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थाईलैंड-कंबोडिया संघर्ष: भारत ने अपने नागरिकों के लिए जारी की अडवाइजरी

थाईलैंड और उसके पड़ोसी देश कंबोडिया के सैनिकों के बीच 2 दिनों से खूनी झड़प हो रही है। इस बीच भारतीय दूतावास ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है।

cambodias attack on thailand

थाईलैंड पर हमले के बाद शेल्टर में लोग, Photo Credit- PTI

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थाईलैंड और कंबोडिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे थाइलैंड और कंबोडिया बॉर्डर पर कुछ इलाकों में न जाएं। थाईलैंड में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 7 राज्यों की एक लिस्ट पोस्ट की है और भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे इन जगहों पर न जाएं।

 

जिन राज्यों की लिस्ट जारी की गई है, उनमें थाईलैंड के उबोन राचाथानी, सुरिन, सिसाकेत, बुरिराम, सा केओ, चंथाबुरी और त्रात का नाम शामिल है। भारतीय दूतावास ने लोगों से ज्यादा जानकारी के लिए लगातार थाईलैंड टूरिज्म ऑथोरिटी से संपर्क में रहने की अपील की है। थाईलैंड की टूरिज्म ऑथोरिटी ने बताया है कि थाई आर्मी ने कई टूरिस्ट स्पॉट्स के नजदीक बॉर्डर बंद किए हैं। थाईलैंड के इंटीरियर मिनिस्टर के मुताबिक कंबोडिया से तनाव के बीच प्रभावित इलाकों से अभी तक 1 लाख से ज्यादा लोगों को निकाला गया है।

 

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अब तक 15 की मौत

कंबोडिया से तनाव के बीच थाईलैंड में अब तक 15 लोगों की मौत हुई है। जिसमें 1 सैनिक और 14 आम लोग हैं। 46 लोग घायल हुए हैं। वहीं, अभी तक कंबोडिया ने मृतकों या घायलों की कोई आधिकारिक संख्या नहीं बताई है मीडिया रिपोर्ट्स में कंबोडिया के 1 शख्स के मारे जाने का दावा है।

 

थाईलैंड के लीडर एक्टिंग प्राइम मिनिस्टर फुमथम वेचायाचाय ने कहा है कि दोनों देश जंग की तरफ बढ़ सकते हैं। थाईलैंड ने कंबोडिया पर सिविलियन इलाकों पर हमला करने के भी आरोप लगाए हैं। वहीं, कंबोडिया ने थाईलैंड पर क्लस्टर बम इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

 

कैसे शुरू हुआ तनाव?

थाईलैंड और कंबोडिया में हाल ही के विवाद की शुरुआत बीते 2 महीने पहले मई में शुरू हुई। दरअसल, 28 मई को एमरॉल्ड ट्राइंगल पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें एक कंबोडियाई सैनिक मारा गया था। 

 

इसके बाद 1 जुलाई को थाईलैंड में सरकार गिरा दी गई और प्रधानमंत्री शिनावात्रा को बर्खास्त कर दिया गया। उन्हें पद से हटाए जाने के पीछे भी कंबोडिया के साथ विवाद रहा। कुछ विरोधी सांसदों ने उन पर कंबोडिया के लीडर हुन सेन से फोन पर बात करने और उन्हें 'अंकल' कहकर पुकारने के आरोप लगाए जबकि थाईलैंड का कंबोडिया के साथ विवाद है।

 

23 जुलाई को एक थाई सैनिक कंबोडिया बॉर्डर के पास एक लैंडमाइन धमाके में घायल हो गया। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहां से अपने राजदूत वापस बुला लिए और बॉर्डर पर झड़पें शुरू हो गई।

 

यह भी पढ़ें: ता मुएन थॉम और प्रीह विहियर: मंदिर जिनके लिए भिड़े थाईलैंड-कंबोडिया

 

इस लड़ाई की वजह है फ्रांस?

एमरॉल्ड ट्राइएंगल वो जगह है, जहां थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस की सीमाएं मिलती हैं। थाईलैंड और कंबोडिया दोनों ही इस इलाके पर दावा करते हैं। इन दोनों देशों के बीच साझेदारी और दुश्मनी दोनों है। दोनों लगभग 800 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं।

 

बैंकॉक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर चुलालॉन्गकोर्न बताते हैं कि दोनों के बीच विवाद की वजह सालों पहले हुआ सीमा का बंटवारा है, जिसे फ्रांस ने करवाया था। दरअसल, कंबोडिया 1863 से 1953 तक फ्रांस की कॉलोनी रहा था। इस बीच 1907 में फ्रांस ने इसकी सीमाएं खींची और मैप बनाया। 

 

थाईलैंड को लगता है कि फ्रांस ने उनके हिस्से की जमीन छीनकर कंबोडिया को दे दी। वहीं, कंबोडिया को लगता है कि वह जमीन सदियों से उनकी संस्कृति का हिस्सा है इसलिए उस पर उन्हीं का हक है।

 

कंबोडिया-थाईलैंड बॉर्डर पर कई मंदिर हैं, इनमें हिंदू शैली पर बने अहम मंदिर जैसे ता मुएन थॉम मंदिर और प्रीह विहियर मंदिर शामिल हैं। 1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इन्हें कंबोडिया की संपत्ति बताया था फिर भी विवाद जारी रहा। 

 

2008-2011 के बीच भी हुई थीं खूनी झड़पें

2008 में थाईलैंड-कंबोडिया के बीच सीमा विवाद खून-खराबे में बदला। दरअसल, कंबोडिया ने विवादित सीमा पर एक मंदिर को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल कराने की कोशिश की थी। मंदिर को मान्यता मिलने के बाद दोनों देशों की सेनाओं में फिर झड़पें शुरू हो गईं और 2011 में तो हालात इतने बिगड़ गए कि हजारों लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए।

 

दोनों देशों के बीच 7 दिन झड़पों के बाद सीजफायर हुआ। इस दौरान 15 लोग मारे गए थे। इसी साल संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) ने दोनों देशों को एक डिमिलिट्राइज्ड जोन बनाने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच का विवाद नहीं सुलझा।

 

 


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