हैदराबाद से पांच बार के लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में अपेक्षा से बेहतर नतीजे अपने नाम किए हैं। ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र के 13 नगर निगमों में 125 वॉर्डों में जीत हासिल की है। अब एआईएमआईएम के राज्य में 125 पार्षद हैं। इससे पहले के नगर निगम चुनावों में एआईएमआईएम ने 56 पार्षद चुनकर आए थे। यानी कि इस बार ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र निकाय चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है।
यही नहीं कई नगर निकायों में हैदराबाद की पार्टी एआईएमआईएम ने समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसी स्थापित पार्टियों को भी पीछे छोड़ दिया है। दरअसल, पार्टी ने 15 जनवरी 2026 को हुए निकाय चुनावों में महाराष्ट्र के 29 में से 24 नगर निगमों में अपने उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी ने सबसे ज्यादा छत्रपति संभाजीनगर में सीटें जीतकर अपने को वहां स्थापित कर लिया है। संभाजीनगर में पार्टी ने 33 सीटें जीती हैं।
महाराष्ट्र में AIMIM शानदार प्रदर्शन
इसके अलावा एआईएमआईएम ने मालेगांव में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 21 सीटें जीती, नांदेड़ में 14 सीटें जीतीं। अमरावती में पार्टी को 12, धुले में 10 और सोलापुर में आठ सीटें जीती हैं। एआईएमआईएम को सबसे खास जीत बीएमसी में मिली है, जहां उसके 8 पार्षद जीतकर आए हैं। एनसीपी, सपा एमएनएस और एनसीपी (शरद पवार) जैसी पार्टियां मुंबई में ओवैसी की पार्टी से पीछे रही।
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एआईएमआईएम ने पिछले साल नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भी शानदार प्रदर्शन किया था। पार्टी ने अपना 2020 का प्रदर्शन दोहराते हुए 2025 में भी 5 विधानसभा सीटें जीत लीं और उसे राज्य का 1.85 फीसदी वोट शेयर भी प्राप्त हुआ। कांग्रेस जैसी बड़ी और राष्ट्रीय पार्टी बिहार में 6 सीटें ही जीत सकी थी।
उत्तर प्रदेश में बनेगी नई ताकत?
ऐसे में अलग-अलग राज्यों में मिल रही जीत से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के हौसले बुलंद हैं, जिससे उनकी पार्टी तेलंगाना से बाहर विस्तार करने की कोशिश में लगी है। विस्तार की यह कोशिश ओवैसी सालों से कर रहे हैं। इसमें सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिहार-महाराष्ट्र में छाई ओवैसी की पार्टी, अब उत्तर प्रदेश में भी नई ताकत बनकर उभर सकती है? आइए जानते हैं...
दरअसल, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने महाराष्ट्र में जीतनी सीटें हासिल की हैं, उनमें से ज्यादातर मुस्लिम बहुल सीटें हैं। कुछ ऐसा ही हाल बिहार विधानसभा चुनाव में भी हुआ। पार्टी ने जिन पांच विधानसभाओं में जीत दर्ज की है वह मुस्लिम बहुल हैं। ऐसे में साफ है कि ओवैसी सीधे-सीधे मुस्लिम वोटर्स को टारगेट कर रही है। महाराष्ट्र में एआईएमआईएम ने समाजवादी पार्टी के साथ में अन्य सेक्यूलर दलों के वोटों में सेंधमारी की। बिहार में पार्टी ने आरजेडी को तगड़ा झटका देते हुए एक दर्जन सीटों पर नुकसान पहुंचाया।
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यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश में अलगे साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में मुस्लिम वोटर्स की अच्छी-खासी संख्या 19.26 फीसदी (2011 की जनगणना के मुताबिक) हैं। वर्तमान में इस वोट बैंक पर समाजवादी पार्टी की पकड़ है। यही मुस्लिम वोटर कभी बीएसपी और कांग्रेस को वोट किया करता था, लेकिन इस तबके ने समाजवादी पार्टी का हाथ पकड़ा हुआ है। मगर, एआईएमआईएम जिस तरह से बिहार के बाद महाराष्ट्र में जीत दर्ज कर चुकी है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ओवैसी यूपी में भी दमदारी से आगामी चुनाव में उतरेंगे।
यह बात तो साफ है कि बिहार-महाराष्ट्र में मुस्लिम वोटर एआईएमआईएम पर भरोसा जता चुके हैं। सांसद और पार्टी चीफ असदुद्दीन ओवैसी जिस आक्रमकता से बीजेपी पर हमला करते हैं, उससे राज्य में आम मुस्लिम वोटर एआईएमआईएम पर भरोसा जता सकते हैं। अगर ऐसे होता है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान समाजवादी पार्टी को होगा।
जिस तरह से एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी के चुनावों में तेवर देखने को मिल रहे हैं, उससे साफ लग रहा है कि वह आगामी यूपी चुनाव में मजबूती से मैदान में उतरेंगे।