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NCP एक हुई तो राज्य से लेकर केंद्र तक, पवार का पावर क्या होगा?

शरद पवार ने दावा किया है कि अजित पवार 12 फरवरी को नेशनिल्सट कांग्रेस पार्टी और NCP (शरद पवार) का विलय करना चाहते थे।

Sunetra Pawar

सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार। Photo Credit: PTI

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महाराष्ट्र में साल 2023, पवार परिवार के बिखरने का साल रहा। अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की पार्टी से अलग जाने का फैसला कर लिया था। वह महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे, उन्हें नेता पक्ष बनना था। उन्हें यह अंदाजा हो गया था कि अब महाराष्ट्र की सियासत में बिना एनडीए गठबंधन का हिस्सा बने, सत्ता में आना मुश्किल है। उन्होंने पार्टी तोड़ी, एनसीपी का निशान लिया और महा विकास अघाड़ी (MVA) से नाता तोड़कर, महायुति सरकार का हिस्सा बने।

अजित पवार जुलाई 2023 की तारीख शरद पवार कभी नहीं भूल पाएंगे। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी, दो टुकड़ों में बंट गई थी, पार्टी का जनाधार खिसक गया था, भतीजे ने पार्टी हथिया ली थी। तब, साल 2019 के विधानसभा चुनावों में एनसीपी के पास 53 सीटें थीं, अजित पवार, 40 विधायकों के साथ महायुति सरकार में चले गए थे। 

अंतिम दिनों में NCP का विलय चाहते थे अजित पवार

अजित पवार ने 2 जुलाई 2023 को एकनाथ शिंदे सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके साथ 8 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी। साल 2024 में जब दूसरी बार विधानसभा चुनाव हुए, अजित पवार, बड़ी ताकत बनकर उभरे। अपनी मौत से कुछ दिन पहले, महाराष्ट्र निकाय चुनावों में अजित पवार को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह अपनी पार्टी का विलय, चाचा शरद पवार की पार्टी में करने की वकालत करने लगे। 

अजित पवार की इन कोशिशों को एनसीपी नेता जयंत पाटिल याद करते हैं-

अजित दादा बहुत जोर दे रहे थे कि हम सबको साथ आना चाहिए। हमारी तरफ से किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। इसलिए, अगर भगवान दोनों तरफ के सभी लोगों को, इस तरफ और उस तरफ, अजित दादा की आखिरी इच्छा पूरी करने की समझ दे, तो उनकी आखिरी इच्छा पूरी की जानी चाहिए। पिछले आठ-नौ महीनों से, मैं अकेला ही ये बातचीत कर रहा था; यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि कोई और इसमें शामिल नहीं था। जैसे ही मंत्रालय में बातचीत शुरू हुई, मैंने दूसरों से भी बात करना शुरू कर दिया। मैंने अपनी तरफ के सभी लोगों की सहमति ले ली थी।'

जयंत पाटिल ने कहा, 'वह बार-बार कहते थे, मेरे 40 विधायकों में से 39—या शायद सभी 40-ठीक वैसे ही वोट देंगे जैसा मैं कहूंगा। एक-दो लोग इधर-उधर राय दे सकते हैं, लेकिन कोई भी मेरे से अलग स्टैंड नहीं लेगा। अजित दादा अक्सर यह बात कहते थे। मैं हमेशा पूछता था, क्या आपने यह बात अपने साथ वालों को बता दी है? वह कहते थे, जयंत राव, बिल्कुल चिंता मत करो। मैं जो भी कहूंगा, हमारे सभी विधायक वैसा ही करेंगे। इसलिए, साथ आने का कोई विरोध नहीं है; बल्कि, सभी का जबरदस्त समर्थन है। सब कह रहे हैं कि यह जल्द से जल्द होना चाहिए।'

महाराष्ट्र की सियासत में क्या खिचड़ी पक रही है?

सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल जैसे नेताओं ने कहा है कि सुनेत्रा पवार का डिप्टी सीएम बनना, सामूहिक फैसला है। जनभावनाओं को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है। शरद पवार को इस पर ऐतराज है। उनका कहना है कि उन्होंने अखबारों में ही इसके बारे में पढ़ा है, उन्हें नहीं बताया गया है। शरद पवार ने अजित पवार के साथ एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की चर्चा का भी जिक्र किया, जो फरवरी में प्रस्तावित था।अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार ने शरद पवार से बारामती में मुलाकात की, जिससे विलय और परिवारिक एकता की अटकलें बढ़ गईं। 

एनडीए में  शामिल होने पर क्या कह रहे शरद पवार?

शरद पवार ने अजित को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें मेहनती नेता बताया और कहा कि उनकी विरासत अगली पीढ़ी संभालेगी, लेकिन एनडीए में शामिल होने जैसी कोई बात नहीं है। शरद पवार, अभी इस गठबंधन के लिए तैयार नजर नहीं आ रहे हैं।

शरद पवार, अध्यक्ष, NCP, SP:-
हमें शपथग्रहण के बारे में पता नहीं है। हमें खबरों से इसकी जानकारी मिली। शपथग्रहण के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। यह फैसला एनसीपी ने ही लिया होगा और इस संबंध में उनसे कोई चर्चा नहीं की गई। मुझे शपथग्रहण समारोह की जानकारी नहीं है। मुझे यह भी नहीं पता है कि यह आज होने वाला है। शपथग्रहण समारोह के बारे में मुझसे कोई चर्चा नहीं हुई। शायद उनकी पार्टी ने यह फैसला किया होगा। प्रफुल्ल पटेल एवं सुनील तटकरे के नाम सामने आए हैं और पता चला है कि उन्होंने पहल की है। हो सकता है कि उन्होंने पार्टी के भीतर ही यह फैसला किया हो।

दादा से मिले पार्थ पवार

पार्थ पवार ने शरद पवार से उनके गोविंदबाग स्थित आवास पर मुलाकात की  है। इस दौरान सुप्रिया सुले, विधायक रोहित पवार और युगेंद्र पवार भी मौजूद थे। दिन में, सुनेत्रा पवार अपने छोटे बेटे जय पवार के साथ मुंबई रवाना हुईं हैं। राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा के शनिवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की संभावना है और वह मंत्रिमंडल में अजित पवार की जगह लेंगी।

शरद पवार:-
हम अजित को वापस नहीं ला सकते। हमने उन्हें खो दिया है। अब हमें देखना होगा कि इस स्थिति में क्या किया जाए। विलय पर निर्णय की घोषणा 12 फरवरी को होनी थी। अजित ने यह तारीख दी थी लेकिन दुर्भाग्यवश यह दुर्घटना हो गई।

अगर NCP एक  हो जाए तो महाराष्ट्र की सियासी तस्वीर क्या होगी?

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का जनाधार, महाराष्ट्र में अब शिवसेना के जनाधार से ज्यादा मजबूत है। एनडीए गठबंधन के साथ आने का फायदा, अजित पवार को मिला। शरद पवार, अजित पवार के जाने से कमजोर हो गए। अजित पवार, प्रादेशिक राजनीति में सक्रिय थे, उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले को केंद्रीय जिम्मेदारी मिली थी। तालमेल में कमी हुई, सत्ता को लेकर संघर्ष हुआ तो अजित पवार ने अलग राह थाम ली। अब जब, पार्टी के एक होने की कवायद शुरू हो रही है, तब आइए जानते हैं कि अगर दोनों दल मिले तो क्या होगा?

केंद्र में क्या तस्वीर होगी?

अगर दोनों गुट मिल जाते हैं तो एनसीपी के लोकसभा में 9 सांसद और राज्यसभा में 5 सदस्य हो जाएंगे। इससे एनडीए की ताकत बढ़ सकती है। अभी केंद्र में सहयोगी होने के बाद भी एनसीपी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में हिस्सा नहीं लिया है। अब अगर 9 सीटें एनसीपी के पास आती हैं कि एनसीपी, बीजेपी पर दबाव बढ़ा सकती है और जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), तेलगू देशम पार्टी (TDP) की तरह, मजबूत मंत्रिमंडल मांग सकती है।

 

एनसीपी, केंद्र की सहयोगी तीसरी सबसे बड़ी पार्टी हो सकती है। जेडीयू के 12 सांसद, टीडीपी के 16 और एनसीपी के 9 सांसद, केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को और मजबूत कर सकते हैं। हो सकता है कि तब, सुप्रिया सुले या पार्थ पवार को केंद्र में अहम जिम्मेदारी मिले। इस गठबंधन के भविष्य पर फैसला, अब शरद पवार को करना है।  

राज्य में क्या तस्वीर होगी?

महाराष्ट्र में कुल 288 विधानसभा सीटें हैं। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के पास 41 सीटें हैं। एनसीपी (शरद पवार) के पास 10 सीटें हैं। अगर विलय हुआ तो एनसीपी के कुल 51 विधायक हो जाएंगे। शिवसेना की तरह एनसीपी भी मजबूत स्थिति में आ जाएगी। दूसरी तरफ, महा विकास अघाड़ी गठबंधन और कमजोर हो जाएगा। MVA में सिर्फ 16 सीटों वाली कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की 20 सीटों वाली शिवसेना बचेगी। 


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