पायलट कोई और था फिर सुमित कपूर क्यों उड़ा रहे थे अजित पवार का प्लेन?
बारामती में हुए प्लेन क्रैश मामले में अब यह जानकारी सामने आई है कि असल में उस दिन सुमित कपूर को अजित पवार का प्लेन उड़ाना ही नहीं था।

सुमित कपूर उड़ा रहे थे अजित पवार का प्लेन, Photo Credit: Social Media
अजित पवार के प्लेन क्रैश में उनके साथ चार और लोगों की दुखद मौत हो गई थी। इसमें एक पायलट, एक को-पायलट, एक सुरक्षा अधिकारी और एक अटेंडेंट शामिल थीं। अब यह सामने आया है कि उस दिन प्लेन उड़ा रहे पायलट सुमित कपूर को असल में यह प्लेन उड़ाना ही नहीं था। कहा जा रहा है कि ड्यूटी किसी और की थी लेकिन उसके न आ पाने के कारण कैप्टन सुमित कपूर की ड्यूटी लगा दी गई। अभी तक यह माना जा रहा है कि संभवत: पायलट की चूक के चलते ही यह हादसा हुआ हो। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
सफेद वर्दी, कंधे पर चार सुनहरी पट्टियां और आत्मविश्वास से लबरेज चेहरा। हादसे के दिन अजित पवार के हवाई जहाज की जिम्मेदारी जिन पायलट सुमित कपूर के कंधे पर थी। उन्हें 15 हजार घंटे का फ्लाइंग एस्पीरियंस था। यानी कैप्टन सुमित ने अपनी जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा फ्लाइंग करते बादलों के बीच गुजारा था लेकिन इसके बावजूद उस दिन चूक हुई। मानवीय चूक या तकनीकी चूक। अभी इसका पता नहीं चला है लेकिन चूक हुई और दूसरी बार लैडिंग की कोशिश करते हुए प्लेन क्रैश कर गया।
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हादसे के बाद अब जो खुलासा हुआ है, वह और ज्यादा चौंकाने वाला है। कैप्टन सुमित कपूर के दोस्तों ने खुलासा किया है कि उस दिन सुमित को वह विमान उड़ाना ही नहीं था। वह उनकी ड्यूटी नहीं थी लेकिन किस्मत में कुछ और लिखा था। ऐसी स्थिति बनी कि विमान की फ्लाइंग सीट पर कैप्टन सुमित को बैठना पड़ा और फिर जो हुआ वह हम सब के सामने हैं। कैप्टन सुमित को लेकर एक खुलासा और हुआ है, राज्यसभा के प्रश्नकाल के दस्तावेजों से। जिसने कैप्टन सुमीत कपूर के पेशेवर ईमानदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला शराब और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का है। तीन साल के निलंबन का है।
क्या है कैप्टन सुमित की कहानी?
आपको हमने शुरुआत में बताया कि कैप्टन सुमित कपूर को 15 हजार घंटे फ्लाइंग का अनुभव था यानी कि वह काफी सीनियर पायलट थे। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में कैप्टन सुमित कपूर के अंतिम संस्कार के दौरान उनके दोस्तों ने NDTV से बात की। दोस्तों ने बताया, 'सुमित कुछ दिन पहले ही हॉन्गकॉन्ग से लौटे थे। उस दिन चार्टर उड़ाने की जिम्मेदारी उनकी नहीं थी। किसी दूसरे कैप्टन का शेड्यूल में नाम था लेकिन वह कैप्टन ट्रैफिक में फंस गया। जिसके बाद कंपनी ने जल्दबाजी में कैप्टन सुमित को प्लेन उड़ाने की जिम्मेदारी सौंपी।'
सुमित के दोस्त सचिन तनेजा ने बताया, 'सुमित ने हाथ में जो ब्रेसलेट पहना हुआ था। उसी से उनके पार्थिव शरीर की पहचान हुई।' एक दूसरे दोस्त जीएस ग्रोवर ने दावा किया कि सुमित को फ्लाइंग सबसे ज्यादा पसंद थी। उनके पास प्लेन उड़ाने का अच्छा खासा अनुभव भी था। हादसे की अच्छे से जांच होनी चाहिए।
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कैप्टन सुमित का परिवार एविएशन इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ है। उनके बेटे और उनके दमाद भी कर्मर्शियल पायलट्स हैं लेकिन हाल में सामने आई कुछ रिपोर्ट्स ने कैप्टन सुमीत की पेशेवर ईमानदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं।
एविएशन के नियमों के मुताबिक उड़ान से पहले एक बूंद शराब भी मौत का वॉरंट हो सकती है। उड़ान भरने से पहले पायलेट्स का ब्रेथ एनलाइज़र टेस्ट होता है। यह टेस्ट इतना स्ट्रिक्ट होता है कि 0.00 यानी की पाइंट के पीछे दो संख्या भी 0 होनी चाहिए। नियम इतने कठोर होते हैं। इसलिए कहा जाता है कि पायलट्स उड़ान के दौरान स्पिरिट बेस्ड परफ्यूम का भी इस्तेमाल नहीं करते लेकिन कैप्टन सुमित के ऊपर शराब पीकर ड्यूटी पर आने के दो गंभीर दोष पाए गए हैं।
दो बार दोषी पाए गए थे कैप्टन सुमित?
13 मार्च 2010 को दिल्ली से जेट लाइट की एक फ्लाइट बेंगलुरू जाने वाली थी। उड़ान संख्या S2- 231। इसे उड़ाने वाले थे कैप्टन सुमित कपूर। उड़ान से पहले कैप्टन सुमित का ब्रेथ एनालाइज़ टेस्ट हुआ। कैप्टन सुमित शराब टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। DGCA ने ऐक्शन लिया और 3 महीने तक ऑफ फ्लाइ विथाउट पे की सजा मिली। साथ ही, इंस्ट्रक्टरशिप पर भी 2 साल के लिए बैन लगा दिया गया। यानी वह 2 साल तक किसी को ट्रेनिंग भी नहीं दे सकते थे। यह पहली बार कैप्टन सुमीत के ऊपर दाग लगा।
7 अप्रैल 2017 को ऐसा दूसरी बार हुआ, जब कैप्टन सुमित ब्रेथ एनालज़र टेस्ट पर पॉजिटिव पाए गए। दिल्ली से गुवाहाटी जाने वाली उड़ान संख्या- S2-4721 को कैप्टन सुमित उड़ाने वाले थे लेकिन फिर से वह एल्कोहल टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। इस बार DGCA ने सख्त रुख अपनाया। 24 अप्रैल 2017 को आदेश जारी कर कैप्टन सुमीत का फ्लाइंग लाइसेंस 3 साल के लिए ही सस्पेंड कर दिया।
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शराब और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का रिकॉर्ड सामने आया है राज्यसभा के प्रश्नकाल के दौरान। पीयूष गोयल ने नियम ताक पर रखने वाले कितने पायलेट्स पर कार्रवाई हुई है। इसे लेकर सवाल किया था। जिस पर तात्कालीन उड्डयन मंत्री ने ऐसे पायलट्स की पूरी एक लिस्ट दी थी। जिनके ऊपर DGCA ने कार्रवाई की थी। इसी रिकॉर्ड में कैप्टन सुमित कपूर का भी नाम सामने आया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सस्पेंसन खत्म होने के बाद कैप्टन सुमित ने रेगुलर पैसेंजर फ्लाइट की जगह चार्टर प्लेन उड़ाने की ओर ध्यान दिया। VSR वेंचर्स जैसे कंपनियों के साथ जुड़े और VIP प्लेन उड़ाने लगे लेकिन अब उस प्राइवेट ऑपरेटर के ऊपर उठने लगे। जिसने ऐसे पायलेट के ऊपर डिप्टी सीएम का प्लेन उड़ाने की जिम्मेदारी सौंपी। जिसका रिकॉर्ड पहले से संदिग्ध था।
28 जनवरी को क्या हुआ था?
28 जनवरी की सुबह करीब 8 बजे डिप्टी सीएम रहे अजित पवार, चार्टर प्लेन से मुंबई से बारामती के लिए निकले। अभी तक की जांच में जो सामने आया है उसके मुताबिक, बारामती एयरपोर्ट पर उस सुबह विजिबिलिटी का इशू था। पायलेट्स ने एक बार लैंड कराने की कोशिश की। जो सफल ना होता देख उन्होंने गो अराउंड का फैसला लिया। यानी लैडिंग इग्नोर करके वापस जहाज हवा में उड़ा लिया। दूसरी बार जब कोशिश हुई तो प्लेन हादसे का शिकार हो गया। रनवे के बगल खाली पड़ी जमीन पर जाकर विमान क्रैश कर गया। हादसे में प्लेन में सवार पाचों की मौत हो गई।
क्रैश का कारण क्या है? अभी यह जांच का विषय है लेकिन सिविल एविएशन मिनिस्टर ने शुरुआती बयान में लो विजिबिलिटी को एक कारण बताया है लेकिन असल कारण जांच के बाद ही सामने आएगा। लो विजिबिलिटी से हुई मानवीय चूक इसका कारण है या फिर कोई तकनीकी खराबी, जांच जारी है।
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