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न्यूजीलैंड में ड्रग सरगना निकला इंदिरा गांधी के हत्यारे का भतीजा, 22 साल की सजा

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे के भतीजे बलतेज सिंह को न्यूजीलैंड में 700 किलो से ज्यादा ड्रग्स तस्करी के मामले में 22 साल की सजा सुनाई गई है।

Indira Gandhi assassin nephew in drug smuggling

सतवंत सिंह का भतीजा बलतेज सिंह। (Photo Credit: Social Media)

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न्यूजीलैंड के न्यायिक इतिहास में नशे की सबसे बड़ी खेप की तस्करी करने वाले मास्टरमाइंड की पहचान आखिरकार सार्वजनिक हो गई है। ड्रग्स के काले कारोबार का यह सरगना कोई और नहीं बल्कि भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह का भतीजा बलतेज सिंह है। बलतेज लंबे समय से न्यूजीलैंड की अदालतों में इस बात की कानूनी लड़ाई लड़ रहा था कि उसका नाम और पारिवारिक पृष्ठभूमि दुनिया के सामने न लाई जाए लेकिन अब उसकी यह कोशिश पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

 

बलतेज सिंह को न्यूजीलैंड में 700 किलोग्राम से अधिक मेथामफेटामाइन (नशीला पदार्थ) की तस्करी के जुर्म में 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यह न्यूजीलैंड के इतिहास में अब तक जब्त की गई ड्रग्स की सबसे बड़ी मात्रा है। शुरुआती दौर में बलतेज ने नाम गोपनीय रखने के अधिकार का इस्तेमाल कर अपनी पहचान बचा ली थी लेकिन न्यूजीलैंड सरकार और स्थानीय मीडिया के कड़े विरोध के बाद अब वह बेनकाब हो गया है।

 

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कोर्ट ने खारिज की नाम छुपाने की दलील

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलतेज सिंह सतवंत सिंह का भतीजा है। जो 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या करने वाले सुरक्षाकर्मियों में से एक था। इस कनेक्शन ने इस केस को और भी सेंसिटिव बना दिया है। बलतेज सिंह ने अदालत में दलील दी थी कि यदि उसकी पहचान उजागर की गई तो उसके परिवार को गंभीर खतरा हो सकता है। उसके पिता ने भी हलफनामे में कहा था कि परिवार को पहले से ही धमकियों और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और पहचान उजागर करने की अनुमति दे दी।

 

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700 किलो ड्रग्स और 22 साल की कैद

बलतेज सिंह ऑकलैंड का एक पूर्व प्रतिष्ठित व्यवसायी था लेकिन पर्दे के पीछे वह अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा था। उस पर 700 किलो से ज्यादा मेथामफेटामाइन आयात करने का दोष सिद्ध हुआ है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मजबूती से तर्क दिया कि बलतेज की पहचान पहले ही भारतीय मीडिया में सामने आ चुकी है, इसलिए न्यूजीलैंड में इसे गोपनीय रखने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है। अदालत ने माना कि इतने बड़े आपराधिक मामले में जनता को अपराधी की पहचान जानने का पूरा अधिकार है। जिसके बाद उसे 22 साल के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी गई।


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