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हफ्ते में 4 दिन काम, बुधवार को भी छुट्टी, श्रीलंका में दिख रहा गैस की कमी का असर

मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच श्रीलंका में तेल संकट गहरा गया है। सरकार ने तेल संकट से निपटने के लिए बुधवार को सार्वजनिक छुट्टी घोषित कर दी है। अब हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही वर्किंग होंगे।

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सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit: SORA

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अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है। युद्ध के कारण पूरी दुनिया की तेल सप्लाई पर असर पड़ रहा है, जिसके चलते तेज की कीमतों में उछाल और कई जगहों पर भारी कमी भी देखने को मिल रही है।  इस बीच सोमवार को श्रीलंका ने बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया और अब हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही काम होगा। यह फैसला मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण पैदा हुए तेल संकट से निपटने के लिए लिया गया है। अभी तक श्रीलंका में 5 दिन वर्किंग होते थे लेकिन अब सिर्फ 4 दिन काम करना पड़ेगा। 

 

श्रीलंका सरकार के एक सीनियर अधिकारी प्रभात चंद्रकीर्ति ने कहा कि 18 मार्च से हर बुधवार को सार्वजनिक छुट्टी घोषित करने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि यह नियम स्कूलों, यूनिवर्सिटी और न्यायपालिका पर लागू होगा। हालांकि, हेल्थ केयर, पोर्ट्स,वाटर सप्लाई और सीमा शुल्क विभागों पर यह नियम लागू नहीं होगा। श्रीलंका सरकार आने वाले दिनों में इस तरह के अन्य कदम भी उठा सकती है। 

 

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तेल की खपत कम करने की अपील

 

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में तेल संकट आ गया है। सरकार ने कहा कि परिवहन में इस्तेमाल होने वाले तेल की खपत कम करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। इसके साथ ही सरकार ने लोगों से अपील की है कि  पेट्रोल-डीजल का इस्‍तेमाल संभल कर करें।

प्राइवेट सेक्टर में भी लागू होगा फैसला?

तेल की कमी के कारण सरकार ने चार दिन वर्किंग को सिर्फ सराकरी सेक्टर तक ही सीमित नहीं रखा है। सरकार ने प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की है  कि वे ऊर्जा बचाने के लिए अपने वर्किंग डेज कम करने या वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्पों पर विचार करें। हालांकि, देश की व्यवस्था न ठप हो, इसके लिए कुछ विभागों जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, बंदरगाह, जल आपूर्ति और सीमा शुल्क को इस कटौती से बाहर रखा गया है।  

 

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QR कोड से मिलेगा तेल

श्रीलंका में तेल की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकात है कि सरकार अब तेल की सप्लाई पर निगरानी रखने लगी है। सरकार ने तेल के वितरण पर कड़ा पहरा लगा दिया है। तेल की निगरानी बढ़ाते हुए डिजिटल राशनिंग सिस्टम लागू कर दिया गया है। हर एक गाड़ी के लिए एक हफ्ते का कोटा तय कर दिया गया है। उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंप पर QR कोड दिखाना होगा। यह फैसला कालाबाजारी को रोकने के लिए और सीमित स्टॉक में ज्यादा लोगों को सुविधा देने के लिए लिया गया है। 

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