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'मुश्किल है जंग का दौर, अफवाह में न आएं', ईरान युद्ध पर PM नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि खाड़ी के देश भारत का सहयोग कर रहे हैं। वहां मौजूद भारतीयों की हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है।

Narendra Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। Photo Credit: PTI

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में रविवार को कहा कि ईरान युद्ध के बीच देश में अफवाहों को न फैलने दें। सभी नागरिक जागरूक रहें, अफवाहों के बहकावे में न आएं। उन्होंने मौजूदा वक्त को चुनौतीपूर्ण बताया और कहा कि हमें एकजुट होकर इस चुनौती से बाहर निकलना है। उन्होंने कहा कि खाड़ी के देश भारत का सहयोग कर रहे हैं, जिनके लिए देश खाड़ी का आभारी है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'वर्तमान में हमारे पड़ोस में एक माह से भीषण युद्ध चल रहा है। हमारे लाखों परिवारों के सगे-संबंधी इन देशों में रहते हैं, खासतौर पर खाड़ी देशों में काम करते हैं। मैं खाड़ी के देशों का बहुत आभारी हूं, वे ऐसे एक करोड़ से ज्यादा भारतीयों को वहां पर हर तरह की मदद दे रहे हैं।'

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नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री:-
निश्चित तौर पर यह चुनौतीपूर्ण समय है। मैं आज 'मन की बात' के माध्यम से सभी देशवासियों से फिर से यह आग्रह करूंगा कि हमें एकजुट होकर इस चुनौती से बाहर निकलना है। मैं सभी देशवासियों से अपील करूंगा कि वह जागरूक रहें, अफवाहों के बहकावे में न आएं। 

'भारत हर परिस्थितियों का डटकर मुकाबला कर रहा है'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल को लेकर संकट की स्थिति बनती जा रही है। हमारे वैश्विक संबंध, अलग-अलग देशों से मिल रहा सहयोग और पिछले एक दशक में देश का जो सामर्थ्य बना है, इनकी वजह से भारत इन परिस्थितियों का डटकर मुकाबला कर रहा है।'

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ईरान युद्ध का भारत पर असर क्या हो सकता है? 

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण भारत की अर्थव्यवस्था में शुरुआती झटके महसूस होने लगे हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग की वजह से विकास दर, महंगाई, राजकोषीय संतुलन और बाहरी स्थिरता पर जोखिम बढ़ रहा है।

वित्त मंत्रालय की मार्च 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि ईरान से जुड़े घटनाक्रमों का असर, देश की अर्थव्यवस्था पर भी दिख सकता है। संघर्ष का असर, तेल, गैस और उर्वरक पर पड़ सकता है। इनकी आपूर्ति बाधित हो रही है, आयात महंगा हो सकता है। लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है और खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों की मजदूरी में गिरावट देखने को मिल सकती है।


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