सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को जालसाजी और मानहानि से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर जानबूझकर झूठे आरोप लगाए, उनके खिलाफ नकली दस्तावेज दिखाए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को बड़ी राहत दी है।
पवन खेड़ा ने दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और उन्होंने विदेश में संपत्ति छिपाई है। असम पुलिस ने इस पर जालसाजी, मानहानि और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अन्य कई संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। अब उन्हें बड़ी राहत मिली है।
किन आरोपों में घिरे हैं पवन खेड़ा?
असम पुलिस का कहना है कि पवन खेड़ा ने जो दस्तावेज दिखाए, वे फर्जी थे। पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी थी। जमानत याचिका खारिज होन के बाद पवन खेड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
30 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदूरकर की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।