logo

ट्रेंडिंग:

23 सीटों पर BJP की नजर, पंजाब में अचानक चर्चा में क्यों आया डेरा सचखंड बल्लां?

पीएम मोदी 1 फरवरी को पंजाब के जालंधर में डेरा सचखंड बल्लां जाकर रविदास जयंती के कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरे को बीजेपी की दोआबा रीजन और दलित समुदाय को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

pm modi to visit punjab on 1 february 2026

पीएम मोदी और डेरा सचखंड प्रमुथ निरंजन दास, Photo Credit: BJP

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Budget2

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 फरवरी 2026 को पंजाब जाएंगे। रविदास जयंती के मौके पर पीएम मोदी पंजाब के जालंधर के पास बल्लां में डेरा सचखंड जाकर डेरा प्रमुख निरंजन दास से मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय जनता पार्टी लगातार पंजाब में अपना विस्तार करने की कोशिश कर रही है। इस दौरे से पहले डेरा प्रमुख निरंजन दास को भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री के लिए चुना गया है। 

 

बता दें कि पीएम मोदी को डेरा प्रमुख निरंजन दास ने खुद आमंत्रित किया था। दिसंबर में वह पंजाब बीजेपी के सीनियर नेताओं के साथ पीएम मोदी से मिले थे और उन्हें 1 फरवरी को गुरु रविदास के गुरुपर्व समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पीएम के दौरे की पु्ष्टि की है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी 1 फरवरी को शाम 4 बजे पंजाब पहुंचेंगे। डेरा सचखंड बल्लां का प्रभाव पंजाब में इतना ज्यादा है कि हर पार्टी का नेता इस डेरे में जाकर सिर झुकाता है। कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी या फिर कोई अन्य राजनीतिक दल हो हर दल के नेता इस डेरे में अक्सर जाते रहते हैं। 

 

यह भी पढ़ें: कांग्रेस में गहराई जाति की लड़ाई, दलित या जट्ट सिख, आंकड़ों से समझिए कौन मजबूत?

रविदासिया समाज को साधने की कोशिश

पंजाब की राजनीति में रविदासिया समुदाय बहुत अहम है। रविदासिया समुदाय का वर्चस्व दोआबा क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। पंजाब में दलित समुदाय की आबादी करीब 32 प्रतिशत है और इनमें सबसे ज्यादा संख्या रविदासिया समुदाय की है। कांग्रेस ने 2022 चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर इसी रविदासिया समुदाय से आने वाले चरनजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया था। रविदासिया समुदाय के वोट पंजाब में खासकर दोआबा क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। 

 

दोआबा रीजन को साधने की कोशिश

राजनीतिक जानकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे को पंजाब में दोआबा रीजन की राजनीति को साधने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं। पंजाब में बीजेपी पर हिंदुओं की पार्टी का टैग लगा है और आम तौर पर हिंदु ही बीजेपी को वोट करते आए हैं। सिखों को साधने के लिए पार्टी शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन करती थी लेकिन अब अकाली दल एनडीए से बाहर है। ऐसे में बीजेपी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने में जुटी है। दोआबा बेल्ट के चारों जिलों में दलित समुदाय अच्छी खासी पकड़ रखता है और इस रीजन में विधानसभा की 23 सीटें हैं और इन में से 9 सीटें रिजर्व हैं। 

 

2011 की जनगणना के अनुसार, इस रीजन में 52.08 लाख लोग रहते हैं। इनमें 19.48 लाख लोग दलित हैं और इनमें 11.88 लाख रविदास, 4.56 लाख वालमिकी और 3.04 लाख अन्य दलित समुदायों की संख्या है। रविदासिया समुदाय में डेरा सचखंड बल्लां का बहुत ज्यादा प्रभाव है। ऐसे में पीएम मोदी का इस डेरे में जाना और डेरा प्रमुख निरंजन दास को भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री के लिए चुनना बीजेपी की इस समुदाय को साधने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है।

 

इस डेरा के प्रभाव को इस बात से समझा जा सकता है कि दोआबा रीजन में जिस भी राजनीतिक दल या व्यक्ति को इस डेरा का समर्थन मिलता है उसकी जीत तय मानी जाती है। हालांकि, डेरा के प्रवक्ता कह चुके हैं कि राजनीति से उनका कोई लेना देना नहीं है और उनके दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। 2022 में आम आदमी पार्टी की आंधी के बावजूद इस रीजन से कांग्रेस 10 सीटें जीत ले गई थी। डेरा बल्लां का प्रभाल कम से कम 19 सीटों पर माना जाता है। 

 

यह भी पढ़ें: क्या चुनाव से पहले बिखर जाएगी पंजाब में कांग्रेस? पूर्व CM चन्नी को BJP का ऑफर

डेरा सच्चा बल्लां का इतिहास

डेरा सच्चा बल्लां का इतिहास बहुत पुराना है। इसकी स्थापन 1895 में बठिंडा के गिल पट्टी गांव के रहने वाले संत पीपल दास ने की थी। संत पीपल दास के बेटे संत सरवन दास 1928 से 1972 तक डेरा के दूसरे प्रमुख रहे। उनके नेतृत्व में, वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर में श्री गुरु रविदास जन्म स्थान मंदिर बनाया गया। इसी डेरा के पांचवे प्रमुख के रूप में संत निरंजन दास ने अगस्त 1994 में पदभार संभाला। दलित समुदाय खासकर रविदासिया समुदाय को जोड़ने में इस डेरे की अहम भूमिका रही है। यह डेरा स्कूल और अस्पताल के जरिए समाज सेवा करता है। इसके साथ ही विदेशों में भी रविदासिया समुदाय को संगठित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। 

2022 में डेरा सचखंड बल्लां पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी

हर नेता झुकाता है सिर

इस डेरे का और रविदासिया समुदाय का महत्तव इस बात से समझा जा सकता है कि इस डेरे में हर पार्टी का नेता आकर सिर झुकाता है। साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने रविदास जयंती के कारण चुनाव की तारीख भी बदली थी। आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, अकाली दल प्रमुथ सुखबीर सिंह बादल, कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा समेत तमाम नेता इस डेरे में जाते हैं और डेरा प्रमुख से मुलाकात करते हैं। 


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap