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केमिकल-स्टील और एल्युमिनियम पर असर, ईरान युद्ध से कितना परेशान हो रहा भारत?

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध संकट की वजह से भारत में स्टील, एल्युमिनियम, टेक्सटाइल और यहां तक ​​कि शराब निर्माताओं को परेशानी आ रही है।

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एलपीजी का टैंकर। Photo Credit- PTI

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पश्चिम एशिया में तेजी से गहराता युद्ध संकट भारत में भी मुश्किलें पैदा कर रहा है। देश में गैस सिलेंडर की किल्लतों के बीच कई और सेक्टर्स पर इसके दुष्प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। दरअसल, अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के उर्जा संयंत्रों पर हमले कर रहे हैं। जवाब में ईरान खाड़ी के लगभग आधा दर्जन देशों के उर्जा संयंत्रों के ऊपर हमला कर रहा है। इसके असर दुनिया के साथ ही भारत के स्टील, एल्युमिनियम, टेक्सटाइल और यहां तक ​​कि शराब निर्माताओं को परेशानी आ रही है।

 

भारतीय निर्माताओं को युद्ध की वजह से अटके हुए शिपमेंट, गैस की कमी और पेमेंट की दिक्कतों की वजह से ऑपरेशनल रुकावटे आ रही हैं। इनमें से ज्यादातर सेक्टर्स होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। होर्मुज से बड़े पैमाने पर कच्चा माल भारत पर पहुंचता था।

अलग-अलग क्षेत्रों में अटके कार्गो

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, भारतीय विनिर्माण सेक्टर सप्लाई चेन के समुद्री रास्तों में अलग-अलग क्षेत्रों पर कार्गो के अटके होने की वजह से अनिश्चितता से जूझ रहा है। इसी की वजह से भारत निर्माता की ऑपरेशन की लागत बढ़ सकती है और प्रोडक्शन के घंटे भी कम हो सकते हैं।

 

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सरकार कर रही है उपाय

हालांकि, केंद्र सरकार ने हर महीने औसत कमर्शियल एलपीजी जरूरत का 20 फीसदी कमर्शियल इस्तेमाल के लिए देने का फैसला किया है। यह काम राज्य सरकारों के साथ समन्वय करके से किया जाएगा। इसके अलावा, घरेलू उपभोक्ताओं के बीच पैनिक बुकिंग के बीच मांग को स्थिर करने के लिए ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में घरों द्वारा सिलेंडर बुकिंग के बीच न्यूनतम गैप को बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। वहीं, शहरी घरों के लिए यह 25 दिन ही रहेगा।

 

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने संसद में कहा कि एलपीजी और गैस चैनलों पर दबाव कम करने के लिए दूसरे फ्यूल ऑप्शन एक्टिवेट किए जा रहे हैं। केरोसीन तेल रिटेल आउटलेट और PDS चैनलों के जरिए लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही इंडस्ट्रियल और कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए फ्यूल ऑयल उपलब्ध कराया जा रहा है।

ज्यादा से ज्यादा केरोसीन देने की बात

वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने एक बयान में कहा कि एक लाख किलोलीटर के स्टैंडर्ड तिमाही एलोकेशन के अलावा, सरकार ने योग्य लोगों को बांटने के लिए राज्य सरकारों को अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर केरोसीन तेल जारी किया है। उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी को छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं के इस्तेमाल के लिए राज्यों को ज्यादा मात्रा में कोयला देने का निर्देश दिया है।

 

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होर्मुज स्ट्रेट कितना जरूरी?

बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट के जरूरी चोकपॉइंट से समुद्री रास्ते के पूरी तरह रुकने से भारत के एलपीजी आयात पर भारी असर पड़ा है। देश अपनी एलपीजी की लगभग 60 फीसदी जरूरतें पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर है और 90 फीसदी एलपीजी आयात होमुर्ज स्ट्रेट के जरिए ही पश्चिम एशिया से होता है। इसका साफ मतलब है कि भारत में एलपीजी की खपत का लगभग 55 फीसदी हिस्सा अभी उपलब्ध नहीं है।

 

इस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं के बजाय घरों को एलपीजी सप्लाई को प्राथमिकता देने के लिए एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट लागू किया है। रिफाइनरियों को एलपीजी प्रोडक्शन को ज्यादा से ज्यादा करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्हें पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन से प्रोपेन, ब्यूटेन और दूसरी चीज़ों को एलपीजी प्रोडक्शन की ओर मोड़ने का निर्देश दिया है।


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