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संसदीय समिति ने किया किसानों का समर्थन, अब SC से लगाई मदद की गुहार

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल और प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह केंद्र को समिति की सिफारिश लागू करने के लिए कहे।

Farmers Protest

27 दिनों से किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल आमरण अनशन पर हैं। उनके समर्थक साथ हैं। (तस्वीर-PTI)

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लगातार 27 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उन्हें इन्फेक्शन का खतरा मंडरा रहा है और सेहत बिगड़ती जा रही है। जगजीत सिंह डल्लेवाल और प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि अदालत केंद्र सरकार को निर्देश दे कि संसदीय स्थाई समिति की सिफारिशें लागू की जाएं। सिफारिश में कहा गया है कि केंद्र कानूनी तौर पर न्यूतनतम समर्थन मूल्य की गारंटी ले। 

संसद सत्र में पेश 'डिमांड फॉर ग्रांट 2024-25' पर कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर बनी स्थाई समिति ने कृषि उपज के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत MSP का समर्थन किया गया है। समिति ने इसे जरूरी बताया है। स्थाई समिति ने यह भी सिफारिश की है कि कृषि मंत्रालय एमएसपी प्रस्ताव को लागू करने के लिए एक रोडमैप तैयार करे। साल 2021 से कई किसान संगठन लगातार यह मांग उठा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट से किसानों की मांग क्या है?

जगजीत सिंह डल्लेवाल ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की बेंच को एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है, 'आपसे अनुरोध है कि संसदीय समिति की रिपोर्ट पर विचार करें। किसानों की भावनाओं को समझते हुए MSP गारंटी कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार को आवश्यक निर्देश जारी करें।' जगजीत सिंह डल्लेवाल ने संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के लेटरहेड पर याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। यह दो अलग-अलग संगठन हैं, जो कानूनी तौर पर MSP की गारंटी चाहते हैं। 

जगजीत सिंह डल्लेवाल 26 नवंबर से ही पंजाब-हरियाणा खनौरी सीमा पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। (तस्वीर-PTI)

MSP क्यों मांग रहे किसान?
किसान अपनी फसलों के लिए एक न्यूनतम समर्थन मूल्य चाहते हैं। यह केंद्रीय स्तर पर तय की गई न्यूनतम दरें हैं, जिससे कम पर फसलों के बिकने पर रोक लगे। किसानों को इससे अपनी उपज का सही दाम मिलता है। सामान्य तौर पर ज्यादातर कृषि फसलें ऐसी हैं, जिनके दाम बाजार के हिसाब से तय होते हैं जो सरकार की ओर से निर्धारित MSP से कम भी हो सकते हैं। 

स्थाई समिति की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
20 दिसंबर को स्थायी समिति की रिपोर्ट संसद में पेश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कानूनी तौर पर MSP लागू करना किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए जरूरी है। ग्रामीण आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भी जरूरी है। 

किसानों की मांग है कि हर हाल में MSP की कानूनी गारंटी केंद्र सरकार दे। (तस्वीर-PTI)



जगजीत सिंह डल्लेवाल 26 नवंबर से ही पंजाब-हरियाणा खनौरी सीमा पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, जिससे केंद्र पर किसानों की एमएसपी की गारंटी की मांग को स्वीकार करने का दबाव बनाया जा सके। जगजीत सिंह डल्लेवाल का कहना है कि कृषि पर संसद की स्थाई समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया है कि एमएसपी पर ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए।'

अब क्या करने वाले हैं किसान?
किसान प्रवक्ता हरपाल सिंह का कहना है कि गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व वाली भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) जैसे अन्य संगठन संसदीय पैनल की सिफारिशों पर चर्चा करेंगे। क्षेत्रीय किसान संगठनों की एक बैठक भी बुलाई गई है। संसदीय समिति ने कहा, 'कानूनी गारंटी के तौर पर MSP लागू होने के लाभ और फायदे इसकी चुनौतियों से कहीं अधिक हैं। MSP के जरिए तय आय, कृषि में निवेश बढ़ने की संभावना है, जिससे खेती में उपज बढ़ेगी और कृषि स्थिर रहेगी।' 

समिति का क्या कहना है?
अगर सरकार सिफारिशों पर कार्रवाई नहीं करती है तो उसे स्थाई समिति के सामने औपचारिक तौर पर बताना होगा कि ऐसा क्यों नहीं हो रहा है। अगस्त में जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा सरकारों से किसानों से बातचीत के लिए एक तटस्थ पैनल बनाने की अपील की थी। कोर्ट ने कहा था कि किसानों को भावनाओं को ठेस न पहुंचाया जाए। 

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