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'मातृभाषाओं को निगल जाती है हिंदी', उदयनिधि स्टालिन ने फिर छेड़ा भाषा वाला राग

DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर से हिंदी को लेकर बयान दिया है और कहा है कि यह भाषा स्थानीय मातृभाषाओं को निगल जाती है।

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उदयनिधि स्टालिन, File Photo Credit: PTI

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तमिलनाडु के डिप्टी सीएम और द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) के नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर से भाषा विवाद के बहाने हिंदी को घेरा है। उदयनिधि का कहना है कि हिंदी कई स्थानीय और मातृभाषाओं को निगल गई है। उन्होंने हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश का जिक्र करके कहा कि इन प्रदेशों में हिंदी आने के साथ धीरे-धीरे कई मातृभाषाएं खत्म हो गईं। अब उनके इस बयान पर केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता एल मुरुगन ने कहा है कि स्टालिन और उनका परिवार हमेशा अलग देश, अलग राज्य और अलग भाषा की बात करता है, उनका यह बयान निंदनीय है और उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

 

1930 के दशक में तमिलनाडु में भाषा आंदोलन के दौरान कई लोगों की मौत हुई थी। उन्हीं की याद में वीर वणक्कम दिवस मनाया जाता है। रविवार को उदयनिधि स्टालिन ऐसे ही एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां उन्होंने कहा कि पेरियार और अन्नादुरई के समय भाषा को लेकर शुरू हुआ आंदोलन आज भी उतनी ही उर्जा के साथ चल रहा है।

 

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रविवार को चेन्नई नॉर्थ ईस्ट जिले में डीएमके की एक मीटिंग के दौरान उदयनिधि ने कहा, 'दुनिया के इतिहास में तमिलों का एक अनोखा स्थान है क्योंकि उन्होंने अपनी मातृभाषा की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाई। हरियाणा, बिहार और यूपी जैसे राज्यों में बोली जाने वाली कई मातृभाषाएं हिंदी के आने के बाद से गायब हो गईं। हिंदी एक ऐसी भाषा बन गई है जो दूसरी भाषाओं को निगल जाती है। यही वजह है कि तमिलनाडु ने हमेशा हिंदी लागू करने का विरोध किया है। अब कई अन्य राज्य भी अपनी भाषा के अधिकार के लिए तमिलनाडु का स्टैंड अपना रहे हैं। तमिलनाडु हमेशा हिंदी थोपने, न्यू एजुकेशन पॉलिसी और केंद्र सरकार के ऐसे किसी भी फैसले का विरोध करेगा जो जबरन लागू किया जाएगा।'

 

 

BJP ने क्या कहा?

 

अब उदयनिधि स्टालिन के बयान पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन ने कहा है, 'वह उनका परिवार हमेशा अलग देश, अलग राज्य और अलग भाषा की बात करते हैं. हमारे प्रधानमंत्री तमिलनाडु के गौरव का सम्मान करते हैं। वह काशी तमिल संगमम का आयोज कर रहे हैं और वह जहां भी जाते हैं, तमिल साहित्य की बात करते हैं। वहीं, डीएमके की सरकार फेल साबित हुई है। वे सिर्फ तमिल भाषा की रक्षा का दावा करते हैं लेकिन वे तमिल लोगों के लिए कुछ नहीं करते हैं। वे विकास का भी विरोध करते हैं और सनातन धर्म का भी विरोध करते हैं।'

 

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मुरुगन आगे कहते हैं, 'मैं उदयनिधि स्टालिन के इस बयान की निंदा करता हूं और उन्हें देश से इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। हम सब भाई-बहन हैं, एक भारत श्रेष्ठ भारत। तमिलनाडु के स्टू़डेंट्स एम्स भोपाल जाते हैं, एम्स ऋषिकेश जाते हैं और देशभर के एम्स में जाते हैं। तमिलनाडु के लोग अब डीएमके के फर्जी प्रोपेगेंडा को समझ गए हैं और वे इन लोगों को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए बेताब हैं।'


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