सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने संसद में रेलवे को तत्काल शुल्क, प्रीमियम तत्काल शुल्क, टिकट कैंसिलेशन और फ्लेक्सी फेयर से होने वाली कमाई का सालाना ब्योरा मांगा। हर श्रेणी में कितना राजस्व प्राप्त हुआ, यह भी जानकारी मांगी। सीपीएम सांसद का आरोप है कि सरकार ने श्रेणी और वर्षवार जानकारी देने से मना कर दिया, जबकि 2023 में यही जानकारी उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर 2023 में प्राप्त हुए जवाब को भी पोस्ट किया।
जॉन ब्रिटास ने लिखा, '2023 में रेलवे ने यह माना था कि उसने फ्लेक्सी फेयर, तत्काल और प्रीमियम तत्काल के माध्यम से यात्रियों से 12,128 करोड़ रुपये अधिक वसूले थे। इसी जवाब में यह भी पता चला कि 'विविध कोचिंग प्राप्तियों' (Miscellaneous Coaching Receipts) के तहत 7,674.63 करोड़ रुपये और जमा हुए थे। इसमें कैंसलेशन चार्ज भी शामिल था। अब 2026 में जब अपडेटेड आंकड़े माँगे गए तो सरकार ने यह बहाना बनाते हुए जानकारी देने से मना कर दिया और कहा कि आंकड़े राजस्व के पूरे पूल का हिस्सा हैं।'
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जॉन ब्रिटास ने आगे लिखा, 'अगर कोई संसदीय जवाबदेही से बचने के सबसे चालाकी भरे तरीकों का एक संग्रह बनाया जाएगा तो आज का जवाब निस्संदेह उसमें एक बेहतरीन उदाहरण के तौर पर शामिल होने का हकदार होगा। इतनी गोपनीयता क्यों? क्या छिपाया जा रहा है?'
तीन साल पहले सरकार ने क्या बताया था?
2023 में दिए सरकार के जवाब के मुताबिक 2018-19 में रेलवे को फ्लेक्सी फेयर से 930 करोड़, प्रीमियम तत्काल से 629 करोड़ और तत्काल से 1459 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। 2019-20 में फ्लेक्सी फेयर से 823, प्रीमियम तत्काल से 586 और तत्काल से 1477 करोड़ रुपये की आय हुई। 2020-21 में कोरोना की वजह से आय में कमी आई।
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फ्लेक्सी फेयर से 365, प्रीमियम तत्काल से 118 और तत्काल से 349 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। 2021-22 में यह कमाई क्रमाश: 574, 267 और 915 करोड़ रुपये रही। 2022 से फरवरी 2023 तक फ्लेक्सी फेयर से 1100 करोड़, प्रीमियम तत्काल से 799 और तत्काल से 1737 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।