• NEW YORK MILLS
17 May 2025, (अपडेटेड 17 May 2025, 10:18 AM IST)
हादी मातार ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा था कि सलमान रुश्दी ने इस्लाम का अपमान किया है, वह पैगंबर का मजाक उड़ा रहे हैं। पूरे विवाद की वजह क्या है, हमलावर कौन है, विवाद क्या है, पढ़ें इस रिपोर्ट में।
हादी मातार और सलमान रुश्दी। (Photo Credit: Social Media)
मशहूर लेखक सलमान रुश्दी पर साल 2022 में जानलेवा हमला करने वाले शख्स हादी मातार को 25 साल जेल में गुजारने होंगे। उसे 25 साल की कैद की सजा सुनाई गई है। हमले में सलमान रुश्दी के एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई थी। फरवरी में जूरी ने हादी मातार को हत्या की कोशिश करने के मामले में दोषी करार दिया था। जब अदालत ने फैसला सुनाया, तब सलमान रुश्दी न्यूयॉर्क की कोर्ट में नहीं आए थे। उन्होंने अपना बयान दर्ज करा दिया था।
सलमान रुश्दी ने कोर्ट से कहा था कि कैसे एक नकाबपोश शख्स ने चौटाउक्वा इंस्टीट्यूशन में उनके सिर और शरीर पर दर्जनों बार चाकू मारा। वह लेखकों की सुरक्षा से जुड़े एक विषय पर बोलने जा रहे थे। जब हमला हुआ, तब एक वक्त को उन्हें लगा कि मौत हो जाएगी। मातार को रुश्दी पर हमले के लिए अधिकतम 25 साल और मंच पर मौजूद एक अन्य व्यक्ति को घायल करने के लिए 7 साल की सजा मिली। चूंकि दोनों घटनाएं एक ही समय में हुईं, इसलिए सजाएं एक साथ चलेंगी। न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जेसन श्मिट ने मांग की थी कि ज्यादा से ज्यादा सजा मिले क्योंकि हमलावर का मकसद 1400 लोगों में खौफ पैदा करना था।
हादी मातार को किन दो मामलों में सजा मिली? हादी मातार पर हमला करने के लिए अधिकतम 25 साल की सजा और मंज पर मौजूद एक अन्य शख्स को घायल करने के लिए 7 साल की सजा मिली। दोनों घटनाएं एकसाथ ही हुई हैं, इसलिए दोनों सजाएं एकसाथ ही चलेंगी। कोर्ट के अटॉर्नी जेसन स्मिट ने दोषी के लिए अधिकतम सजा मांगी, उन्होंने कहा कि हमले का मकसद 1400 लोगों को एक संदेश देना था।
हादी मातार ने सलमान रुश्दी पर हमला क्यों किया? सलमान रुश्दी पर हमला 12 अगस्त 2022 को हुआ था। वह न्यूयॉर्क के चौटौक्वा इंस्टीट्यूशन में मौजूद थे। वह एक साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए वहां गए थे। वह अपना व्याख्यान देने वाले थे, इससे पहले ही हादी मातार ने उन पर चाकू से हमला कर दिया।
हमले के बाद क्या हुआ? सलमान रुश्दी इस हमले में बुरी तरह जख्मी हो गए थे। उन्हें गर्दन, चेहरे और पेट में गंभीर घाव लगे। आंखें भी जख्मी हुईं, जिसमें एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। उनका एक हाथ भी ठीक तरह से काम नहीं करता है। उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ा, कई सर्जरी से गुजरना पड़ा।
हमले पर भी सलमान रुश्दी ने लिख डाली किताब सलमान रुश्दी ने खुद पर हुए हमले पर भी एक किताब लिखी है, 'नाइफ, मेडिटेशन आफ्टर एन अटेम्पटेड मर्डर।' यह किताब साल 2024 में आई। उन्होंने अपने साथ हुए उन अनुभवों का जिक्र इस किताब में किया है, जिनसे वे रोज दो-चार हो रहे हैं। वह ठीक हो गए हैं लेकिन आंख की रोशिनी गंवावकर।
सलमान रुश्दी की नई किताब नाइफ।
हादी मातार ने सलमान रुश्दी को क्यों मारा था? सलमान रुश्दी से जुड़े सारे विवादों की जड़ की वजह एक किताब है, 'द सैटैनिक वर्सेज।' कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन इस किताब को पैगंबर मोहम्मद का अपमान बताते हैं, इसे ईशनिंदा के तौर पर देखते हैं। साल 1989 में ईरान के अयातुल्ला खुमैनी ने सलमान रुश्दी की हत्या के लिए फतवा जारी किया था। हादी मातार, लेबनान के हिजबुल्लाह जैसे शिया कट्टरपंथी संगठनों और ईरान की विचारधारा से प्रभावित था। उसने इस्लाम के अपमान का आरोप लगाकर सलमान रुश्दी पर हमला बोला था।
द सैटेनिक वर्सेज में ऐसा है क्या? सलमान रुश्दी की किताब द सैटेनिक वर्सेज (1988) एक जादुई यथार्थवादी उपन्यास है। यह दो भारतीय मुस्लिम किरदारों, जिब्रील फरिश्ता और सलादीन चमचा की कहानी है, जो एक विमान हादसे के बाद चमत्कारिक रूप से बच जाते हैं। कहानी में धर्म, पहचान, और प्रवास जैसे विषयों पर गहरी बात की गई है। किताब में इस्लाम के कुछ संदर्भ, खासकर पैगंबर मुहम्मद से प्रेरित एक चरित्र, विवादास्पद रहे। इसकी वजह से कई देशों में किताब पर प्रतिबंध लगा और सलमान रुश्दी को धमकियां मिलीं। यह किताब भारत में एक अरसे तक बैन रही, इस पर इतना विवाद हुआ कि वह आज तक भारत नहीं आ पाए।
हादी मातार के बारे में जो आप जानना चाहते हैं-
हादी मातार की उम्र करीब 24 साल है। वह अमेरिकी नागरिक है। न्यू जर्सी उसका घर है। वह लेबनानी मूल का है। उसे दुनिया सलमान रुश्दी पर हमला करने वाले शख्स के तौर पर जानती है। वह शिया कट्टरपंथी विचार धारा से प्रभावित है। उसने अयातुल्लाह खुमानी के फतवे को अंजाम देने के लिए सलमान रुश्दी पर हमला किया। वह हिजबुल्लाह और ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से प्रेरित था लेकिन किसी भी संगठन से उसके जुड़ने की बात सामने नहीं आई। अब उसे जेल में 25 साल गुजारने होंगे।
सलमान रुश्दी के बारे में जो आप जानना चाहते हैं-
सलमान रुश्दी एक प्रसिद्ध ब्रिटिश-भारतीय लेखक और उपन्यासकार हैं। उनका जन्म 19 जून 1947 को मुंबई, भारत में हुआ था। 1960 के दशक में वह हायर स्टडीज के लिए इंग्लैंड चले गए। उन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से इतिहास में डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद, वे ब्रिटेन में ही रम गए। वहीं उन्होंने लिखना शुरू किया। उनकी लेखनी में जादुई यथार्थवाद और ऐतिहासिक-राजनीतिक विषय शामिल होते हैं। 1988 में द सैटेनिक वर्सेज के प्रकाशन के बाद, इस किताब को कुछ मुस्लिम समुदायों ने ईशनिंदा माना।
1989 में, ईरान के आयतोल्लाह खोमैनी ने रुश्दी के खिलाफ फतवा जारी किया, जिसमें उनकी हत्या के निर्देश दिए गए। फतवे के बाद सलमान रुश्दी को ब्रिटेन में पुलिस सुरक्षा में रहना पड़ा। वे कई सालों तक छिपकर रहे, बार-बार जगह बदलते रहे। 2000 के दशक में, जब फतवे का खतरा कुछ कम हुआ, सलमान रुश्दी न्यूयॉर्क में बस गए। उनकी किताब द सैटेनिक वर्सेज और मिड नाइट चिल्ड्रेन विवादों में रही है।