12 घंटे से अधिक समय तक बाहर बैठाया गया। यह सही में डरावना था। लेकिन भारत सरकार की वजह से हमें ऐसी किसी भी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।'

बता दें कि हयात तहरीर अल-शाम के नेतृत्व में सीरियाई विद्रोहियों ने 27 नवंबर को देश में हमला शुरू कर दिया। इसके बाद विद्रोहियों ने दमिश्क पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद राष्ट्रपति बशर अल-असद को सीरिया छोड़कर भागना पड़ा।

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