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इंटरनेट की तुलना में बहुत धीमा चलता है दिमाग, क्या कहती है स्टडी?

रिसर्च में कहा गया है कि मनुष्य का दिमाग के डेटा को प्रोसेस करने की दर इंटरनेट पर प्रसारित सूचना की दर से काफी कम होता है। हालांकि, इस गति से भी जिंदा रहना संभव है।

Representational Image : Photo: PTI

प्रतीकात्मक तस्वीर । फोटोः पीटीआई

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एक नए अध्ययन में कहा गया है मनुष्य का दिमाग इंटरनेट पर प्रसारित की जाने वाली सूचना की तुलना में काफी धीमे चलता है। इसके मुताबिक मानव मस्तिष्क में जबकि मानव मस्तिष्क में सूचना प्रवाह की गति केवल 10 बिट प्रति सेकंड (बीपीएस) है, एक सामान्य वाई-फाई कनेक्शन 50 बीपीएस प्रोसेस करता है। एक बिट डेटा की सबसे छोटी इकाई है जिसे कंप्यूटर प्रोसेस या स्टोर करता है।

 

इस महीने की शुरुआत में जर्नल न्यूरॉन ने ‘दि अनबियरेबल स्लोनेस ऑफ बीइंग: व्हाई डू वी लिव ऐट 10 बिट्स?’ नामक अध्ययन प्रकाशित किया था। विश्लेषण करने के लिए, शोधकर्ताओं ने पढ़ने, लिखने आदि जैसे मानवीय व्यवहारों पर डेटा की जांच की।

स्टडी में क्या मिला

कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के न्यूरोसाइंटिस्ट और अध्ययन के लेखक मार्कस मिस्टर ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि 'यह उस अंतहीन चर्चा के विपरीत है जिसमें कहा जाता है कि इंसानी दिमाग बहुत ही जटिल और शक्तिशाली है... अगर इसको संख्या के नजरिए से देखा जाता है तो मनुष्य अविश्वसनीय रूप से धीमा है।'

 

सचेत विचारों की धीमी गति मानव मस्तिष्क के विकास का परिणाम हो सकती है। अध्ययन के अनुसार, 'हमारे पूर्वजों ने एक ऐसी पारिस्थितिकी या पर्यावरण चुना है जहां दुनिया इतनी धीमी है कि जीवित रहना संभव है। 

पर्यावरण धीमी गति से बदलता है

वास्तव में, 10 बिट प्रति सेकंड की आवश्यकता केवल सबसे खराब स्थिति में होती है, और अधिकांश समय हमारा पर्यावरण बहुत अधिक धीमी गति से बदलता है।'

 

कुछ शोधकर्ता नए अध्ययन के निष्कर्षों से पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं। केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट ब्रिटन सॉरब्री ने मीडिया को बताया कि अध्ययन में मानव तंत्रिका तंत्र में सूचना के प्रवाह के बारे में ठीक तरीके से पता नहीं लगाया जा सकता।'

 

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